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Kanpur News: भारत-जापान के शैक्षणिक संस्थानों के बीच शोध को लेकर बनेगी नीति

Wed, 14 Jan 2026 01:26 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jan 2026 01:26 AM IST
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India and Japan to formulate policy for research collaboration between their educational institutions.
कानपुर। भारत-जापान के बीच लंबे समय से चले आ रहे शैक्षणिक संबंधों को अब और ठोस रूप देने की आवश्यकता है। संयुक्त शोध, छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान और संस्थागत साझेदारी से वैश्विक ज्ञान सहयोग को नई गति मिलेगी। यह बातें दोनों देशों के बीच उच्च शिक्षा और शोध सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज़ (एआईयू) के अध्यक्ष एवं छत्रपति शाहू जी महाराज विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने जापान दौरे के दौरान कहीं।
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प्रो. पाठक के नेतृत्व में भारतीय शैक्षणिक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में टोक्यो विश्वविद्यालय (यू-टोक्यो) का दौरा किया। इस दौरान दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक, शोध और मानव संसाधन विकास के लिए नीति बनाने पर गहन मंथन हुआ। प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय विश्वविद्यालयों की ओर से सहयोग के व्यावहारिक प्रस्ताव भी रखे, जिन्हें टोक्यो विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने सकारात्मक रूप से स्वीकार किया।
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इस अवसर पर टोक्यो विश्वविद्यालय की ओर से स्टडी इन जापान फ्रॉम साउथ एशिया परियोजना की विस्तृत जानकारी दी गई। यह परियोजना जापान के शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेक्स्ट) की ओर से प्रायोजित है और इसका संचालन टोक्यो विश्वविद्यालय के इंडिया ऑफिस की ओर से किया जा रहा है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य अगले पांच वर्षों में जापान में अध्ययन करने वाले दक्षिण एशियाई छात्रों की संख्या को दोगुना करना है। आंकड़ों के अनुसार जापान में भारतीय छात्रों की संख्या 2024 में 1,685 थी जो 2028 तक लगभग 3,000 तक पहुंचने का अनुमान है।
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दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल को जापान साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजेंसी के सकुरा साइंस प्रोग्राम और भारत–जापान संयुक्त लोटस प्रोग्राम की जानकारी भी दी गई। इन कार्यक्रमों के तहत छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों को अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक शोध के अवसर प्रदान किए जाते हैं। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया है।
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