कानपुर: सरसौल में सजे मिट्टी के करवा-दीये, त्योहारों पर शिल्पकारों को आस, बोले- हमारे परिवारों का ध्यान रखें
Kanpur News: सरसौल क्षेत्र में करवाचौथ और दिवाली के त्योहारों को लेकर बाजारों में रौनक आ गई है( मिट्टी के करवा व दीपकों की बिक्री शुरू हो चुकी है। सालभर इन त्योहारों का इंतजार करने वाले स्थानीय शिल्पकार दो महीने पहले से ही बर्तन और दीये बनाने की तैयारी में जुट जाते हैं।
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कानपुर के सरसौल कस्बे में करवाचौथ से लेकर दिवाली तक बाजारों में रौनक लौट आई है और मिट्टी के करवा व दीपकों की बिक्री शुरू हो गई है। हिंदू धर्म में दिवाली सबसे बड़ा पर्व है, उससे ठीक दस दिन पहले करवाचौथ मनाया जाता है। कभी पूजा में पीतल के करवा की जगह मिट्टी के करवा और जगमग झालरों की जगह मिट्टी के दीये ही घर-आंगन को रोशन करते थे।
दिवाली के त्यौहार का गांव के शिल्पकारों को सालभर इंतजार रहता है। वे करीब दो महीने पहले से ही मिट्टी के करवा और फिर दिवाली के लिए दीपक बनाने का काम शुरू कर देते हैं। करवा बनाने में पहले मिट्टी को पकाया जाता है, फिर आकार दिया जाता है और पकाने के बाद रंग भरने का काम होता है, तब कहीं जाकर बाजार में बिक्री योग्य करवा तैयार हो पाता है। यही हाल दिवाली में इस्तेमाल होने वाले दीपकों का भी है।
परिवारों में रोजी-रोटी का संकट गहरा गया
पुरवामीर गांव में हाईवे किनारे अपने घर पर मिट्टी के बर्तन बनाने वाले धुन्नी कुम्हार ने बताया कि यह काम उनकी कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। मिट्टी के बर्तन बनाकर ही वे पूरे परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सरकार द्वारा कुम्हारों के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में बर्तन बनाने के लिए अब मिट्टी तक नहीं मिल पाती। महंगाई बढ़ने से लोग अब मिट्टी के बर्तन और दीपक कम इस्तेमाल करते हैं, जिससे परिवारों में रोजी-रोटी का संकट गहरा गया है।
मिट्टी से बने दीपक का ही इस्तेमाल करें
भावुक होकर अपील करते हुए धुन्नी कुम्हार ने कहा कि आप सभी खुशी से दिवाली का पर्व मनाएं, लेकिन इस दिवाली हमको और हमारे परिवार को भी ध्यान में रखें। मिट्टी से बने दीपक का इस्तेमाल करें, इससे शुद्ध और कुछ नहीं हो सकता। दिवाली भी शुद्ध रूप से मनेगी और हमारे परिवारों का भरण-पोषण भी हो पाएगा। बाजारों में मिट्टी के बर्तन और दीपकों की बिक्री शुरू हो चुकी है। इन कुम्हारों की अपील पर समाजसेवकों ने भी लोगों से अपील की है कि मिट्टी से लाखों परिवार चल रहे हैं, इसमें हम सहयोगी बनें।