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हैलट इमरजेंसी में सात घंटे तक गंभीर घायल को दौड़ाया, डीएम कार्यालय से आया फोन तो मचा गया हड़कंप
Mon, 19 Aug 2019 01:32 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 19 Aug 2019 01:32 PM IST
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कानपुर के हैलट अस्पताल ले जाते परिजन
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कानपुर के हैलट अस्पताल की इमरजेंसी में हादसे के दौरान गंभीर रूप से घायल को डाक्टरों ने सात घंटे तक दौड़ाया। परिजन गिड़गिड़ाते रहे और डाक्टर जांचों के नाम पर उन्हें इधर-उधर दौड़ाते रहे। बाद में डीएम कार्यालय से फोन आने पर खलबली मची। प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने एक डाक्टर को इमरजेंसी भेजा तो रोगी भर्ती हुआ।
इसके बाद प्राचार्य और हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या इमरजेंसी पहुंचे और अस्थि रोग और सर्जरी विभाग के रेजीडेंट को कसकर फटकार लगाई और दोबारा ऐसी गलती होने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। अजगैन, उन्नाव में सड़क हादसे में अंकित के दोनों पैर टूट गए और आंतें फट गईं। आंतों से खून का रिसाव होता रहा।
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इसके बाद प्राचार्य और हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या इमरजेंसी पहुंचे और अस्थि रोग और सर्जरी विभाग के रेजीडेंट को कसकर फटकार लगाई और दोबारा ऐसी गलती होने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। अजगैन, उन्नाव में सड़क हादसे में अंकित के दोनों पैर टूट गए और आंतें फट गईं। आंतों से खून का रिसाव होता रहा।
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परिजन रविवार सुबह पांच बजे हैलट इमरजेंसी लेकर आए। जूनियर डाक्टर घायल को भर्ती करने के बजाए सर्जरी और अस्थि रोग विभाग के बीच दौड़ाने लगे। सुबह छह बजकर पांच मिनट पर उसका पर्चा बनाया गया लेकिन भर्ती नहीं किया। डाक्टर उसे अल्ट्रासाउंड के लिए भेजने लगे।
स्थिति देख परिजनों ने डीएम आफिस फोन किया। इस पर ईएमओ डॉ. सुबोध सिंह को अवगत कराया गया। डॉ. सुबोध ने ऑन ड्यूटी ईएमओ डॉ. मयंक और पीआरओ को फोन किया। दोनों जब यूनिट में गए तो जूनियर डाक्टरों ने बात अनसुनी कर दी।
परिजनों का आरोप है कि पेशाब में खून आने लगा और जूनियर डाक्टर मशीन न होने की बात करके घायल को लखनऊ ले जाने की सलाह देते रहे। परिजनों ने फिर डीएम कार्यालय फोन किया, डीएम कार्यालय से दोपहर 12.10 बजे फोन आया। उन्होंने डॉ. फहीम को भेजा तब जाकर रोगी भर्ती हुआ।
स्थिति देख परिजनों ने डीएम आफिस फोन किया। इस पर ईएमओ डॉ. सुबोध सिंह को अवगत कराया गया। डॉ. सुबोध ने ऑन ड्यूटी ईएमओ डॉ. मयंक और पीआरओ को फोन किया। दोनों जब यूनिट में गए तो जूनियर डाक्टरों ने बात अनसुनी कर दी।
परिजनों का आरोप है कि पेशाब में खून आने लगा और जूनियर डाक्टर मशीन न होने की बात करके घायल को लखनऊ ले जाने की सलाह देते रहे। परिजनों ने फिर डीएम कार्यालय फोन किया, डीएम कार्यालय से दोपहर 12.10 बजे फोन आया। उन्होंने डॉ. फहीम को भेजा तब जाकर रोगी भर्ती हुआ।