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आईआईटी को गुरुदक्षिणा में मिलेंगे दो करोड़

Sun, 09 Feb 2020 01:24 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 09 Feb 2020 01:24 AM IST
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कानपुर । भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के सन् 1980 बैच के पूर्व छात्र-छात्राएं शनिवार को एलुमनाई मीट में जुटे। सभी ने संस्थान के विकास के लिए गुरुदक्षिणा स्वरूप दो करोड़ रुपये देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम संयोजक मोहन तांबे ने बताया कि देश में रहने वाले पूर्व छात्र दो लाख और यूएस में रहने वाले पूर्व छात्र पांच हजार डालर देंगे। कहा कि इस संबंध में निदेशक और डीन से बात की गई है।
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शनिवार को आईआईटी के आउटरीच मैदान पर जुटे करीब 45 पूर्व छात्र-छात्राएं परिवार के साथ कैंपस पहुंचे। सभी की उम्र ज्यादा होने के बावजूद जोश में कोई कमी नहीं देखने को मिली। बरसों बाद पुराने यारों का चेहरा देखकर सभी खुशी से खिल उठे। सभी ने कैंपस घूमा और पुरानी क्लासरूमों में जाकर देखा। बरसों बाद एक दूसरे के चेहरे देखकर सभी भावविभोर हो गए। वहीं, भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को) की ओर से दिव्यांग छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों और उनके पारिवारिक सदस्यों को व्हीलचेयर और स्टिक आदि वितरित की गई।
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छात्रों पर पढ़ाई का दबाव
पूर्व छात्र मोहन तांबे ने पत्रकारों को बताया कि छात्रों के ऊपर पढ़ाई का दबाव ज्यादा देखने क ो मिलता है। कुछ वर्षों पहले एक लैब में गए थे। वहां एक छात्र रोबोट बना रहा था। उस रोबोट की गुणवत्ता बहुत निम्न स्तर की थी। वह रोबोट किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर तो दूर क्षेत्रीय स्तर पर भी अपना परचम लहराने के लायक नहीं था। सन् 1980 में बीटेक और 1982 मेें एमटेक करने के बाद कंप्यूटर में हिंदी भाषा के की बोर्ड का निर्माण करने केबाद कई जगह नौकरी की। आज एक कंपनी चला रहा हूं। उन्होंने एक वाई-फाई सर्वर बनाया है जिसका नाम उन्होने हमसफर डिजिटल लाइब्रेरी रखा है । यह एक हाटस्पाट की तरह काम करेगी। इसमें एक बैटरी लगी है, जो एकबार चार्ज करने पर 15 घंटे तक चलती है । एकबार डाटा के कनेक्ट होने पर यह अपडेट हो जाती है। इससे 100 डिवाइसेज एक बार में जुड़कर हमसफर में मौजूदा डाटा को अपने ब्राउजर पर देख सकती हैं। इसमें एजुकेशनल, ग्रामीण, कृषि, तकनीकी क ई प्रकार की जानकारियां दी गई हैं।
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वित्तीय धोखाधड़ी पकड़ने को बनाया सॉफ्टवेयर
विष्णुपुरी में रहने वाले अनंत पी मुखर्जी बताते हैं कि वह इस वक्त अमेरिका में अवियाना ग्लोबल टेक्नोलॉजी नाम से एक साफ्टवेयर कंपनी चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी ने नैमेसेस नाम का साफ्टवेयर विकसित किया है। यह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग पद्धति से काम करके स्टाक मार्केट, बीमा क्षेत्र आदि के वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामले पकड़ सकता है।
रोड किनारे कूड़ा देख तकलीफ हुई
एलुमनाई ने बताया कि शहर केहालात देखकर उनको बहुत तकलीफ हुई । एयरपोर्ट से आते वक्त रोड के दोनों ओर शहर में उनको सिर्फ कूडें के ढेर ही दिखाई पड़े । सोचा था कानपुर बदल गया होगा, लेकिन यह तो पहले से भी बदतर हो गया ।

एलएनजी गैस से चलेंगे भारी वाहन
सन् 1980 बैच के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के बीटेक पास प्रभात सिंह बताते हैं कि वह पेट्रोनेट कंपनी के साथ मिलकर लिक्विफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) पर काम कर रहे हैं। देश की पहली एलएनजी गैस से चलने वाली बस को गुजरात के भरूच में रजिस्टर कराया जा चुका है। यह गैस भारी वाहनों के दूर के सफर के लिए प्रयोग में लाई जाएगी। इसे डीजल के विकल्प के रूप में तैयार किया गया है।
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