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Exclusive: रामपुरा के राहुल की थेरेपी ब्लड कैंसर रोगियों की बचाएगी जान

Fri, 20 Aug 2021 11:51 PM IST
कानपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन Published by: कानपुर ब्यूरो Updated Fri, 20 Aug 2021 11:51 PM IST
सार

भारत में इस थेरेपी को विकसित करने वाले टीम लीडर जिले के रामपुरा कस्बे के निवासी और मुंबई में आईआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर राहुल पुरवार (42) हैं।

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Rahul's therapy will save lives of blood cancer patients
आईआईटी मुंबई में अध्यापन करते प्रोफेसर राहुल पुरवार। - फोटो : ORAI

विस्तार

जालौन के रामपुरा के राहुल पुरवार ने ब्लड कैंसर के इलाज की काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी सेल (सीएआरटी) थेरेपी विकसित की है। यह थेरेपी ब्लड कैंसर के लास्ट स्टेज तक पहुंचे मरीजों के लिए कारगर साबित हो रही है। इस जीन थेरेपी का क्लीनिकल ट्रायल मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल के एडवांस्ड सेंटर फॉर ट्रीटमेंट रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर (एसीटीआरईसी) की बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट में किया गया।
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इसका परिणाम मरीज पर प्रभावकारी पाया गया है। इस शोध को बायोटेक्नोलॉजी विभाग से सहयोग प्राप्त है। भारत में इस थेरेपी को विकसित करने वाले टीम लीडर जिले के रामपुरा कस्बे के निवासी और मुंबई में आईआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर राहुल पुरवार (42) हैं। राहुल ने बताया कि कैंसर के मरीजों के इलाज में इस थेरेपी में उपचार की क्षमता है, लेकिन अभी भारत में उपलब्ध नहीं है।
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सीएआरटी सेल थेरेपी के लिए हर मरीज को तीन से चार करोड़ रुपये खर्च आता है। भारत में इस थेरेपी के आने के बाद एक मरीज पर 20 से 30 लाख रुपये में इलाज हो सकेगा। महंगी होने से इसको विकसित करने की प्रक्रिया बहुत कठिन है। सीएआरटी सेल को कैंसर के रोगियों के इलाज के लिए विकसित करने को जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बाईरैक) व बायोटेक्नोलॉजी विभाग (डीबीटी) ने पहल की।
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चार जून 2021 को टाटा मेमोरियल अस्पताल और आईआईटी मुंबई के दल ने सीएआरटी सेल थेरेपी को विकसित किया है। अभी इस थेरेपी के क्लीनिकल ट्रायल पर काम किया जा रहा है। बताया कि दो शोध चल रहे हैं। टाटा मेमोरियल अस्पताल पनवेल में वयस्क व बच्चों पर भी शोध हो रहा है। थेरेपी को भारत में स्वदेशी रूप में विकसित करने वाले राहुल की इंटर तक की पढ़ाई समर सिंह इंटर कॉलेज, रामपुरा में हुई।

इनके पिता डॉ. कैलाश नारायण प्राइवेट चिकित्सक हैं। इसके बाद राहुल ने स्नातक व पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री लखनऊ से और शोध कार्य एम्स दिल्ली से किया। इसके बाद पीएचडी हैनओवर मेडिकल स्कूल जर्मनी से की। पोस्ट डॉक्टरेट फेलोशिप हावर्ड मेडिकल कॉलेज बोस्टन यूएसए से की। साढ़े चार साल यूएसए में रहने के बाद दिसंबर 2013 में आईआईटी मुंबई में बॉयो साइंस एवं बॉयो इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में अध्यापन कर रहे हैं। कहा कि थेरेपी से जरूरतमंदों को मदद मिलेगी। राहुल के इस शोध के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने भी 8 जुलाई को ट्वीट कर उनकी पूरी टीम को बधाई दी थी।

गुरु और सहपाठी बोले
समर सिंह इंटर कॉलेज, रामपुरा के प्रिंसिपल ओम प्राख सक्सेना अपने होनहार छात्र की उपलब्धि पर बेहद प्रसन्न हैं। उनका कहना है कि राहुल पढ़ाई में तो अव्वल था ही, साथ-साथ उसमें हर चीज के बारे में गहनता से जानकारी करने की जिज्ञासा भी रहती थी, जिसने आज उसे इस मुकाम पर पहुंचाया है। रामपुरा निवासी जीतेंद्र कुमार ने भी इंटर तक की शिक्षा प्रोफेसर राहुल पुरवार के साथ ही पूरी की है। कहा कि साथी की उपलब्धि पर सिर्फ रामपुरा ही नहीं, बल्कि पूरे जनपद को गर्व महसूस हो रहा है। यदि किसी में प्रतिभा है तो वह छिप नहीं सकती, गांव कस्बे से भी निकलकर प्रतिभा सामने आ ही जाती है।
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