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आपातकालः जब जेल में 'अटल' कविताओं ने छेड़ा...गूंजेगा भारत माता की जय का नारा

Tue, 25 Jun 2019 05:24 PM IST
शिखा पांडेय अर्णिमा बाजपेई, कानपुर
अर्णिमा बाजपेई, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 25 Jun 2019 05:24 PM IST
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Incidents during 1975 emergency declared by indira gandhi story
अटल बिहारी वाजपेई (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
आज से 44 साल पहले देश में आपातकल घोषित कर दिया गया था। भारतीय राजनीति के इतिहास का यह काला अध्याय कहा जाता है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह सबसे विवादस्पद काल था।भारत में आज ही के दिन 25 जून 1975 की आधी रात को जब पूरा हिंदुस्तान सो रहा था तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल का समय लागू किया और जनता से उनका अधिकार छीन लिया। आपातकाल का समय 21 मार्च 1977 तक चलता रहा।
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इस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी जैसे विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। अटल जी ने जेल में रहकर आपातकाल के विरोध में कविताएं लिखी। पूरे देश को जेल में तब्दील कर दिया गया था और विरोधी स्वर को दबा दिया गया था। अटल जी ने अपनी हर बात कविताओं की मदद लेकर जनता के सामने रखी।
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अटल जी का दौर

अटल विहारी वाजपेयी देश के पूर्व प्रधानमंत्री, राजनेता, कवि, पत्रकार, और प्रखर वक्ता थे। राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी का प्रवेश 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लेने के साथ हुआ।
आपातकाल के वक्त सभी विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। अटल जी 18 महीने जेल में कैदी बने रहे और अपनी बेहद खूबसूरत कविताओं के जरिए से लोगों के दिल में जगह बनाई। 
कैदी रहे नेता और कवि अटल बिहारी वाजपेयी देश में हो रहे इन भूमिगत आंदोलनों से अवगत होते रहते थे इस पीड़ा से निकली उनकी पहली कविता पढ़िए-

अनुशासन के नाम पर अनुशासन का खून 
भंग कर दिया संघ को कैसा चढ़ा जुनून
कैसा चढ़ा जुनून, मातृ-पूजा प्रतिबंधित
कुटिल कर रहे केशव-कुल की कीर्ति कलंकित
कह कैदी कविराय, तोड़ कानूनी कारा
गूंजेगा भारत माता की जय का नारा

अटल जी की यह कविता सबको प्रेरणा देती थी, नए आंदोलन कारियों को बल देती थी। आपातकाल के एक वर्ष पूरे होने पर भी अटल बिहारी जेल में थे, लोगों को अपने मन में चल रही लड़ाई से अवगत कराने के लिए उन्होंने फिर एक कविता लिखी -

पथ निहारते नयन
गिनते दिन पल छिन 
लौट कभी आएगा 
मन का जो मीत गया 
एक बरस बीत गया

आपातकाल के 18 महीने बाद सभी विपक्षी नेताओं को जेल से छोड़ दिया गया। अटल जी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली करते हुए लोगों से कुछ पंक्तियां कहीं-

बाद मुद्दत के मिले हैं दीवाने
कहने सुनने को बहुत हैं अफ़साने 
खुली हवा में जरा सांस तो ले ले 
कब तक रहेगी आजादी …भला कौन जाने

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का निधन 15 अगस्त2018 में हुआ। उन्होंने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में आखिरी सांस ली। अटल जी का निधन एक युग के अंत के समान था।
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