जाजमऊ आगजनी: कोर्ट आज सुना सकती है फैसला, इरफान समेत पांच आरोपियों पर आएगा निर्णय, सात की सुनवाई अभी बाकी
Kanpur News: मुकदमे में पहली चार्जशीट नौ दिसंबर 2022 व दूसरी चार्जशीट 19 दिसंबर 2022 को कोर्ट में दाखिल हो गई थी। पहली में इरफान और रिजवान आरोपी थे, जबकि दूसरी में शौकत अली, मो.शरीफ व इसराइल आटे वाला को आरोपी बनाया गया था।
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कानपुर के जाजमऊ आगजनी मामले में सपा विधायक इरफान सोलंकी, उनके भाई रिजवान समेत पांच आरोपियों के खिलाफ चल रहे मुकदमे में एमपीएमएलए सेशन कोर्ट गुरुवार को फैसला सुना सकती है। मुकदमे में छह मार्च को आरोप तय होने के बाद लगभग एक साल चली न्यायिक कार्रवाई के दौरान अभियोजन ने जहां अपने पक्ष को साबित करने के लिए कोर्ट में कुल 18 गवाह पेश किए।
वहीं, बचाव पक्ष की ओर से भी तीन गवाह पेश किए गए थे। जाजमऊ डिफेंस कालोनी स्थित प्लॉट पर रहने वाली नजीर फातिमा के घर पर 7 नवंबर 2022 को उस समय आग लग गई थी जब वह परिवार के साथ एक शादी समारोह में गई थी। इसमें उसकी गृहस्थी जलकर खाक हो गई थी। नजीर ने अगले दिन इरफान व उनके भाई रिजवान के खिलाफ जाजमऊ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
डीजीसी दिलीप अवस्थी व एडीजीसी भास्कर मिश्रा ने बताया कि अब तक 12 आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग छह चार्जशीट कोर्ट में दाखिल हो चुकी हैं। मुकदमे में पहली चार्जशीट नौ दिसंबर 2022 व दूसरी चार्जशीट 19 दिसंबर 2022 को कोर्ट में दाखिल हो गई थी। पहली में इरफान और रिजवान आरोपी थे, जबकि दूसरी में शौकत अली, मो.शरीफ व इसराइल आटे वाला को आरोपी बनाया गया था।
सात आरोपियों के मुकदमों की सुनवाई अलग चल रही है
इन पांचों आरोपियों के मुकदमों की एक साथ सुनवाई चली और एक मार्च को न्यायिक कार्यवाही पूरी हो गई थी। इसके बाद विशेष न्यायाधीश सत्येंद्र नाथ त्रिपाठी ने फैसले के लिए 14 मार्च की तारीख तय की थी। बाकी सात आरोपियों के मुकदमों की सुनवाई अलग चल रही है। इरफान व रिजवान की ओर से बचाव में पेश किया गया। एक महत्वपूर्ण गवाह जिरह के दौरान बयान से पलट गया था।
कोर्ट के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं
वहीं, मो.शरीफ ने अपने बचाव में गवाह के रूप में खुद ही अपना बयान दर्ज कराया था। अभियोजन की ओर से पेश किए गए पुलिस के गवाहों के अलावा सात गवाह ऐसे हैं जिन पर अभियोजन का पूरा केस टिका है। तीन अन्य गवाहों ने भी इनके बयानों का समर्थन किया है। वहीं, बचाव पक्ष ने भी जिरह में गवाहों के बयान में कई लकुने निकालकर अभियोजन पक्ष को कमजोर साबित करने की कोशिश की है। अब कोर्ट के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं।