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पब्लिक का धन आवास विकास में ‘दफन’
अमर उजाला कानपुर
Updated Wed, 31 Dec 2014 02:40 AM IST
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आवास विकास परिषद ने कालोनी का सपना दिखाकर आवेदकों के करोड़ों रुपये ब्लाक कर दिए हैं। कालोनी की लाटरी के इंतजार में चालीस हजार आवेदक चकरघिन्नी बनकर रह गए हैं। तीन महीने में हो जाने वाली लाटरी सात माह बीतने के बाद भी अटकी हुई है। आवेदक जब इस संदर्भ में कुछ पूछते हैं तो कर्मचारियों का टका सा जवाब होता है, इंतजार करो लाटरी पडे़गी तो खुद ही मालूम हो जाएगा।
आवास विकास परिषद ने केशवपुरम और हंसपुरम नौबस्ता में एचआईजी, एमआईजी एलआईजी, ईडब्लूएस की दो सौ से अधिक आवास बनाई हैं। इनके आवंटन के लिए फरवरी से फार्म मिलने शुरू हुए थे। फार्म जमा करने की अंतिम तिथि अप्रैल थी। छह हजार आवेदकों ने फार्म भर धनराशि का दस प्रतिशत पैसा भी जमा किया। गरीब और छोटे तबके के लोगों की गाढ़ी कमाई तो जमा हो गई, पर उन्हें आवास अब तक मयस्सर नहीं हुआ। तीन महीने के अंदर लाटरी डालने की बात कही गई थी। लाटरी में नाम न होने की सूरत पर तत्काल पैसा वापस करने का प्रावधान है। ग्वालटोली की पुष्पा सोनी का कहना है कि बेटे को एक कमरे की छत दिलाने के प्रयास से ईडब्लूएस आवास के लिए साठ हजार रुपये ब्याज पर लिए थे। सोचा था कि तीन महीने की बात है। लाटरी निकल आएगी तो ठीक वरना चार- पांच हजार रुपये ब्याज अदा कर देंगे लेकिन यहां तो ब्याज का पैसा बढ़ता ही जा रहा है। अधिकारी चक्कर पर चक्कर लगवा रहे हैं। बर्रा निवासी आशीष कुमार का कहना है कि दस बार आवास विकास आ चुका हूं। जिससे पूछता हूं कि लाटरी कब तक पड़ेगी, वह चिल्लाते हुए बोलता है पड़ेगी तो खुद ही मालूम पड़ जाएगा।
कोट्स
आवास आवंटन के लिए अक्तूबर में लाटरी प्रक्रिया की जानी थी लेकिन तैयारियां ही नहीं पूरी हो सकी। जनवरी में हर हाल में यह प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। जिन आवेदकों की लाटरी नहीं निकलती है तो तीन महीने के बाद आवेदकों को इसका ब्याज भी दिया जाएगा।
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- आरपी गुप्ता, आवास विकास परिषद
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आवास विकास परिषद ने केशवपुरम और हंसपुरम नौबस्ता में एचआईजी, एमआईजी एलआईजी, ईडब्लूएस की दो सौ से अधिक आवास बनाई हैं। इनके आवंटन के लिए फरवरी से फार्म मिलने शुरू हुए थे। फार्म जमा करने की अंतिम तिथि अप्रैल थी। छह हजार आवेदकों ने फार्म भर धनराशि का दस प्रतिशत पैसा भी जमा किया। गरीब और छोटे तबके के लोगों की गाढ़ी कमाई तो जमा हो गई, पर उन्हें आवास अब तक मयस्सर नहीं हुआ। तीन महीने के अंदर लाटरी डालने की बात कही गई थी। लाटरी में नाम न होने की सूरत पर तत्काल पैसा वापस करने का प्रावधान है। ग्वालटोली की पुष्पा सोनी का कहना है कि बेटे को एक कमरे की छत दिलाने के प्रयास से ईडब्लूएस आवास के लिए साठ हजार रुपये ब्याज पर लिए थे। सोचा था कि तीन महीने की बात है। लाटरी निकल आएगी तो ठीक वरना चार- पांच हजार रुपये ब्याज अदा कर देंगे लेकिन यहां तो ब्याज का पैसा बढ़ता ही जा रहा है। अधिकारी चक्कर पर चक्कर लगवा रहे हैं। बर्रा निवासी आशीष कुमार का कहना है कि दस बार आवास विकास आ चुका हूं। जिससे पूछता हूं कि लाटरी कब तक पड़ेगी, वह चिल्लाते हुए बोलता है पड़ेगी तो खुद ही मालूम पड़ जाएगा।
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आवास आवंटन के लिए अक्तूबर में लाटरी प्रक्रिया की जानी थी लेकिन तैयारियां ही नहीं पूरी हो सकी। जनवरी में हर हाल में यह प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। जिन आवेदकों की लाटरी नहीं निकलती है तो तीन महीने के बाद आवेदकों को इसका ब्याज भी दिया जाएगा।
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- आरपी गुप्ता, आवास विकास परिषद