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यूपी: टेलीकॉम उपकरण लूटकर विदेश में बेचने वाला अंतर्राष्ट्रीय गैंग पकड़ा गया, जियो कंपनी का एजीएम था गिरोह का सरगना

Thu, 31 Dec 2020 08:20 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 31 Dec 2020 08:20 PM IST
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International gang caught, robbing telecom equipment and selling it abroad
अंतर्राष्ट्रीय गैंग पकड़ा गया - फोटो : अमर उजाला
इटावा जिले में टेलीकॉम कंपनी के टॉवरों से नेटवर्किंग के कीमती कार्ड लूटकर अमेरिका में बेचने वाले गैंग के दस सदस्यों को इटावा पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से करीब दो करोड़ रुपये के लाइन और आरएसपी कार्ड, तीन लग्जरी कारें और अवैध हथियार बरामद हुए हैं।
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गैंग का संचालन उत्तराखंड में तैनात जियो कंपनी का एजीएम रमेश शर्मा कर रहा था। इस कार्रवाई के बाद पुलिस को देश में सक्रिय विदेशी गिरोह की जानकारी मिली है। एसएसपी आकाश तोमर ने बताया कि इंटरपोल की मदद से विदेशी गिरोह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
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सिविल लाइन थानाक्षेत्र में लगे जियो टॉवर के गार्ड को बंधक बनाकर हथियारबंद बदमाशों ने 5 दिसंबर की रात डाका डालकर करीब तीन करोड़ रुपये के उपकरण लूट ले गए थे। डकैती का केस दर्ज कर पुलिस पड़ताल में जुटी तो पता चला कि 6 दिसंबर को इसी तर्ज पर आगरा में बदमाशों ने जियो के टॉवर से लूटपाट की।
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काफी छानबीन के बाद पता चला कि दिल्ली में कृष्णा एयर एक्सप्रेस नाम से कोरियर कंपनी चलाने वाले मथुरा निवासी पुष्पेंद्र कुमार के इशारे पर वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिस ने पुष्पेंद्र को राजस्थान मेें डींग से दबोचा तो घटना में हाईप्रोफाइल चेहरों के शामिल होने की जानकारी मिली।

जियो का एजीएम ही देता था उपकरणों की लोकेशन 
पुष्पेंद्र से पूछताछ में पता चला कि नेटवर्क प्रोवाइडर के रूप में इस्तेमाल होने वाले आरएसपी, लैन और प्रोसेसिंग कार्ड की जानकारी टेलीकॉम कंपनियों के उच्चाधिकारियों को होती है। उत्तराखंड में तैनात जियो का एजीएम रमेश उसे हर जिले में लगे उपकरणों की लोकेशन देता था।

इसके बाद गैंग का मुख्य सदस्य और वोडाफोन कंपनी से निकाला गया इंजीनियर चंदन पाण्डेय टीम के साथ जाकर उपकरणों की पुष्टि करता था। जानकारी पुष्ट होने पर टीम के सदस्य टॉवर के गार्ड को फांसकर रेकी करते थे। इसी दौरान मौका देखकर बदमाश किसी रात गार्ड को बंधक बनाकर या उसकी मदद से वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते थे।

अमेरिकी बाजार में होता था उपकरणों का सौदा
एसएसपी आकाश तोमर ने बताया कि अपने देश की कोई टेलीकॉम कंपनी किसी दूसरी कंपनी के उपकरण खरीदने को तैयार नहीं होती। इसलिए गैंग के सदस्य इसे विदेशों में बेचते थे। गिरोह ने अभी तक आगरा, इटावा और मेरठ समेत देश के कई हिस्सों से लूटे गए उपकरणों को अमेरिकी बाजार में बेचा है।

इनके 20 से ज्यादा विदेशी खातों को खंगाल गया तो एक साल में करीब 30 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन मिला। उन्होंने बताया कि वारदात से पहले ही विदेशी खरीदार उपकरणों की कीमत लगाकर सौदा कर लेते थे। लूट के बाद शिपिंग करके माल को महज दो से चार दिन के भीतर विदेश पहुंचा दिया जाता था।
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