UP: IIT कानपुर के शोधार्थी ने बनाई सस्ती EEG डिवाइस, दिमाग की बीमारियों की जांच होगी आसान
Kanpur News: माइग्रेन, मिर्गी, स्ट्रोक, नींद की समस्या और ब्रेन फॉग जैसी दिमाग से जुड़ी बीमारियों की जांच अब कम लागत वाली स्वदेशी तकनीक से आसान हो सकती है।आईआईटी कानपुर के शोधार्थी हर्ष अरोड़ा ने पोर्टेबल EEG डिवाइस तैयार की है।
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यह संभव हो सकेगा आईआईटी कानपुर के शोधार्थी हर्ष अरोड़ा द्वारा तैयार की गई स्वदेशी पोर्टेबल ईईजी डिवाइस से। यह डिवाइस न केवल आसानी से कहीं भी ले जाई जा सकती है, बल्कि विदेशी उपकरणों की तुलना में बेहद सस्ती भी है। जल्द ही इसका क्लिनिकल परीक्षण शुरू होने जा रहा है।
बायोलॉजिकल साइंसेज विभाग के मार्गदर्शन में बना उपकरण
उत्तराखंड के काशीपुर निवासी हर्ष अरोड़ा आईआईटी कानपुर के बायोलॉजिकल साइंसेज एवं बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अर्जुन रामकृष्णन के निर्देशन में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी कर रहे हैं। हर्ष ने इस ईईजी (इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम) डिवाइस के निर्माण और व्यावसायीकरण के लिए ‘मेंटेव’ नाम से एक स्टार्टअप भी शुरू किया है। सिर पर पहने जाने वाली यह डिवाइस दिमाग से निकलने वाली इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को रिकॉर्ड कर डेटा में बदल देती है, जिससे डॉक्टरों को न्यूरो संबंधी बीमारियों की सटीक जानकारी रियल टाइम में मिल जाती है।
25 लाख की विदेशी मशीन से बेहद सस्ती
हर्ष अरोड़ा के अनुसार, वर्तमान में अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले ईईजी उपकरण विदेशों से आयात किए जाते हैं, जिनकी कीमत 20 से 25 लाख तक होती है और खराब होने पर इनकी मरम्मत में काफी समय लगता है।
उनकी यह नई स्वदेशी ईईजी डिवाइस बेहद कम लागत में तैयार की गई है। पोर्टेबल और पहनने योग्य होने के कारण इसे लैब के बाहर भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य महंगे उपकरणों पर निर्भरता खत्म कर न्यूरो जांच को गांव-देहात के आम मरीजों तक पहुंचाना है।
डायनेमिक बिहेवियरल टास्क पर भी काम
ईईजी डिवाइस के साथ-साथ हर्ष 'डायनेमिक बिहेवियरल टास्क' तकनीक पर भी कार्य कर रहे हैं। यह एक विशेष व्यावहारिक टास्क है, जिससे यह समझा जा सकता है कि इंसान वास्तविक जीवन में बदलते हालातों और जोखिमों के बीच फैसले कैसे लेता है। यह तकनीक न्यूरोसाइंस रिसर्च के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है।