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आईआईटी कानपुर ने दुनिया भर के छात्र और शोधार्थियों को दी उन्नत कृत्रिम का हृदय बनाने की चुनौती
Thu, 06 Jan 2022 12:10 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 06 Jan 2022 12:10 PM IST
सार
आईआईटी कानपुर ने विश्व के इनोवेटर्स, शोधार्थी और वैज्ञानिकों को सबसे उन्नत कृत्रिम का हृदय या लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस (एलवीएडी) विकसित करने की चुनौती दी है।
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आईआईटी कानपुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर आईआईटी ने पूरे विश्व को कृत्रिम हृदय बनाने की चुनौती दी है। इस चुनौती में दुनिया के किसी भी देश के इनोवेटर्स, शोधार्थी या वैज्ञानिक अपना आइडिया प्रस्तुत कर सकते हैं। टॉप आइडिया का चयन टास्क फोर्स करेगी। इस फोर्स में दुनिया के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक व कार्डियोलॉजिस्ट की टीम है।
चयनित आइडिया देने वाले को फेलोशिप भी दी जाएगी। प्रतिभागियों को 30 जनवरी तक आवेदन करना होगा। संस्थान के स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर के प्रभारी प्रो. अमिताभ बंदोपाध्याय ने बताया कि अगर कृत्रिम हृदय बनाने में सफलता मिली तो काफी संख्या में अचानक जान गंवा देने वाले लोगों को बचाया जा सकेगा।
इसी के तहत आईआईटी के स्कूल ऑफ मेडिकल रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी (एसएमआरटी) के तहत एक नई चुनौती हृदयतंत्र की घोषणा बुधवार को की गई। शोधार्थियों को सबसे उन्नत कृत्रिम का हृदय या लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस (एलवीएडी) विकसित करने की चुनौती दी है। संस्थान के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि एलवीएडी एक ऐसा पंप है, जिसका इस्तेमाल करके जान बचाई जा सकती है। यह एक मैकेनिकल पंप है, जो शरीर के बाकी हिस्सों में रक्त भेजने में मदद करता है।
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टास्क फोर्स की टीम में ये शामिल
प्रतिभागियों को iitk.ac.in पर आवेदन करना होगा। चयनित आइडिया के साथ टास्कफोर्स की टीम कार्य करेगी। इस टीम में एम्स, अपोलो, फोर्टिस हेल्थकेयर, मेदांता, केआईएमएस, यूएन मेहता हार्ट इंस्टीट्यूट के साथ आईआईटी के वैज्ञानिक, यूएसए के विशेषज्ञ व नारायण हेल्थ के क्लीनिकल विशेषज्ञ हैं।
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चयनित आइडिया देने वाले को फेलोशिप भी दी जाएगी। प्रतिभागियों को 30 जनवरी तक आवेदन करना होगा। संस्थान के स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर के प्रभारी प्रो. अमिताभ बंदोपाध्याय ने बताया कि अगर कृत्रिम हृदय बनाने में सफलता मिली तो काफी संख्या में अचानक जान गंवा देने वाले लोगों को बचाया जा सकेगा।
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इसी के तहत आईआईटी के स्कूल ऑफ मेडिकल रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी (एसएमआरटी) के तहत एक नई चुनौती हृदयतंत्र की घोषणा बुधवार को की गई। शोधार्थियों को सबसे उन्नत कृत्रिम का हृदय या लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस (एलवीएडी) विकसित करने की चुनौती दी है। संस्थान के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि एलवीएडी एक ऐसा पंप है, जिसका इस्तेमाल करके जान बचाई जा सकती है। यह एक मैकेनिकल पंप है, जो शरीर के बाकी हिस्सों में रक्त भेजने में मदद करता है।
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टास्क फोर्स की टीम में ये शामिल
प्रतिभागियों को iitk.ac.in पर आवेदन करना होगा। चयनित आइडिया के साथ टास्कफोर्स की टीम कार्य करेगी। इस टीम में एम्स, अपोलो, फोर्टिस हेल्थकेयर, मेदांता, केआईएमएस, यूएन मेहता हार्ट इंस्टीट्यूट के साथ आईआईटी के वैज्ञानिक, यूएसए के विशेषज्ञ व नारायण हेल्थ के क्लीनिकल विशेषज्ञ हैं।