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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Investigation continues on 32 locations of Ghanaram Group, documents of 10 properties found from Rakesh's resi

Income Tax Raid: घनाराम ग्रुप के 32 ठिकानों पर जांच जारी, राकेश के आवास से मिले 10 संपत्तियों के दस्तावेज

Thu, 04 Aug 2022 10:23 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 04 Aug 2022 10:23 PM IST
सार

आयकर विभाग ने घनाराम ग्रुप के झांसी स्थित प्रतिष्ठानों से मिले पांच लॉकर भी सीज किए गए हैं। साथ ही, बड़े पैमाने पर ज्वैलरी भी मिली, जिसका मूल्यांकन कराया जा रहा है। 

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Investigation continues on 32 locations of Ghanaram Group, documents of 10 properties found from Rakesh's resi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में आयकर विभाग की ओर से घनाराम ग्रुप पर की गई छापा मार कार्रवाई गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रही। झांसी, लखनऊ, दिल्ली और कानपुर में 32 प्रतिष्ठानों पर सौ से ज्यादा अफसरों की टीमें जांच-पड़ताल करती रहीं। घनाराम ग्रुप के प्रतिष्ठानों से बड़े पैमाने पर ज्वैलरी मिली है, जिसका मूल्यांकन किया जा रहा है। पांच लॉकर भी मिले हैं, जिन्हें सीज किया गया है। वहीं ग्रुप पहले सरकारी ठेकेदार के तौर पर सरकारी काम करते थे। अब वो रियल इस्टेट कारोबार में आ गए हैं। अकेले झांसी में ही छह प्रोजेक्ट चल रहे हैं। 

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बहुमंजिला स्काई टॉवर में कई लोगों का पैसा लगा है। इसकी जांच-पड़ताल की जा रही है। वहीं कानपुर में ठेकेदार राकेश यादव के आवास से 10 संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इसे जब्त करके इनकी खरीद-फरोख्त के संबंध में पूछताछ की जा रही है। घनाराम इंफ्रा कंपनी के झांसी, लखनऊ, दिल्ली और कानपुर से जुड़े लोगों के 32 प्रतिष्ठानों पर सौ से ज्यादा अफसरों की टीमों ने कार्रवाई की थी। 

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घनाराम कंपनी के निदेशक बिशन सिंह के भाई श्याम सुंदर सिंह के प्रतिष्ठानों पर भी छापा मारा गया था। श्याम सुंदर सपा के पूर्व एमएलसी हैं। इसके साथ ही यहीं पर बिल्डर विजय सरावगी, वीरेंद्र राय, संजय अरोड़ा, शिवा सोनी, मयंक गर्ग के कार्यालयों, आवास व अन्य प्रतिष्ठानों समेत 25 जगहों पर कार्रवाई की गई थी। सूत्रों ने बताया कि कंपनी 20 साल से ज्यादा पुुरानी है। पहले सरकारी ठेके लेकर बांध बनाने और इसकी मरम्मत का काम करते थे। 

इसके साथ रियल इस्टेट कारोबार में भी तेजी से दखल बढ़ाया है। झांसी में ही अन्य छोटे बिल्डरों के साथ मिलकर फ्लैट, बहुमंजिला टॉवर, मॉल बना रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि इन प्रोजेक्टों में बडे पैमाने पर निवेश आया है। इसके श्रोतों की जांच की जा रही है। जमीनों की खरीद, फरोख्त, फ्लैटों की बिक्री में कैश लेन देन हुआ है, चेक के जरिए भुगतान लिया गया है। इसकी भी जांच की जा रही है। 

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विवादों का स्काई टॉवर, अब आयकर के घेरे में
घनाराम ग्रुप झांसी में स्काई टॉवर बना रहा है। कई मंजिला इस टॉवर में सैकड़ों फ्लैट बनाए गए हैं। यह टॉवर विवादों से घिरा रहा है। अब आयकर की जांच के घेरे में आ गया है। इसमें बहुत अधिक निवेश किया गया है। इसमें तमाम लोगों के रुपये लगे होने के सुबूत मिल रहे हैं। ऐसे में जांच का दायरा और बढ़ सकता है। इस टॉवर को लेकर तमाम शिकायतें झांसी डेवलेपमेंट अथॉरिटी जेडीए और जिला प्रशासन से की गई हैं। इसके बाद भी निर्माण और फ्लैटों की बिक्री जारी रही है।     

सूत्रों ने बताया कि झांसी शहर के बीचों बीच स्थित एक इंटर कॉलेज के पास इसका निर्माण पांच साल से कराया जा रहा है। इसके निर्माण कार्य शुरू होने और अब बनकर तैयार इस टॉवर में सैकड़ों फ्लैट हैं। अब इस पूरे टॉवर के निर्माण पर लगे रुपये के श्रोत की पड़ताल विभाग ने शुरू कर दी है। सूत्रों ने बताया कि इतनी बड़ी जमीन और फ्लैट निर्माण में कई सौ करोड़ का निवेश है। अब इसकी जांच पड़ताल की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि घनाराम इंफ्रा कंपनी का 2013 में पंजीकरण कराया गया। कंपनी के निदेशक बिशन सिंह, प्रवेंद्र सिंह, और घनाराम हैं।

राकेश यादव ने कराई दो दर्जन से ज्यादा डील
आयकर विभाग की टीमों ने बुधवार को शहर में कल्याणपुर आवास विकास स्थित नवशील धाम में ठेकेदार राकेश यादव के प्रतिष्ठान पर छापा मारा था। इसके यहां से 10 संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। कई संपत्ति नई खरीदी गई हैं जबकि कुछ सालों पुरानी हैं। इन सभी दस्तावेजों को विभाग के अफसरों ने जब्त कर लिया है। बेनामी प्रकोष्ठ में जांच के लिए भेजी जाएंगी। जांच में यह भी पता चला है कि राकेश यादव ने घनाराम ग्रुप के लिए दो दर्जन से ज्यादा डील करवाई हैं। इसके एवज में मोटा कमीशन और रुपया लिया। अब यह जांच की जा रही है कि यह लेनदेन किस प्रक्रिया के तहत हुआ है। 

कैश लेन-देन के साथ ही बड़े पैमाने पर खातों से भी लेन-देन हुआ है। सूत्रों ने बताया कि राकेश यादव का सपा के एक बड़े नेता से खास संबंध रहे हैं। हालांकि अब उन्होंने अपनी पार्टी बना ली है। सूत्रों ने बताया कि वो पहले घनाराम ग्रप कंपनी के निदेशकों के साथ पहले काम करता था। राजनीतिक पार्टी के बड़े नेता का करीबी बन गया और फिर रियल इस्टेट का काम शुरू कर दिया। 2018-19 में पान मसाला का काम शुरू किया लेकिन काम नहीं चल सका। जिसे बंद कर दिया। अब इसकी दिबियापुर में प्लास्टिक बोरी बनाने, कारगिल पेट्रोल पंप बर्रा आठ के पीछे छपाई और उन्नाव में जींस बनाने का भी काम है।

सात बैंकों की 37 खातों की जांच-पड़ताल
घनाराम ग्रुप व उसके सहयोगी बिल्डरों के 32 ठिकानों पर जांच के साथ ही अफसरों की टीमों ने झांसी के सात बैंकों की अलग-अलग शाखाओं में जाकर 37 खातों की जांच-पड़ताल की। इसमें लेन-देन का ब्यौरा जुटाया गया। सूत्रों ने बताया कि विभाग की टीमें इलाहाबाद बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, यूनियन बैंक के अलावा निजी बैंकों की सात शाखाओं में गईं। यहां बिल्डरों से जुड़े 37 खातों की पड़ताल की गई। इसके अलावा बैंकों से इन खातों के रिकॉर्ड भी लिए गए। बताया जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर खाते बिल्डरों के नाम पर नहीं है, लेकिन खातों के जरिए कई बड़े लेन-देन हुए हैं। इसके सुबूत आयकर विभाग की पड़ताल के दौरान सामने आए। 

एक छोटे बिल्डर का टर्नओवर 25 से 30 करोड़
सूत्रों ने बताया कि झांसी में रियल इस्टेट का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। घनाराम ग्रुप के साथ कई और छोट़े बिल्डरों कें यहां भी कर्रवाई की गई है। एक छोटे बिल्डर का टर्नओवर 25 से 30 करोड़ सालाना है। यह सभी आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। कोई निवेशक बना है तो कई कंपनी में निदेशक है। इससे एक बड़े कॉकस में बेनामी लेन-देन के सुबूत भी मिल रहे हैं। 

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