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चित्रकूट जेल में गैंगवार
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चित्रकूट। बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी के शार्प शूटर रहे और रगौली जेल में ईद के दिन (14 मई) गैंगवार के बाद पुलिस मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात अपराधी अंशू दीक्षित ने दो कुख्यात अपराधियों मेराज अली और मुकीम काला को मौत के घाट उतारने के बाद पांच बंदियों को पिस्टल के बल पर काबू में कर अपनी बैरक में चला गया था। इस दौरान उसने तीन बंदियों को हाईसिक्योरिटी बैरक में बंद कर और दो बंदियों को अपने साथ लेकर मुख्य गेट के पास आकर खुद को बाहर निकालने पर जोर देता रहा। उसकी मांग न मानने पर दोनों बंदियों की हत्या की भी धमकी दी थी।
इस बीच बैरक की छत पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी पर अंशू दीक्षित ने गेट के कुछ अंदर पोजीशन ली और पुलिस टीम पर फायर कर दिया। पुलिस की ओर से गोलियां चलने पर वह दौड़कर चिल्लाते हुए अपनी बैरक में गया और कहा कि दोनों बंदियों को मार डालेगा, लेकिन जैसे ही वह मुड़ा तभी मौका पाकर पुलिसकर्मियों ने इंसास राइफल से गोली चलाकर उसको ढेर कर दिया था। इंसास राइफल की गोलियां उसके सिर के पीछे के हिस्से में लगी और एके-47 की भी गोलियां उसके शरीर पर लगी थी। पुलिस रिकार्ड में भी इस बात का उल्लेख है कि अंशू दीक्षित को जब पुलिस की गोली लगी तो वह बैरक के आठ कदम अंदर की ओर गिरा था। पुलिस मुठभेड़ में ढेर होने के पूर्व अंशू बार बार चिल्लाकर किसी वाहन से उसे भगाने के लिए जोर दे रहा था, जबकि पुलिस टीम लगातार आत्मसमर्पण के लिए कहकर उसकी घेराबंदी कर रही थी। कुछ देर बाद अंशू दोनों बंदियों को अपने बैरक में भी लेकर चला गया था।
इस बीच पुलिस को घेराबंदी करने का ज्यादा समय मिला, लेकिन असमंजस भी हो गया। बैरक के अंदर जाना बहुत बड़ा खतरा था। पुलिस काफी देर तक लाउडस्पीकर से अंशू को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दे रही थी और अंदर से अंशू गालियों की बौछार कर रहा था, जिससे सभी सहम गए। इसी बीच पुलिस ने अपनी योजना बदली और दूसरी बैरक से चार जवान सीढ़ी लगाकर छत पर पहुंचेे और चिल्लाकर पुलिसकर्मी व जेल स्टाफ ने अंशू को आश्वासन दिया कि उसकी जो मांग है उसे पूरा कराने का प्रयास होगा, लेकिन पहले वह बाहर आए। डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी व पुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, इसी बीच कुछ वाहनों की आवाज सुनाई पड़ी तो अंशू पिस्टल लेकर गाली देता हुआ बाहर निकला और बंदियों के सहारे गेट पर खड़ा होकर बाहर जाने की जिद करने लगा। यह भी कहा कि उसे पकड़ा तो बंदियों को मार देगा।
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पूरा घटना किसी एक्शन फिल्म से कम नहीं थी
जिला जेल रगौली में 14 मई को जो खूनी खेल खेला गया था, वह पूरा किसी एक्शन फिल्म से कम नहीं था, लेकिन बस यह फर्क था कि जेल के कैमरे ही खराब थे। शार्प शूटर अंश्ूा ने मुकीम काला व मेराज अली को मौत के घाट उतारने के बाद बंदियों को अपनी ढाल बनाया था। भारी पुलिस बल के आने और उसकी योजना के अनुसार सब कुछ जल्द न होने पर वह समझ गया कि बंदियों को ढाल बनाना ज्यादा देर तक संभव नहीं है, इसलिए सभी को लेकर वह अपनी बैरक में घुसा और तीन को एक कमरे में बंद कर दिया और दो को साथ लेकर उनकी आड़ में धमकी देने लगा था।
बैरक से दुबारा न निकलता तो बढ़ती आफत
दो कुख्यात अपराधियों की हत्या के बाद पांच बंदियों को लेकर हत्यारा अंशू दीक्षित जिस तरह अंदर बैरक में सबको ले गया था यदि वह बार-बार पुलिस के आत्मसमर्पण करने और उसकी मांग पूरी करने के आश्वासन पर दोबारा पिस्टल लहराता हुआ बाहर न निकलता तो और बड़ी घटना होने की संभावना थी। जिस तरह तीन अन्य बंदियों को दूसरे बैरक में बंद कर पिस्टल लहराता हुआ दोबारा बाहर निकला, तभी पुलिस को उसे मार गिराने का आसान मौका मिल गया। उसके साथ बंदी होते तो पुलिस को गोली चलाने में कुछ देर हो सकती थी।
दो दिन से जेल की बत्ती गुल
जिला जेल की व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। दो दिन से जिला जेल परिसर की लाइट गुल है। 14 मई की घटना के पूर्व 13 मई की रात को भी जेल परिसर की लाइट काफी देर के लिए गायब हुई थी। जब लाइट गुल हुई थी उसी समय जेल अधिकारी, बंदी रक्षकों संग सीसीटीवी कैमरे देखने आए थे। हाईसिक्योरिटी बैरक व आइसोलेट बैरक में बंदियों के पास भी गए थे। उधर,जिले में दो दिन तेज हवा व बारिश से दो सौ गांव की बिजली गुल है, जिसका जिला जेल परिसर में भी प्रभाव दिखा है। बैरक व मुख्य गेट के आसपास की लाइट जनरेटर से दी जा रही है।
शुक्रवार की शाम को विद्युत लाइन बन गई है। बैरक परिसर में दो दिनों तक जनरेटर से काम चलाया गया है। किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई है।
-अशोक कुमार सागर, जेल अधीक्षक, चित्रकूट जेल
अंशू दीक्षित के पास कैसे पहुंची जिगाना
वैसे तो जेल में गैंगवार और पुलिस मुठभेड़ की जांच चल रही है। सभी इस बात को लेकर हैरान हैं कि शार्प शूटर अंशू दीक्षित के पास टर्की मेड जिगाना पिस्टल कैसे पहुंची। यह पिस्टल बड़े माफिया का मनपसंद हथियार है। पश्चिम यूपी से लेकर बडे़ शहरों में हुए दुर्दांत वारदातों में इसका प्रयोग हो चुका है। सूत्र बताते हैं कि यह टर्की मेड जिगाना पिस्टल है, लेकिन कौन लाया जांच का विषय है। जेल प्रशासन, जिला पुलिस समेत न्यायिक व मानवाधिकार आयोग की जांच चल रही है।
जेल टावर में तैनात किए गए सुरक्षाकर्मी
रंगौली जेल में बंदियों व बाहर से आने जाने वालों पर नजर रखने के लिए बनाए गए टॉवरों में पीएसी के जवानों की तैनाती कर दी गई। चार टॉवरों में एक-एक गार्ड की तैनाती की गई है, जबकि इससे पहले लगभग तीन महीने से टॉवर में पुलिसकर्मियों की तैनाती नहीं की गई थी। जिला जेल रगौली में कुख्यात अपराधियों के बीच गैंगवार और पुलिस मुठभेड़ के बाद से जेल का प्रशासन जाग गया है। जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर ने बताया कि सुरक्षा के इंतजाम और तगड़े किए जा रहे हैं। चार टावरों में सुरक्षाकर्मी तैनात कर हाईमास्क लाइट शुरू करा दी गई है। 19 मई को अमर उजाला ने टॉवरों में पुलिसकर्मियों की नहीं लगाई ड्यूटी शीर्षक से खबर फोटो संग प्रकाशित की थी। इसके बाद जेल प्रशासन का ध्यान इस ओर भी गया है।
मेन गेट से अंदर नहीं जा पा रहे वाहन
जिला जेल रगौली के मेन गेट से अब अंदर जाने के लिए पैदल ही बडे़ मुश्किल से जाने दिया जाता है, जबकि पहले कोई भी वाहन मेन गेट से होते हुए अंदर तक चला जाता था। अब उस गेट में एक होमगार्ड की ड्यूटी लगा दी गई है। जो पूछताछ करने के बाद ही किसी को अंदर जाने देता है।
परिजन नहीं मिल पा रहे बंदियों से
जेल के अंदर बंद बंदियों को परिजनों से मिलने व खाने पीने की वस्तु देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। शुक्रवार को परसौंजा गांव के विकास कुमार व शिवकुमार खाने पीने की वस्तु लेकर पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके रिश्तेदार जेल में बंद है। जिनको खाने पीने की वस्तु देना है। अंदर जाने नहीं दिया जा रहा। कहा गया कि खाने पीने की वस्तु अंदर नहीं जाएगी। इसके साथ ही किसी से मिल भी नहीं सकते।
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इस बीच बैरक की छत पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी पर अंशू दीक्षित ने गेट के कुछ अंदर पोजीशन ली और पुलिस टीम पर फायर कर दिया। पुलिस की ओर से गोलियां चलने पर वह दौड़कर चिल्लाते हुए अपनी बैरक में गया और कहा कि दोनों बंदियों को मार डालेगा, लेकिन जैसे ही वह मुड़ा तभी मौका पाकर पुलिसकर्मियों ने इंसास राइफल से गोली चलाकर उसको ढेर कर दिया था। इंसास राइफल की गोलियां उसके सिर के पीछे के हिस्से में लगी और एके-47 की भी गोलियां उसके शरीर पर लगी थी। पुलिस रिकार्ड में भी इस बात का उल्लेख है कि अंशू दीक्षित को जब पुलिस की गोली लगी तो वह बैरक के आठ कदम अंदर की ओर गिरा था। पुलिस मुठभेड़ में ढेर होने के पूर्व अंशू बार बार चिल्लाकर किसी वाहन से उसे भगाने के लिए जोर दे रहा था, जबकि पुलिस टीम लगातार आत्मसमर्पण के लिए कहकर उसकी घेराबंदी कर रही थी। कुछ देर बाद अंशू दोनों बंदियों को अपने बैरक में भी लेकर चला गया था।
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इस बीच पुलिस को घेराबंदी करने का ज्यादा समय मिला, लेकिन असमंजस भी हो गया। बैरक के अंदर जाना बहुत बड़ा खतरा था। पुलिस काफी देर तक लाउडस्पीकर से अंशू को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दे रही थी और अंदर से अंशू गालियों की बौछार कर रहा था, जिससे सभी सहम गए। इसी बीच पुलिस ने अपनी योजना बदली और दूसरी बैरक से चार जवान सीढ़ी लगाकर छत पर पहुंचेे और चिल्लाकर पुलिसकर्मी व जेल स्टाफ ने अंशू को आश्वासन दिया कि उसकी जो मांग है उसे पूरा कराने का प्रयास होगा, लेकिन पहले वह बाहर आए। डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी व पुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, इसी बीच कुछ वाहनों की आवाज सुनाई पड़ी तो अंशू पिस्टल लेकर गाली देता हुआ बाहर निकला और बंदियों के सहारे गेट पर खड़ा होकर बाहर जाने की जिद करने लगा। यह भी कहा कि उसे पकड़ा तो बंदियों को मार देगा।
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जिला जेल रगौली में 14 मई को जो खूनी खेल खेला गया था, वह पूरा किसी एक्शन फिल्म से कम नहीं था, लेकिन बस यह फर्क था कि जेल के कैमरे ही खराब थे। शार्प शूटर अंश्ूा ने मुकीम काला व मेराज अली को मौत के घाट उतारने के बाद बंदियों को अपनी ढाल बनाया था। भारी पुलिस बल के आने और उसकी योजना के अनुसार सब कुछ जल्द न होने पर वह समझ गया कि बंदियों को ढाल बनाना ज्यादा देर तक संभव नहीं है, इसलिए सभी को लेकर वह अपनी बैरक में घुसा और तीन को एक कमरे में बंद कर दिया और दो को साथ लेकर उनकी आड़ में धमकी देने लगा था।
बैरक से दुबारा न निकलता तो बढ़ती आफत
दो कुख्यात अपराधियों की हत्या के बाद पांच बंदियों को लेकर हत्यारा अंशू दीक्षित जिस तरह अंदर बैरक में सबको ले गया था यदि वह बार-बार पुलिस के आत्मसमर्पण करने और उसकी मांग पूरी करने के आश्वासन पर दोबारा पिस्टल लहराता हुआ बाहर न निकलता तो और बड़ी घटना होने की संभावना थी। जिस तरह तीन अन्य बंदियों को दूसरे बैरक में बंद कर पिस्टल लहराता हुआ दोबारा बाहर निकला, तभी पुलिस को उसे मार गिराने का आसान मौका मिल गया। उसके साथ बंदी होते तो पुलिस को गोली चलाने में कुछ देर हो सकती थी।
दो दिन से जेल की बत्ती गुल
जिला जेल की व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। दो दिन से जिला जेल परिसर की लाइट गुल है। 14 मई की घटना के पूर्व 13 मई की रात को भी जेल परिसर की लाइट काफी देर के लिए गायब हुई थी। जब लाइट गुल हुई थी उसी समय जेल अधिकारी, बंदी रक्षकों संग सीसीटीवी कैमरे देखने आए थे। हाईसिक्योरिटी बैरक व आइसोलेट बैरक में बंदियों के पास भी गए थे। उधर,जिले में दो दिन तेज हवा व बारिश से दो सौ गांव की बिजली गुल है, जिसका जिला जेल परिसर में भी प्रभाव दिखा है। बैरक व मुख्य गेट के आसपास की लाइट जनरेटर से दी जा रही है।
शुक्रवार की शाम को विद्युत लाइन बन गई है। बैरक परिसर में दो दिनों तक जनरेटर से काम चलाया गया है। किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई है।
-अशोक कुमार सागर, जेल अधीक्षक, चित्रकूट जेल
अंशू दीक्षित के पास कैसे पहुंची जिगाना
वैसे तो जेल में गैंगवार और पुलिस मुठभेड़ की जांच चल रही है। सभी इस बात को लेकर हैरान हैं कि शार्प शूटर अंशू दीक्षित के पास टर्की मेड जिगाना पिस्टल कैसे पहुंची। यह पिस्टल बड़े माफिया का मनपसंद हथियार है। पश्चिम यूपी से लेकर बडे़ शहरों में हुए दुर्दांत वारदातों में इसका प्रयोग हो चुका है। सूत्र बताते हैं कि यह टर्की मेड जिगाना पिस्टल है, लेकिन कौन लाया जांच का विषय है। जेल प्रशासन, जिला पुलिस समेत न्यायिक व मानवाधिकार आयोग की जांच चल रही है।
जेल टावर में तैनात किए गए सुरक्षाकर्मी
रंगौली जेल में बंदियों व बाहर से आने जाने वालों पर नजर रखने के लिए बनाए गए टॉवरों में पीएसी के जवानों की तैनाती कर दी गई। चार टॉवरों में एक-एक गार्ड की तैनाती की गई है, जबकि इससे पहले लगभग तीन महीने से टॉवर में पुलिसकर्मियों की तैनाती नहीं की गई थी। जिला जेल रगौली में कुख्यात अपराधियों के बीच गैंगवार और पुलिस मुठभेड़ के बाद से जेल का प्रशासन जाग गया है। जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर ने बताया कि सुरक्षा के इंतजाम और तगड़े किए जा रहे हैं। चार टावरों में सुरक्षाकर्मी तैनात कर हाईमास्क लाइट शुरू करा दी गई है। 19 मई को अमर उजाला ने टॉवरों में पुलिसकर्मियों की नहीं लगाई ड्यूटी शीर्षक से खबर फोटो संग प्रकाशित की थी। इसके बाद जेल प्रशासन का ध्यान इस ओर भी गया है।
मेन गेट से अंदर नहीं जा पा रहे वाहन
जिला जेल रगौली के मेन गेट से अब अंदर जाने के लिए पैदल ही बडे़ मुश्किल से जाने दिया जाता है, जबकि पहले कोई भी वाहन मेन गेट से होते हुए अंदर तक चला जाता था। अब उस गेट में एक होमगार्ड की ड्यूटी लगा दी गई है। जो पूछताछ करने के बाद ही किसी को अंदर जाने देता है।
परिजन नहीं मिल पा रहे बंदियों से
जेल के अंदर बंद बंदियों को परिजनों से मिलने व खाने पीने की वस्तु देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। शुक्रवार को परसौंजा गांव के विकास कुमार व शिवकुमार खाने पीने की वस्तु लेकर पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके रिश्तेदार जेल में बंद है। जिनको खाने पीने की वस्तु देना है। अंदर जाने नहीं दिया जा रहा। कहा गया कि खाने पीने की वस्तु अंदर नहीं जाएगी। इसके साथ ही किसी से मिल भी नहीं सकते।