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विवादित पोस्ट पर आईआईटीयन ने मांगी माफी, फेसबुक पर लिखा, किसी की भावना भड़काने का नहीं था इरादा
Sun, 11 Aug 2019 12:32 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 11 Aug 2019 12:32 PM IST
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आईआईटी कानपुर
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद फेसबुक पर विवादित पोस्ट डालने के मामले में आईआईटी कानपुर के आरोपी छात्र ने माफी मांग ली है। छात्र ने पूर्व में दिए गए बयान पर सफाई पेश करते हुए फेसबुक पर लिखा कि उसका इरादा किसी की भावना भड़काने का नहीं था। छात्र ने आगे कहा है कि उसके पुराने पोस्ट को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। ऐसे में अगर उन बातों से किसी को दुख पहुंचा है तो वह इसके लिए माफी मांगना चाहता है।
आरोपी छात्र ने पोस्ट के जरिये बताया कि 1947 से पहले उसका परिवार कश्मीर में रहता था। उस दौरान हुई हिंसा में कश्मीरियों ने उसके परिवार की काफी मदद की थी। इसलिए अब जब वे लोग मुसीबत में हैं तो यह मेरी ड्यूटी बनती है कि मैं उनकी आवाज बन सकूं। छात्र ने मीडिया को भी आड़े हाथ लिया। कहा कि केवल उसके एक पोस्ट की गलत व्याख्या करके उसे खालिस्तानी बताया गया। छात्र ने आगे लिखा कि उसके पूर्वजों ने देश के लिए काफी शहादत दी है। आखिर में लिखा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। इस मामले में वह कश्मीरियों के साथ है।
निदेशक, सुपरवाइजर ने किया था तलब
विवादित पोस्ट के मामले में छात्र को पीएचडी सुपरवाइजर और निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने तलब किया था। बताया जाता है कि दोनों ने छात्र से अपने पुराने बयान पर सफाई पेश करने के लिए कहा और माफी मांगने के लिए कहा।
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आरोपी छात्र ने पोस्ट के जरिये बताया कि 1947 से पहले उसका परिवार कश्मीर में रहता था। उस दौरान हुई हिंसा में कश्मीरियों ने उसके परिवार की काफी मदद की थी। इसलिए अब जब वे लोग मुसीबत में हैं तो यह मेरी ड्यूटी बनती है कि मैं उनकी आवाज बन सकूं। छात्र ने मीडिया को भी आड़े हाथ लिया। कहा कि केवल उसके एक पोस्ट की गलत व्याख्या करके उसे खालिस्तानी बताया गया। छात्र ने आगे लिखा कि उसके पूर्वजों ने देश के लिए काफी शहादत दी है। आखिर में लिखा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। इस मामले में वह कश्मीरियों के साथ है।
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निदेशक, सुपरवाइजर ने किया था तलब
विवादित पोस्ट के मामले में छात्र को पीएचडी सुपरवाइजर और निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने तलब किया था। बताया जाता है कि दोनों ने छात्र से अपने पुराने बयान पर सफाई पेश करने के लिए कहा और माफी मांगने के लिए कहा।
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