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Kanpur News: आईआईटी का सेंसर बताएगा शरीर पर दवाओं का असर

Fri, 12 Sep 2025 02:04 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 12 Sep 2025 02:04 AM IST
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IIT's sensor will tell the effect of medicines on the body
कानपुर। शरीर की कोशिकाओं पर दवाओं के होने वाले असर को समझने के लिए आईआईटी कानपुर के बायोसाइंस एंड बायो इंजीनियरिंग के वैज्ञानिकों ने खास सेंसर बनाया है। इसकी मदद से वैज्ञानिक जी प्रोटीन-कपल्ड रिसेप्टर्स की गतिविधियों को जीवित कोशिकाओं के अंदर देख सकते हैं। इस सेंसर का प्रयोगशाला में ट्रायल हो चुका है। जल्द ही चूहों पर ट्रायल के बाद इसका क्लीनिकल ट्रायल होगा। यह खोज चेक गणराज्य के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर हुई है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से हुए इस शोध को अमेरिका की पत्रिका पीएनएएस में प्रकाशित किया गया है।
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जी प्रोटीन-कपल्ड रिसेप्टर्स हमारे शरीर के ऐसे रिसेप्टर्स हैं जो बाहर से आने वाले संकेतों जैसे हार्मोन, रोशनी या छोटे अणुओं को पकड़कर कोशिकाओं के भीतर संदेश पहुंचाते हैं। यह रिसेप्टर्स बहुत अहम हैं क्योंकि इस्तेमाल होने वाली लगभग एक-तिहाई दवाएं इन्हीं को लक्ष्य बनाती हैं। अब तक समस्या यह थी कि कोशिकाओं के अंदर इन रिसेप्टर्स को काम करते हुए सीधे देखना बेहद मुश्किल था।
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आईआईटी कानपुर की टीम ने इस मुश्किल का हल ढूंढ लिया है। उन्होंने नैनोबॉडी सेंसर बनाया है, जो केवल तब रिसेप्टर से जुड़ता है जब वह दवा से सक्रिय होता। रिसेप्टर सक्रिय होते ही यह सेंसर हल्की सी रोशनी जैसा संकेत देता है। इसके आधार पर वैज्ञानिक आसानी से जान सकते हैं कि दवा ने रिसेप्टर पर कितना असर डाला। इसकी खोज करने वाले बीएसबीई के प्रोफेसर अरुण शुक्ला कहते हैं कि इस सेंसर में रिसेप्टर्स को बदलने की जरूरत नहीं होती। यह वैसे ही उनकी गतिविधियों को दिखा देता है। इससे हमें बीमारियों में रिसेप्टर्स की भूमिका समझने और नई दवाएं बनाने में मदद मिलेगी। इस शोध में पीएचडी छात्रा अन्नु दलाल और टीम के अन्य सदस्य भी शामिल रहे।
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कैंसर, हार्ट संबंधित बीमारी पर अधिक लाभ
प्रो. अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि मुख्य रूप से कैंसर, आर्थराइटिस व हार्ट संबंधित कोशिकाओं के रिसेप्टर्स पर यह ट्रायल हुआ है। इसमें अच्छा रिस्पांस मिला है। यह सेंसर अधिकांश रिसेप्टर्स पर काम करेगा। इससे लगभग सभी बीमारियों से संबंधित दवाओं के असर को समझा जा सकेगा।
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