दालें खाने के हैं शाैकीन ताे जनाब इधर भी दीजिये ध्यान
भारत में दलहनी फसलों पर शोध के शनिवार को 50 साल पूरे हो गए
उत्पादन 7 मिलियन टन से बढ़कर 23 मिलियन टन तक पहुंच गया है
भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान में मुख्य अतिथि कुलाधिपति केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय इंफाल प्रो. आरबी सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम शुरू किया। उन्होंने कहा कि दलहन पर शोध का नतीजा है कि उत्पादन 7 मिलियन टन से बढ़कर 23 मिलियन टन तक पहुंच गया है।
देश में दलहनी फसलों पर आत्मनिर्भरता बढ़ गई है
देश में दलहनी फसलों पर आत्मनिर्भरता बढ़ गई है। इसी तरह दलहनी फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी होती रही तो आने वाले कुछ सालों में ही भारत यहां से साउथ एशिया के नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, मालद्वीप सहित अन्य देशों को दाल निर्यात करने की स्थिति में खड़ा होगा।
दलहन अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि दलहनी फसलों पर लगातार शोध कार्य चल रहा है। इसका लाभ सीधे किसानों और देश को मिलेगा। इसमें डॉ. पीके कटियार, पूर्व सहायक महानिदेशक इकार्डा डॉ. एमसी सक्सेना सहित अन्य कृषि विज्ञानियों ने भी अपने विचार रखे।
भारत में दलहन उत्पादन में हो रही कमी महज 2 से 3 सालों में पूरी हो जाएगी
इसमें विज्ञानियों के साथ ही व्यवसायी, छात्र, किसान सहित पांच सौ से अधिक लोग शामिल हुए। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के कुलपति डॉ. सुशील सोलोमन ने कहा कि भारत में दलहन उत्पादन में हो रही कमी महज 2 से 3 सालों में पूरी हो जाएगी।
किसानों का मोबाइल नंबर सहित डाटा तैयार किया जा रहा है