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लाख बहोसी में चार विदेशी पक्षियों का शिकार, सामने आई वन अधिकारियों की ये करतूत

Thu, 14 Feb 2019 07:42 PM IST
प्रशांत कुमार क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 14 Feb 2019 07:42 PM IST
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Hunting of foreign birds in kannauj
झील के किनारे पड़ा उत्तरी पिनटेल का शव - फोटो : अमर उजाला
यूपी के कन्नौज जिले में कई देशों की सीमाएं लांघ कर लाख बहोसी पक्षी बिहार में अठखेलियां करने आए दुर्लभ प्रजाति के उत्तरी पिनटेल (सींखपर) को शिकारियों ने मार डाला। इससे पहले नवंबर में शिकारियों ने नार्थन शॉवेलर और कॉमन कूट पक्षियों का शिकार किया था। गुरुवार सुबह पक्षी बिहार की झीलों के किनारे चार उत्तरी पिनटेल के शव मिलने से ग्रामीणों ने वन अधिकारियों को शिकार होने की सूचना दी।  
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बुधवार रात शिकारियों ने एक बार फिर लाख बहोसी पक्षी बिहार में प्रवासी पक्षियों का शिकार किया। इस बार शिकारियों ने उत्तरी पिनटेल समेत कई पक्षियों को मार डाला। शिकारी पक्षियों का झील के किनारे शिकार करते रहे, सुरक्षा कर्मियों को भनक तक नहीं लगी।

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यूरोप और उत्तरी अमेरिका से उड़कर आता पिनटेल   

इलाकाई लोगों ने गुरुवार सुबह पक्षियों के शव देखकर वन अधिकारियों को सूचना दी। वन अधिकारियों ने मामले को दबाने के लिए शवों को दफन कर दिया। इससे जाहिर होता है कि पक्षी बिहार में वन विभाग के सुरक्षा कर्मचारियों की मिलीभगत से शिकारी विदेशी मेहमान पक्षियों को मारकर मांस और खाल की तस्करी करते हैं।  

पिनटेल उत्तरी देश यूरोप, उत्तरी अमेरिका से उड़कर सर्दियों में एशिया के देशों में विचरण करने आते हैं। यह बतख प्रजाति का पक्षी है। इसे हिंदी में सींखपर के नाम से जाना जाता है। इसकी विशेषता है कि 48 मील प्रतिघंटा उड़ाता है। एक बार में यह 1800 मील तक की उड़ान भरने की क्षमता रखता है। यह पक्षी नवंबर से मार्च तक विचरण करने आते हैं। 

शिकारियों पर इन धाराओं में होती कार्रवाई  

विदेशी और प्रतिबंधित पक्षियों का शिकार करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। शिकार करने वाले लोगों पर वर्ल्ड लाइफ एक्ट 1972 के तहत धारा 52, 53 और 54 के तहत मुकदमा दर्ज होता है। करीब दो साल तक जेल में रहने के बाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने का प्रावधान है। इसके बाद भी वन विभाग शिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने से परहेज करता है। बताया जाता है कि शिकार करने वाले आसपास के गांवों के लोग हैं।

विदेशी पक्षियों का शिकार करने वाले लोगों को चिह्नित कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगर कोई वनकर्मी शिकारियों को संरक्षण देता है तो उसके खिलाफ भी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
आरके सिंह, मुख्य वन संरक्षक 
 
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