फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Important news for those who talk for hours on mobile

मोबाइल पर घंटों लगातार बात की लत से बढ़ रहा नर्व ट्यूमर, कान से लेकर दिमाग हो रहा प्रभावित

Wed, 15 May 2019 05:12 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 15 May 2019 05:12 PM IST
विज्ञापन
Important news for those who talk for hours on mobile
प्रतीकात्मक फोटो
मोबाइल पर घंटों लगातार बात करने की लत से दिमाग की नर्व को होने वाले नुकसान का अभी तक अंदाजा लगाया जा रहा था, पर वह रोग बन कर सामने भी आने लगा है। मोबाइल की तरंगों के कारण दिमाग की नर्व (स्नायु तंत्रिका) में गांठें बनने लगी हैं। डॉक्टर इसे नर्म प्रकृति का ट्यूमर बता रहे हैं।
विज्ञापन


कानपुर के हैलट अस्पताल में ऐसे चार रोगियों का इलाज शुरू हो गया है। कुछ रोगी दिल्ली और लखनऊ के विशेषज्ञों से इलाज करा रहे हैं। पांच छह सालों के अंतराल में इक्का-दुक्का रोगी ऐसी दिक्कत लेकर आते रहे, लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ रही है।
विज्ञापन


हैलट के आईसीयू प्रभारी सीनियर न्यूरो रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेम सिंह का कहना है कि मोबाइल के लती रोगियों में अभी दो तरह की गांठें मिली हैं। एक मेनिनजीओमा है। यह गांठ (ट्यूमर) दिमाग की झिल्ली में बनती है। दूसरी गांठ स्वानोमा है। यह दिमाग की नर्व में बनती है। एक सप्ताह में चार रोगी भर्ती किए गए हैं। रोगियों की संख्या बढ़ना परेशान करने वाला संकेत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

हैलट में अभी जिन चार रोगियों का इलाज चल रहा है, वे महिलाएं हैं। वार्ड नंबर 16 में भर्ती बेबी (45) के नर्व में गांठ बनी है। उसे शुरुआत में सिर में तेज दर्द, चक्कर, बेहोशी सरीखे लक्षण उभरे थे। इस पर जांच कराई गई। इन्हीं लक्षणों के साथ निशा बेगम (40) को भर्ती किया गया।

औरैया की किरन (40) और रश्मि (18) को भी यह दिक्कत हुई है। इनकी डायग्नोसिस रिपोर्ट तैयार करने पर पता चला कि इन्हेेें घंटों लगातार मोबाइल चलाने-बात करने की लत है। इसके अलावा हैलट में 16 रोगी पंजीकृत हुए हैं जिनके कान में तकलीफ बढ़ी है। नर्व में सूजन आ गई जिसका असर अंदर दिमाग तक है।

हाल में जो शोध पूरे हुए हैं उनमें मोबाइल के रेडिएशन से यह दिक्कत मिली है। अब इस तरह की मस्तिष्क की गांठों के रोगी बढ़ने लगे हैं। मोबाइल से होने वाले रेडिएशन का यह असर है। - डॉ. प्रेम सिंह, न्यूरो रोग फिजिशियन

कान का दर्द आम पेन किलर से ठीक नहीं होता
मोबाइल पर लगातार बात करने वालों के कान का दर्द आम पेन किलर से ठीक नहीं हो रहा है। कान में तेज आवाज बर्दाश्त करने की क्षमता भी घट रही है। ईएनटी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे रोगियों के लिए विशेष प्रकार की पेन किलर दवाओं का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

बचाव
- मोबाइल पर लगातार बात न करें।
- अगर लंबी बात हो तो बीच में गैप कर लें।
- बात करते समय साइड बदलते रहें।
- मोबाइल लाउड स्पीकर पर लगाकर सुन सकते हैं।
- बैटरी लो होने पर रेडिएशन अधिक होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed