IMACGP Refresher Course: गोरा होने की क्रीम लगाने की आदत से गुर्दों की शामत, त्वचा सोखती है मरकरी…ये है सलाह
Kanpur News: डॉ. नारायण प्रसाद ने बताया कि 535 गुर्दा फेल के रोगियों का आंकड़ा जुटाया गया। इनकी हिस्ट्री ली गई तो पता चला कि 47 फीसदी रोगियों ने डायबिटीज, ब्लड प्रेशर आदि दवाएं अपने मन से खरीद कर खाई थीं।
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गोरा दिखने के चक्कर में क्रीम थोपे रहने की आदत से गुर्दों की शामत आ रही है। त्वचा को गोरा दिखाने के लिए क्रीम में मरकरी रसायन मिलाया जाता है। त्वचा इसे सोखती है। इसके दुष्प्रभाव से गुर्दों में मेम्ब्रेनस नेफ्रोपैथी हो जाती है। गुर्दे की छन्नियों को नुकसान होता है और पेशाब से प्रोटीन आने लगता है। डॉक्टर भी गुर्दे खराब होने का कारण जल्दी नहीं समझते और खराबी बढ़ती रहती है।
यह बातें एसजीपीजीआई के गुर्दा रोग विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. नारायण प्रसाद ने आईएमए रिफ्रेशर कोर्स के पहले दिन बताई। गुर्दा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रसाद ने आईएमए सभागार में आयोजित रिफ्रेशर कोर्स में डायबिटीज के रोगियों के गुर्दे खराब होने के गैर डायबिटीज वाले कारणों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि गोरा होने वाली क्रीम बहुत अधिक लगाने वाले गुर्दा रोगी विभाग में आ रहे हैं।
कारण पता करने में करनी पड़ती है मशक्कत
इनकी संख्या बढ़ रही है। गुर्दा रोगियों से अब यह भी पूछना पड़ता है कि वे कौन सी क्रीम लगाते हैं। इस तरह के रोगियों में पुरुष और महिलाएं दोनों होती हैं। बहुत से रोगियों की डायग्नोसिस से पता चला कि ज्यादातर क्रीम खुद सोशल मीडिया पर देखकर मंगा लेते हैं और इसका इस्तेमाल करते हैं। आम डॉक्टर को गुर्दे खराब होने के कारण पता करने में मशक्कत करनी पड़ती है।
बायोप्सी कराने पर पता चलती है समस्या
त्वचा सफेद करने वाली क्रीम में मरकरी मुख्य अवयव होता है। 20-25 दिन तक क्रीम लगाने पर इसका असर गुर्दों पर आने लगता है। मेम्ब्रेनस नेफ्रोपैथी का क्रीम बड़ा कारण बन रही है। व्यक्ति जितनी अधिक क्रीम थोपेगा, दिक्कत उतनी जल्दी होने लगता है। अगर शुरुआत में रोगी आ जाए, तो उसके गुर्दे की खराबी ठीक हो जाती है। देर से आने पर फिर खराब ठीक नहीं होती, इसे नियंत्रित भर किया जा सकता है। रोगी की बायोप्सी कराने पर समस्या पता चलती है। रोगी की जांच में नेल एंटीजन से इसे पता किया जाता है।
सोशल मीडिया को देख दवाएं खाने से गुर्दे में आ रही खराबी
डॉ. नारायण प्रसाद ने बताया कि 535 गुर्दा फेल के रोगियों का आंकड़ा जुटाया गया। इनकी हिस्ट्री ली गई तो पता चला कि 47 फीसदी रोगियों ने डायबिटीज, ब्लड प्रेशर आदि दवाएं अपने मन से खरीद कर खाई थीं। इनमें आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और दूसरे वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति की दवाएं थीं। ऑनलाइन बिक रहीं इन दवाओं को चेक किया गया तो पता नहीं चला कि दवाएं किन चीजों को मिलाकर बनाई गईं? यह पता नहीं चल पाता कि किस केमिकल की एलर्जी से गुर्दे खराब हुए।
ये है सलाह
- 40 साल की उम्र के पहले ब्लड प्रेशर तो गुर्दे की जांच कराते रहें।
- जहां प्रदूषण बढ़ रहा, वहां गुर्दों में अधिक खराब आ रही है।
- हृदय से पंप होने वाला 20 फीसदी खून गुर्दे से होकर जाता है।
- खूब पसीना बहाने और कम पानी पीने से गुर्दे में आती सूजन।
- कीटनाशक से भी आ रही गुर्दे में खराबी।