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बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामले में फंसे जेई के परिवार का हाल बेहाल, मां की मानसिक दशा बिगड़ी, भाई भी रो पड़ते हैं
Wed, 25 Nov 2020 01:02 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 25 Nov 2020 01:02 AM IST
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आरोपी जेई
- फोटो : amar ujala
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करीब 50 बच्चों के यौन शोषण के मामले में फंसे सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन की करतूत सामने आने के बाद उसका परिवार भी खुद को शर्मिंदा महसूस कर रहा है। गांव में रह रही रामभवन की 80 वर्षीय मां की मानसिक दशा बिगड़ गई है।
रामभवन के बारे में पूछने पर उसके भाई भी रो पड़ते हैं। नरैनी संवाद प्रतिनिधि मंगलवार को यौन शोषण के मामले में गिरफ्तार जेई रामभवन के नरैनी स्थित घर पहुंचे। घर के पास रामभवन का मझला भाई राम प्रकाश मिला। रामभवन के बारे में बात करते ही वह मुंह मोड़ कर घर के भीतर चला गया। इसके कुछ देर बाद फिर रामभवन की मां और भाइयों ने बात की।
गरीबी में पढ़ाया, कोई उम्मीद नहीं की
रामभवन की मां रामकिशोरी ने बताया कि उनके पति राजमिस्त्री थे। उनकी कमाई से तीन बेटों और दो बेटियां का भरण-पोषण मुश्किल था। इसलिए वह बटाई पर भी खेत लेकर परिवार के लिए रोटी की व्यवस्था करते थे। इसी गरीबी की हालत में रामभवन को पढ़ाया।
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रामभवन के बारे में पूछने पर उसके भाई भी रो पड़ते हैं। नरैनी संवाद प्रतिनिधि मंगलवार को यौन शोषण के मामले में गिरफ्तार जेई रामभवन के नरैनी स्थित घर पहुंचे। घर के पास रामभवन का मझला भाई राम प्रकाश मिला। रामभवन के बारे में बात करते ही वह मुंह मोड़ कर घर के भीतर चला गया। इसके कुछ देर बाद फिर रामभवन की मां और भाइयों ने बात की।
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गरीबी में पढ़ाया, कोई उम्मीद नहीं की
रामभवन की मां रामकिशोरी ने बताया कि उनके पति राजमिस्त्री थे। उनकी कमाई से तीन बेटों और दो बेटियां का भरण-पोषण मुश्किल था। इसलिए वह बटाई पर भी खेत लेकर परिवार के लिए रोटी की व्यवस्था करते थे। इसी गरीबी की हालत में रामभवन को पढ़ाया।
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बाद में उसने बांदा पॉलिटेक्निक से पढ़ाई पूरी की। नौकरी मिलने से पहले रामभवन नरैनी में ही जूनियर से इंटर तक के छात्रों को घर में ही कोचिंग पढ़ाता था। रामभवन को सिंचाई विभाग में नौकरी मिली, लेकिन उससे कभी कोई अपेक्षा नहीं की। रामकिशोरी के मुताबिक, रामभवन ने कभी उसकी आर्थिक मदद भी नहीं की ।
भाई बोला, कैसे करें मदद, नहीं आ रहा समझ
नरैनी स्थित घर में ही सीमेंट की जाली आदि बनाने व बेचने का काम करने वाले रामभवन के मझले भाई राम प्रकाश ने पहले तो बात करने से मना कर दिया। बाद में बामुश्किल बात की। कहा कि वह लोग मूलरूप से बांदा के ही खरौंच गांव के रहने वाले है।
करीब 50 साल पहले रामभवन के पिता परिवार के साथ नरैनी में आकर बस गए थे। राम प्रकाश का कहना है कि रामभवन के व्यवहार से कभी ऐसा नहीं लगा कि वह बच्चों के साथ अश्लील हरकतें कर सकता है। पर, अब भाई जेल में है, वह उसकी मदद भी करना चाहते हैं, लेकिन कैसे करें। यह समझ में नहीं आ रहा है।
भाई बोला, कैसे करें मदद, नहीं आ रहा समझ
नरैनी स्थित घर में ही सीमेंट की जाली आदि बनाने व बेचने का काम करने वाले रामभवन के मझले भाई राम प्रकाश ने पहले तो बात करने से मना कर दिया। बाद में बामुश्किल बात की। कहा कि वह लोग मूलरूप से बांदा के ही खरौंच गांव के रहने वाले है।
करीब 50 साल पहले रामभवन के पिता परिवार के साथ नरैनी में आकर बस गए थे। राम प्रकाश का कहना है कि रामभवन के व्यवहार से कभी ऐसा नहीं लगा कि वह बच्चों के साथ अश्लील हरकतें कर सकता है। पर, अब भाई जेल में है, वह उसकी मदद भी करना चाहते हैं, लेकिन कैसे करें। यह समझ में नहीं आ रहा है।
बड़े भाई की इलेक्ट्रॉनिक की दुकान
बच्चों के दरिंदगी के आरोप में फंसे रामभवन का बड़ा भाई राजा भइया इलेक्ट्रॉनिक गुड्स का काम करता है। उसकी नरैनी में ही दुकान है। मंगलवार को सुबह वह अपनी दुकान चला गया था।
बहू से नहीं हो पा रही बात
रामभवन की मां रामकिशोरी ने बताया कि बेटे की गिरफ्तारी के बाद से बहू (रामभवन की पत्नी) से बात नहीं हो रही है। वह किस हाल में है। मोबाइल बंद होने की वजह से इसका पता नहीं चल पा रहा है। वह कर्वी में ही रह रही है।
दशहरा पर आया था घर
परिजनों के मुताबिक, नौकरी ज्वाइन करने के बाद रामभवन काफी कम घर आता था। वह ज्यादातर कर्वी में रहता था। आखिरी बार दशहरा पर घर आया था। एक घंटे रुकने के बाद वह वापस कर्वी चला गया था। दीवाली पर भी घर नहीं आया था।
बच्चों के दरिंदगी के आरोप में फंसे रामभवन का बड़ा भाई राजा भइया इलेक्ट्रॉनिक गुड्स का काम करता है। उसकी नरैनी में ही दुकान है। मंगलवार को सुबह वह अपनी दुकान चला गया था।
बहू से नहीं हो पा रही बात
रामभवन की मां रामकिशोरी ने बताया कि बेटे की गिरफ्तारी के बाद से बहू (रामभवन की पत्नी) से बात नहीं हो रही है। वह किस हाल में है। मोबाइल बंद होने की वजह से इसका पता नहीं चल पा रहा है। वह कर्वी में ही रह रही है।
दशहरा पर आया था घर
परिजनों के मुताबिक, नौकरी ज्वाइन करने के बाद रामभवन काफी कम घर आता था। वह ज्यादातर कर्वी में रहता था। आखिरी बार दशहरा पर घर आया था। एक घंटे रुकने के बाद वह वापस कर्वी चला गया था। दीवाली पर भी घर नहीं आया था।