डायबिटीज रोगियों के लिए खुशखबरी, जानिए क्या है खास
- कानपुर-आगरा में होगी तैनाती, केंद्र ने दिए चार सौ करोड़
- 50 साल की उम्र का हर चौथा रोगी डायबिटीज का शिकार
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जीएसवीएम मेडिकल कालेज कानपुर और एसएन मेडिकल कालेज आगरा में इंडोक्रोनोलोजी विभाग भी खुलेगा। प्रत्येक कालेज दो चिकित्सकों को इंडोक्रोनोलॉजी में परास्नातक की डिग्री डीएम भी देगा।
डायबिटीज, थायरॉयड, हारमोंस रोगों का इलाज करने वाले विशेषज्ञों इंडोक्रोनोलॉजिस्ट की बहुत कमी है। हालत यह है कि कई मेडिकल कालेजों में इंडोक्रोनोलॉजिस्ट का एक पद भी नहीं है। इसके उलट डायबिटीज की मरीजों में दिन दूना-रात चौगुना वृद्धि हो रही है।
एसएन सेन मेडिकल कालेज, आगरा के पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट आफ मेडिसिन के निदेशक प्रोफेसर पीके माहेश्वरी ने मर्चेंट चैंबर हॉल में आयोजित दो दिवसीय केडीएकॉन-2018 के पहले दिन बताया कि डायबिटीज के मरीजों की स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री स्वास्थ्य योजना के फेज चार में इंडोक्रोनोलॉजिस्ट की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि इंडोक्रोनोलॉजिस्ट की नियुक्ति के बाद विशेष ओपीडी चलाई जाएगी। कानपुर-आगरा मेडिकल कालेज के इंडोक्रोनोलोजी विभाग से हर साल चार डॉक्टर डीएम का कोर्स करके निकलेंगे। इससे मरीजों को इलाज कराने में बहुत आसानी हो जाएगी।
ओपीडी में आने वाला 50 साल की उम्र का हर चौथा रोगी डायबिटीज का है। इससे कम उम्र के रोगी प्री डायबिटिक की स्थिति में होते हैं। हर साल तीन प्रतिशत डायबिटीज के रोगी बढ़ जाते हैं। इस मामले को सरकार बहुत गंभीरता से ले रही है।