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52वें दीक्षांत समारोह में सेना के आईआईटीयन अफसरों को मिली उपाधियां, इन्हें किया गया सम्मानित
Sun, 30 Jun 2019 11:12 AM IST
शिखा पांडेय
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 30 Jun 2019 11:12 AM IST
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लेफ्टिनेंट कर्नल आकाश अरोरा और मेजर भूषण हुए सम्मानित
- फोटो : अमर उजाला
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आईआईटी कानपुर के 52वें दीक्षांत समारोह में उपाधि पाने वालों में सेना के दो सीनियर अफसर भी शामिल थे। इसमें जम्मू कश्मीर में तैनात लेफ्टिनेंट कर्नल आकाश अरोरा को सिविल इंजीनियरिंग से एमटेक करने के लिए उपाधि दी गई तो मेजर भूषण को एनवायरमेंट से एमएस करने के लिए। समारोह में दोनों अफसर अपने परिजनों के साथ पहुंचे थे।
लेफ्टिनेंट कर्नल आकाश अरोरा अहमदाबाद के रहने वाले हैं। पत्नी डॉ. जसप्रीत और बेटा भी साथ आया था। आकाश ने बताया कि उन्होंने 2003 में गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, अहमदाबाद से बीटेक किया था। उसी वर्ष उनका चयन सेना में हो गया था। अभी वह जम्मू कश्मीर में तैनात हैं।
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लेफ्टिनेंट कर्नल आकाश अरोरा अहमदाबाद के रहने वाले हैं। पत्नी डॉ. जसप्रीत और बेटा भी साथ आया था। आकाश ने बताया कि उन्होंने 2003 में गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, अहमदाबाद से बीटेक किया था। उसी वर्ष उनका चयन सेना में हो गया था। अभी वह जम्मू कश्मीर में तैनात हैं।
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डिग्री पाने के बाद आकाश के चेहरे की खुशी देखते बनती थी। बताते हैं कि यह उनके लिए काफी खूबसूरत पल था कि उन्हें आईआईटी से पढ़ाई करने का मौका मिला। भारतीय थल सेना ने उनकी पढ़ाई को स्पांसर किया था। वहीं मेजर भूषण बधान मूल रूप से पुणे के रहने वाले हैं।
2002 में उनका चयन सेना में हुआ था। पिता डॉ. बीटी बधान पीएससी से रिटायर्ड हैं और मां शैलजा बधाव शिक्षिका हैं। पत्नी कादंबरी भी दीक्षांत समारोह में शामिल होने आई थीं। मेजर ने बताया कि उन्होंने जल प्रदूषण और कानपुर में जल की गुणवत्ता और भूमि जल के घटते स्तर पर शोध किया था। आईआईटी में पढ़ने के दौरान उन्होंने कई युवाओं से मुलाकात की। काफी कुछ सीखने को भी मिला।
2002 में उनका चयन सेना में हुआ था। पिता डॉ. बीटी बधान पीएससी से रिटायर्ड हैं और मां शैलजा बधाव शिक्षिका हैं। पत्नी कादंबरी भी दीक्षांत समारोह में शामिल होने आई थीं। मेजर ने बताया कि उन्होंने जल प्रदूषण और कानपुर में जल की गुणवत्ता और भूमि जल के घटते स्तर पर शोध किया था। आईआईटी में पढ़ने के दौरान उन्होंने कई युवाओं से मुलाकात की। काफी कुछ सीखने को भी मिला।