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Kanpur News: तकनीक का प्रयोगशाला से निकलकर खेत तक पहुंचना जरूरी
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कानपुर। भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान में बौद्धिक संपदा अधिकार पर एक दिवसीय कार्यशाला हुई। इसमें विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीक का प्रयोगशाला से निकलकर खेत और उद्योग तक पहुंचना जरूरी है। यह कार्य दलहन अनुसंधान संस्थान बखूबी निभा रहा है।
कार्यशाला में अनुसंधान परिणामों की सुरक्षा, नियामक ढांचे की जानकारी तथा कृषि नवाचारों के व्यावसायीकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। मुख्य अतिथि आईसीएआर दिल्ली की सहायक निदेशक डॉ. नीरू भूषण ने कहा कि संस्थान अनुसंधान निष्कर्षों की सुरक्षा, नवाचार को प्रोत्साहन तथा प्रयोगशाला से खेत और उद्योग तक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का एक प्रभावी माध्यम है।
निदेशक डॉ. जीपी दीक्षित ने कहा कि विकसित नवीन किस्मों, तकनीकों, उत्पादों एवं प्रक्रियाओं के संरक्षण के लिए संस्थान अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने पल्सेस इनोवेशन हब की इनक्यूबेटी संस्था लिटिल वन एग्री इनोवेशंस के उत्पाद दाल क्रंच का विमोचन किया।
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मुख्य वक्ता केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति के संयुक्त निदेशक डॉ. केएल गुर्जर ने जैव-कीटनाशकों के पंजीकरण, नियामक आवश्यकताओं एवं उद्यमियों के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर जानकारी दी। तकनीकी सत्रों में पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क पर व्याख्यान हुए। इसमें वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, स्टार्टअप्स एवं उद्यमियों सहित 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
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कार्यशाला में अनुसंधान परिणामों की सुरक्षा, नियामक ढांचे की जानकारी तथा कृषि नवाचारों के व्यावसायीकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। मुख्य अतिथि आईसीएआर दिल्ली की सहायक निदेशक डॉ. नीरू भूषण ने कहा कि संस्थान अनुसंधान निष्कर्षों की सुरक्षा, नवाचार को प्रोत्साहन तथा प्रयोगशाला से खेत और उद्योग तक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का एक प्रभावी माध्यम है।
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निदेशक डॉ. जीपी दीक्षित ने कहा कि विकसित नवीन किस्मों, तकनीकों, उत्पादों एवं प्रक्रियाओं के संरक्षण के लिए संस्थान अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने पल्सेस इनोवेशन हब की इनक्यूबेटी संस्था लिटिल वन एग्री इनोवेशंस के उत्पाद दाल क्रंच का विमोचन किया।
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मुख्य वक्ता केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति के संयुक्त निदेशक डॉ. केएल गुर्जर ने जैव-कीटनाशकों के पंजीकरण, नियामक आवश्यकताओं एवं उद्यमियों के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर जानकारी दी। तकनीकी सत्रों में पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क पर व्याख्यान हुए। इसमें वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, स्टार्टअप्स एवं उद्यमियों सहित 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।