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फर्रुखाबाद के अदम्य साहसी लाल ने ढेर किए थे 45 आतंकी, अब शौर्य चक्र के लिए आलोक दुबे का चयन

Mon, 17 Aug 2020 09:15 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 17 Aug 2020 09:15 AM IST
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irrepressible Lal of Farrukhabad had killed 45 terrorists
अपने लाल को निहारती मां - फोटो : amar ujala
फर्रुखाबाद के लाल ने आतंक विरोधी अभियानों में अपने साहस से जिले का मान बढ़ाया है। सेना में हवलदार आलोक दुबे ने कश्मीर में अब तक आतंक विरोधी अभियान में 15 मुठभेड़ों में 45 आतंकी ढेर किए हैं। उन्होंने 22 जून 2019 की रात सोपिया जिले के डारामदोरा के जंगलों में मेजर के निर्देशन में चले आपरेशन का कमांड एंड कंट्रोल कर चार आतंकियों को ढेर किया था। इस अदम्य साहस और वीरता के लिए शौर्य चक्र के लिए उनका चयन होने से गांव में हर्ष का माहौल है।  
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कस्बे से तीन किमी दूर स्थित भटपुरा गांव के स्व. संतोष दुबे के पुत्र हैं आलोक कुमार दुबे। 30 जनवरी 2002 में राजपूत रेजीमेंट फतेहगढ़ में सेना में उनका चयन हो गया। यहां ट्रेनिंग लेने के बाद वे अरुणाचल प्रदेश, अंडमान निकोबार में भी रहे। जनवरी 2017 में वे जम्मू-कश्मीर पहुंचे। अप्रैल 2019 को सोपिया के लसीपुरा में हुई आतंकियों से मुठभेड़ में उन्होंने साहस दिखाया। इसमें ए श्रेणी के आतंकी तौशीफ अहमद ईदू व तीन अन्य आतंकी जफर उल हक, मोहम्मद शफी भट व आकिब अहमद ढेर कर दिया।
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नागरिक बचाए, चार आतंकी ढेर कर आपरेशन भी किया सफल
22 जून 2019 को सोपिया जिले में डारामदोरा के घने जंगलों में चार आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। वह इलाका उनकी कंपनी के डेरे से 7 किलोमीटर दूर था। कंपनी कमांडर से बात करने के बाद इनकी टोली रात को ही मेजर विकास घरसा के नेतृत्व में जंगल की ओर चल पड़ी। इसमें मेजर के अलावा 19 जवान थे।
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आपरेशन से पूर्व दो लोग भागते दिखे। आलोक ने कहा कि पहले पुष्टि की जाए कि यह सिविलियन तो नहीं हैं। नाइट साइट से पता चला कि दो घोड़े भाग रहे हैं। उनके पीछे भागने वाले सिविलियन हैं। बाद में आपरेशन में मदद के लिए उन्हें भी तैयार कर लिया गया। सुबह साढ़े 4 बजे आतंकियों को आत्मसमर्पण कोआवाज दी तो वह फायरिंग कर भागे।

आलोक ने ए डबल प्लस श्रेणी के आतंकी शौकत अहमद पीर को गोली से ढेर कर दिया। तीन अन्य छिप गए। दूसरी कंपनी चार्ली भी दूसरे छोर से आ गई थी। उसने भी दो को ढेर कर दिया। 700 मीटर क्षेत्र में खोज कर आलोक ने चौथे आतंकी साहिल यूसुफ का मल्टी शॉट ग्रेनेड से काम तमाम कर दिया। राष्ट्रपति ने आलोक दुबे के शौर्य चक्र के लिए इसलिए चयन किया कि पूरे आपरेशन का कमांड एंड कंट्रोल इन्होंने ही किया था।
 
पिता के अंतिम दर्शन भी न कर सके थे आलोक
जहां पूरा गांव अपनी माटी के लाल की उपलब्धि पर इतरा रहा है, वहीं उनकी मां आशा देवी अपने पति के निधन से गम में हैं। उन्हें परिजन मोबाइल पर बेटे के शौर्य से जुड़े संदेश दिखाते तो वह पति की फोटो की ओर देखने लगतीं। परिजनों ने बताया कि 21 जुलाई को आलोक के पिता का निधन हुआ था। आलोक जम्मू से फ्लाइट से दिल्ली आए। वहां से कार से चले लेकिन कार रास्ते में खराब हो गई। आखिर 22 जुलाई को दोपहर बाद पिता का दाह संस्कार कर दिया गया। वह देर शाम पहुंच पाए।

आलोक ने फोन पर बताया कि गांव से वह 15 अगस्त को ही जम्मू पहुंचे हैं। देश के प्रति कर्तव्य निभाना फौजी के लिए शान है। डारामदोरा आपरेशन में इटावा जिला निवासी नायक शिवप्रताप भी शामिल थे। उनका चयन सेना मेडल के लिए किया गया है। भटपुरा गांव में मां व 4 भाई रहते हैं। पत्नी पूजा दुबे बच्चों के साथ फतेहगढ़ में शीशमबाग में रहती हैं। बेटी सुहानी कक्षा 8, शिवांगी कक्षा 6व बेटा सूर्यांश कक्षा 1 में आर्मी स्कूल में पढ़ता है।
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