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Kanpur News: 1991 के में सबसे ज्यादा 48 प्रत्याशियों ने आजमाई थी किस्मत

Sun, 14 Apr 2024 12:40 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Sun, 14 Apr 2024 12:40 AM IST
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In 1991, a maximum of 48 candidates had tried their luck.
इटावा/भरथना। 1991 में इटावा का लोकसभा चुनाव सबसे रोचक रहा था। उस समय जिसकी थोड़ी सी भी स्थिति ठीक थी, उसने चुनाव लड़ने की हरसत पूरी की। यही वजह है कि सबसे ज्यादा 48 लोग मैदान में उतरे थे। इनमें से चार प्रत्याशी ही अपनी जमानत बचा सके थे।
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इटावा लोकसभा चुनाव कई वजहों से चर्चा में रहे। इनमें से ही एक 1991 का चुनाव है। इसमें बसपा संस्थापक कांशीराम ने लोकसभा का चुनाव लड़ा था। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की मदद से उन्होंने जीत भी दर्ज की थी। कांशीराम ने 1,44,291 वोट लेकर भाजपा के लाल सिंह वर्मा को 22,466 वोटों से हराया था। जनता पार्टी के प्रत्याशी राम सिंह शाक्य 82,624 व कांग्रेस प्रत्याशी शंकर तिवारी 74,149 वोट ही पा सके थे। इस चुनाव में ऐसा शोर मचा था कि जिसकी भी थोड़ी स्थिति थी उसने अपनी चुनाव लड़ने की हसरत पूरी की थी। कुल 48 प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई थी। इनमें से 33 प्रत्याशी तीन अंक और 11 प्रत्याशी चार अंक के वोटों तक ही सिमट गए थे। ऐसे में कुल 44 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। वहीं चार प्रत्याशी ही अपनी लाज बचा सके थे।
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वर्षवार प्रत्याशियों की संख्या

1951 में 03, 1957 में 09, 1962 में 05, 1967 में 09, 1971 में 06, 1977 में 06, 1980 में 09, 1984 में 09, 1989 में 11, 1991 में 48, 1996 में 35, 1998 में 14, 1999 में 14, 2004 में 14, 2009 में 13, 2014 में 10, 2019 में 13 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे।



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दो बार हार के बाद मुलायम के पिछड़े-दलित फार्मूले से कांशीराम को मिली थी जीत


1988 में इलाहाबाद तो 1989 में पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से बसपा संस्थापक कांशीराम चुनाव लड़ चुके थे। दोनों ही जगहों पर दलितों के अलावा अन्य बिरादरी का सहयोग न मिलने से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। तीसरी बार उन्होंने मुलायम सिंह यादव से दोस्ती के बाद उनके कहने पर इटावा लोकसभा से चुनाव लड़ा था और मुलायम के पिछड़े-दलित फार्मूले से जीत भी हासिल की थी।
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