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मासूम की जलकर मौत: मां बोली- मेरी लापरवाही ने ली बेटी की जान, जला शव देख लोगों के खड़े हुए रोंगटे, पढ़ें मामला

Tue, 14 Jan 2025 09:25 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 14 Jan 2025 09:25 AM IST
सार

Etawah News: नायब तहसीलदार ने बताया कि परिजनों की लापरवाही से यह हादसा हुआ है। सीओ ओमकारनाथ शर्मा ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। घटना की जांच की जा रही है।

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Innocent burnt to death Mother said my carelessness took daughter life people got goosebumps after seeing body
मृतक मासूम की फोटो - फोटो : amar ujala

विस्तार

हाय री फूटी किस्मत, लापरवाही न की होती तो मेरी परी जैसी गुड़िया की जान नहीं जाती और गोदी में खेल रही थी। मां रागिनी ऐसे कहकर दहाड़े मारकर रो रही थी। मां की हृदय विदारक चीत्कार सुन मौजूद लोग आंखों को नम होने से नहीं रोक पाए। सोमवार की सुबह दूध लेकर लौट रही रागिनी ने कमरे से धुआं उठता देखा। कमरे के अंदर पहुंचते ही चीत्कार करते हुए बेहोश हो गई।

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आसपास के लोग दौड़े और कमरे में जमीन पर 11 माह की मासूम का बुरी तरह जला शव देख सभी के रोंगटे खड़े हो गए। महिलाओं ने रागिनी को होश में लाया। उसके बाद रागिनी ने बेटी की मौत के लिए खुद को जिम्मेदार ठहराते हुए रोने लगी। कुछ ऐसी ही हालत कोने में फफक रहे पिता सुरजीत पाल का भी था। वह मासूम के शव को निहारते हुए सुबह की उस घड़ी को कोस रहे थे, जब उन्होंने तसले में आग जलाकर रखी थी।

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कमरों में न जलाएं अलाव: प्रियांशू अवस्थी
अग्निशमन द्वितीय अधिकारी प्रियांशू अवस्थी ने बताया कि बंद कमरों में अलाव, अंगीठी, ब्लोअर आदि नहीं जलाने चाहिए। इनसे पैदा होने वाली गर्मी से धीरे धीरे कमरे का ऑक्सीजन खत्म हो जाता है और कार्बन मोनोऑक्साइड ज्यादा होने लगता है। यह जहरीली गैस सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचकर खून में मिल जाती है। इस वजह से खून में हीमोग्लोबिन का लेवल घट जाता है और बेहोशी छा जाती है और इंसान की मौत हो जाती है। अलाव को ऐसी वस्तुओं से दूर रखें जो जल्द आग पकड़ लेती है। अलाव हमेशा खुले स्थान पर ही जलाएं, इससे असामयिक होने वाली जन एवं धन हानि को रोका जा सकता है।

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इन बिंदुओं का भी रखे ध्यान

  • अलाव जलाने के लिए खुला और सुरक्षित स्थान चुनें। पेड़ों, झाड़ियों या अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रहे।
  • तेज हवा में अलाव न जलाएं, क्योंकि चिंगारियां फैल सकती है।
  • अलाव में केवल सूखी लकड़ी या पत्तों का उपयोग करें। ज्वलनशील रसायन (जैसे पेट्रोल या केरोसीन) का उपयोग न करें।
  • आग बुझाने के लिए पास में पानी या रेत अवश्य रखें।
  • अलाव के बहुत अधिक पास न बैठे। बच्चों और पालतू जानवरों को दूर रखें।
  • अलाव बंद करते समय सुनिश्चित कर लें कि आग पूरी तरह बुझ गई है। राख का पानी डालकर ठंडा करें।
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ये था पूरा मामला
कमरे में बेड के नीचे तसले में रखी आग से 11 माह की मासूम बच्ची जिंदा जल गई। जिस किसी ने यह मंजर देखा तो उसकी रूह कांप गई। बताया जा रहा है कि बेड से लटक रही रजाई ने आग पकड़ ली थी, जिसकी वजह से यह हादसा हो गया। क्षेत्र के रंपुरा गांव में सोमवार सुबह गांव के सुरजीत अपनी पत्नी रागिनी के साथ लोहे के तसले में आग जलाकर ताप रहे थे।

बेड से लटक रही रजाई ने पकड़ ली थी आग
सुबह सात बजे के करीब सुरजीत खेतों की तरफ चले गए और रागिनी दो साल की बेटी कृष्णा को लेकर दूध लेने चलीं गईं। कमरे में 11 माह की बेटी निकिता बेड पर सो रही थी। रागिनी ने आग से भरा तसला बेड के नीचे रख दिया था। थोड़ी देर बाद बेड से बाहर लटक रही रजाई तसले तक पहुंच गई और उसने आग पकड़ ली।

हादसे में पूरी तरह से जल गई मासूम
आग से रजाई समेत पूरा बेड जल गया और उसमें सो रही निकिता भी जिंदा जल गई। कुछ देर बाद जब सुरजीत की पत्नी लौटी तो घर के अंदर का मंजर देख चीख पड़ी। उसकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़ कर सुरजीत के घर पहुंचे। लोगों ने आग बुझाई लेकिन तब तक बेड पर लेटी मासूम पूरी तरह जल चुकी थी।

शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
घटना की जानकारी पर सुरजीत भी बदहवास हालत में घर पहुंचे। नायब तहसीलदार रामप्रकाश ने गांव पहुंचकर परिजनों से घटना की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि परिजनों की लापरवाही से यह हादसा हुआ है। सीओ ओमकारनाथ शर्मा ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। घटना की जांच की जा रही है।

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