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IIT Suicide Case: ए लोरी, उठ जा बेटा सुबह हो गई है...देखो पापा आ गए, बेटी का शव देख फफक पड़े माता-पिता

Sat, 20 Jan 2024 05:35 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 20 Jan 2024 05:35 AM IST
सार

Kanpur News: आईआईटी छात्रा का शव देखकर माता-पिता और बहन फफक पड़े। एक घंटे तक परिजनों की हृदय विदारक चीत्कार सुन हर आंख रोने लगी। छोटी बहन बोली कि दीदी को सर्दी न लग जाए इसलिए दोनों हाथों से कान बंद कर देती हूं।

IIT Suicide Case, Seeing the dead body of the student the parents and sister were shocked
IIT Kanpur Suicide - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ए लोरी, उठ जा बेटा... सुबह हो गई है। देखो पापा आ गए। अरे सुन लिपि... दीदी अभी सो रही है, ज्यादा परेशान न कर। पिता नरेंद्र जायसवाल की इन बातों को सुन आईआईटी की छात्रा प्रियंका के शव के पास बैठी छोटी बहन लिपि बोली, दीदी को सर्दी न लग जाए पापा।


इसलिए दोनों हाथों से कान बंद कर देती हूं... और आंसू से भरी आंखों के साथ लिपि ने प्रियंका के कानों को हाथों से बंद कर लिया। मोर्चरी के बाहर यह हृदय विदारक दृश्य देख हर आंख रोई। आईआईटी में झारखंड से पीएचडी की पढ़ाई करने आई प्रियंका जायसवाल ने गुरुवार को खुदकुशी कर ली थी।

रोने से सभी की आंखों में सूजन आ गई
सूचना मिली तो पूरी रात सफर कर माइनिंग इंजीनियर पिता नरेंद्र, मां ज्योत्सना और एमबीबीएस के अंतिम वर्ष की छात्रा छोटी बहन लिपि मोर्चरी पहुंची। रात भर रोने से सभी की आंखों में सूजन आ गई थी। प्रियंका का शव मोर्चरी के बाहर टीन शेड के नीचे रखा गया, तो परिजन फफक कर रो पड़े।

रो-रोकर मां का गला रुंध गया
करीब एक घंटे तक परिजनों की हृदय विदारक चीत्कार से मोर्चरी गूंजती रही। परिजनों के जेहन में प्रियंका की 29 साल की जितनी यादें थीं, सब एक-एक कर करुण क्रंदन के साथ बाहर आती गईं। रो-रोकर मां का गला रुंध गया था। शव देख पिता ने सिर पकड़ लिया।

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कभी मफलर से चश्मा पोंछते, तो कभी आंखों के आंसू पोंछ
कुछ मिनट बाद बोले, मेरा बेटा सो रहा है। साइक्लिंग का समय होने पर उसे उठा दीजिएगा...फिर कुछ देर बाद उन्हें प्रियंका के जाने का अहसास हुआ, तो फफक पड़े। कमजोर पड़ती प्रियंका की मां और छोटी बेटी को देख वह कभी मफलर से चश्मा पोंछते तो कभी आंखों के आंसू पोंछ दोनों को समझाने का प्रयास करते दिखे।

अब तुम्हारे बिना हमारा क्या होगा?
पिता ने प्रियंका का चेहरा देखकर उसे उठाने की कोशिश की और बोले, लोरी ऐसी कौन सी बात थी, जो तुमने हम लोगों से छिपाकर रखी। तुम तो यहां पढ़ने के लिए आई थी। अब तुम्हारे बिना हमारा क्या होगा? कभी परिजन प्रियंका के झारखंड से हाईस्कूल करने की बात का जिक्र करते तो कभी दिल्ली के डीपीएस इंटर करने की बातें बताते रहे।

मां बोलीं-तू तो मेरी बहादुर बेटी थी
मां ज्योत्सना एक घंटे तक बेटी के शव के पास बैठी रहीं। कभी प्रियंका का चेहरा साफ करतीं तो कभी उसके गले पर पड़े निशान को देखतीं और फफककर रो पड़तीं। बेटी के कंधे पर हाथ रख मां बोलीं, लोरी... ये तुमने क्या किया? बेटी तूने ये कदम क्यों उठाया? तू तो मेरी बहादुर बेटी थी। छोटी बहन लिपि पूरे शरीर का वीडियो बनाती रही। वह कभी मां को चुप कराती तो कभी खुद प्रियंका के शव को संवारने लगती थी।

पढ़ाई में होशियार थी लोरी
पिता नरेंद्र ने बताया कि प्रियंका के घर का नाम लोरी है। लोरी बचपन से ही पढ़ने में होशियार थी। उसने धनबाद काॅर्मल स्कूल से हाईस्कूल किया। फिर दिल्ली आरके पुरम स्कूल से इंटरमीडिएट की परीक्षा अच्छे नंबरों से पास की। इसके बाद कोटा गई। फिर आईआईटी रोपड़ से एमटेक किया था। 28 दिसंबर को वह प्रियंका को लेकर आईआईटी कानपुर पहुंचे थे। 29 को एडमिशन कराने के बाद वापस धनबाद चले गए थे। आईआईटी में एडमिशन होने पर वह काफी खुश थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या की पुष्टि, भैरव घाट पर अंतिम संस्कार
कल्याणपुर पुलिस ने शुक्रवार को माता पिता की मौजूदगी में प्रियंका के शव का पोस्टमार्टम कराया। कांशीराम के डॉक्टर अतुल सचान ने वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फंदे से लटकने के चलते मौत की पुष्टि हुई है। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव को परिजनों के हवाले कर दिया। शव लेकर परिजन भैरव घाट पहुंचे और पिता नरेंद्र ने बेटी को मुखाग्नि दी। पिता ने बताया कि शनिवार को बेटी की अस्थियां लेकर झारखंड के लिए रवाना होंगे। रात में कानपुर में ही रुकेंगे।

अपनी सेहत को लेकर बहुत सजग थी प्रियंका
पिता ने बताया कि प्रियंका अपनी हेल्थ को लेकर बहुत सजग थी। 28 दिसंबर को एडमिशन होने के बाद 29 दिसंबर को उसने पिता को फोन करके कहा था कि पापा मुझे साइकिल खरीदनी है ताकि सेहत सही कर सकूं। इसके बाद उसने साइकिल भी खरीदी थी। पिता ने बताया कि प्रियंका को डायबिटीज और बीपी की समस्या था। वह लगातार इन बीमारियों की दवा भी ले रही थी। साइकिल लेने के दौरान उसने कहा था कि साइकिल चलाने से वजन कम होगा तो शुगर भी कम होगी।

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