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कानपुर: जिन्हें वैक्सीन नहीं लगी, उन्हें कोरोना ने खोखला कर दिया, ठीक होने के महीनों के बाद पता चल रहीं जटिलताएं
Thu, 17 Mar 2022 04:43 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 17 Mar 2022 04:43 PM IST
सार
कोरोना की तीसरी लहर में जीएसवीएम मेडिकल कालेज के एक दर्जन डाक्टरों समेत पैरा मेडिकल स्टाफ भी संक्रमित हुआ। इन सभी को वैक्सीन की दोनों डोज लगी थीं। इनमें जटिलताएं नहीं आई हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जिन लोगों को कोरोना की वैक्सीन नहीं लगी और संक्रमण की चपेट में आ गए, वे ठीक होने के बाद भी नई बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। हैलट और उर्सला में जो पोस्ट कोविड रोगी आए हैं, उनमें अब गुर्दे, लिवर और पैंक्रियाज की दिक्कतें हो रही हैं।
कोरोना वायरस का जहर लोगों की आंतों में भी उतर गया है। लोग इरिटेबिल बॉवेल सिंड्रोम (आंतों की खराबी से एक तरह का अवसाद होना) जैसे रोग की चपेट में हैं। इसके साथ ही न्यूरो, डिप्रेशन और एंजाइटी भी हो रही है। रोगियों की हिस्ट्री से पता चला है कि इन्हें वैक्सीन नहीं लगी थी।
वहीं जो वैक्सीन लगवाने के बाद संक्रमित हुए हैं, उनमें ऐसी जटिलताएं नहीं मिल रही हैं। बिरहाना रोड के राकेश कुमार (56) ने बताया कि दूसरी लहर की शुरुआत में वे संक्रमित हुए। इलाज हैलट में चला था। एक्सरे रिपोर्ट में फेफड़ों में बदलाव आया था।
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दवा से स्थिति बेहतर हुई लेकिन अब हाइपरटेंशन हो गया है। इसके साथ ही सीरम क्रेटेनिन बढ़ गया है। हैलट में ओपीडी में आजाद नगर के विमलेश विश्वकर्मा ने बताया कि उनका पेट हमेशा खराब रह रहा है। कभी अचानक दस्त आने लगते हैं और कभी कब्ज हो जाता है।
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कोरोना वायरस का जहर लोगों की आंतों में भी उतर गया है। लोग इरिटेबिल बॉवेल सिंड्रोम (आंतों की खराबी से एक तरह का अवसाद होना) जैसे रोग की चपेट में हैं। इसके साथ ही न्यूरो, डिप्रेशन और एंजाइटी भी हो रही है। रोगियों की हिस्ट्री से पता चला है कि इन्हें वैक्सीन नहीं लगी थी।
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वहीं जो वैक्सीन लगवाने के बाद संक्रमित हुए हैं, उनमें ऐसी जटिलताएं नहीं मिल रही हैं। बिरहाना रोड के राकेश कुमार (56) ने बताया कि दूसरी लहर की शुरुआत में वे संक्रमित हुए। इलाज हैलट में चला था। एक्सरे रिपोर्ट में फेफड़ों में बदलाव आया था।
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दवा से स्थिति बेहतर हुई लेकिन अब हाइपरटेंशन हो गया है। इसके साथ ही सीरम क्रेटेनिन बढ़ गया है। हैलट में ओपीडी में आजाद नगर के विमलेश विश्वकर्मा ने बताया कि उनका पेट हमेशा खराब रह रहा है। कभी अचानक दस्त आने लगते हैं और कभी कब्ज हो जाता है।
डॉक्टरों ने इरिटेबिल बॉवेल सिंड्रोम डायग्नोस किया है। कुछ रोगी मस्तिष्क में सनसनाहट, चक्कर और कान में आवाज आने की शिकायत कर रहे हैं। ये सारी दिक्कतें कोरोना के दूसरी लहर के रोगियों की हैं। इनमें किसी को वैक्सीन नहीं लगी।
कोरोना की तीसरी लहर में जीएसवीएम मेडिकल कालेज के एक दर्जन डाक्टरों समेत पैरा मेडिकल स्टाफ भी संक्रमित हुआ। इन सभी को वैक्सीन की दोनों डोज लगी थीं। इनमें जटिलताएं नहीं आई हैं। सीएमओ डॉ. नैपाल सिंह का कहना है कि वैक्सीन लगने के बाद संक्रमण हो रहा है लेकिन बीमारी घातक नहीं हो रही है। इसके साथ ही पोस्ट कोविड जटिलताएं भी नहीं उभर रहीं। ज्यादातर रोगियों को वेंटिलेटर पर जाने की नौबत नहीं आई है। इसी से सभी लाभार्थियों से वैक्सीनेशन कवरेज के लिए कहा जा रहा है।
कोरोना की तीसरी लहर में जीएसवीएम मेडिकल कालेज के एक दर्जन डाक्टरों समेत पैरा मेडिकल स्टाफ भी संक्रमित हुआ। इन सभी को वैक्सीन की दोनों डोज लगी थीं। इनमें जटिलताएं नहीं आई हैं। सीएमओ डॉ. नैपाल सिंह का कहना है कि वैक्सीन लगने के बाद संक्रमण हो रहा है लेकिन बीमारी घातक नहीं हो रही है। इसके साथ ही पोस्ट कोविड जटिलताएं भी नहीं उभर रहीं। ज्यादातर रोगियों को वेंटिलेटर पर जाने की नौबत नहीं आई है। इसी से सभी लाभार्थियों से वैक्सीनेशन कवरेज के लिए कहा जा रहा है।