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गुलियन बेरी सिंड्रोम से बचने के लिए बढ़ाएं प्रतिरोधक क्षमता, वायरस संक्रमण से होती है बीमारी
Sat, 08 Jun 2019 01:55 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 08 Jun 2019 01:55 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को जीबी सिंड्रोम (गुलियन बेरी सिंड्रोम) होने का खतरा कुछ ज्यादा होता है। शहर में भी इसके मरीज सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों ने इससे बचाव के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है।
वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट एवं कन्नौज मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार ने बताया कि गुलियन बेरी सिंड्रोम (जीबी सिंड्रोम) होने की सही वजह पता नहीं चल पाई है। इसका संक्रमण किसी को भी हो सकता है। इस बीमारी में शरीर का आटो इम्यून (स्व प्रतिरक्षित) सिस्टम बिगड़ जाता है। यह बीमारी वायरस के संक्रमण से होती है।
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वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट एवं कन्नौज मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. नवनीत कुमार ने बताया कि गुलियन बेरी सिंड्रोम (जीबी सिंड्रोम) होने की सही वजह पता नहीं चल पाई है। इसका संक्रमण किसी को भी हो सकता है। इस बीमारी में शरीर का आटो इम्यून (स्व प्रतिरक्षित) सिस्टम बिगड़ जाता है। यह बीमारी वायरस के संक्रमण से होती है।
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ऐसे बढ़ा सकते हैं शरीर की प्रतिरोधक क्षमता
इसकी वजह से शुरुआत में पैरों, हाथों में कमजोरी महसूस होती है। धीरे-धीरे कमर, कंधों पर भी असर पहुंच जाता है। संक्रमण बढ़ने पर सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। मरीज को पांच-छह दिन तक रोज एक इंट्राविनस इम्यूनोग्लोबिलिन इंजेक्शन लगाए जाते हैं।
प्लाज्मा फोरेसिस मशीन से प्लाज्मा के माध्यम से इलाज किया जा सकता है। पर, समय रहते समुचित इलाज न होने पर मरीज की जान जाने का खतरा रहता है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रिचा गिरी ने बताया कि जीबी सिंड्रोम होने का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।
सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला ने बताया जीबी सिंड्रोम एक लाख लोगों में से किसी एक व्यक्ति को होता है। चूंकि यह संक्रमित मरीज से किसी दूसरे को या फ्लू की तरह हवा में वायरस की सक्रियता से नहीं फैलता। इसलिए इससे बचाव के लिए अलर्ट जारी करने से विशेष लाभ नहीं होगा। इंजेक्शन बहुत महंगा होने की वजह से नहीं मंगाते हैं।
- योग और व्यायाम करें, टहलें
- पौष्टिक आहार लें
- पर्याप्त विटामिन लें
- नसों को ताकत देने के लिए मेथाइल एल्ब्यूमीन आदि दवाएं भी डॉक्टर की सलाह पर ली जा सकती हैं
प्लाज्मा फोरेसिस मशीन से प्लाज्मा के माध्यम से इलाज किया जा सकता है। पर, समय रहते समुचित इलाज न होने पर मरीज की जान जाने का खतरा रहता है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रिचा गिरी ने बताया कि जीबी सिंड्रोम होने का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।
सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला ने बताया जीबी सिंड्रोम एक लाख लोगों में से किसी एक व्यक्ति को होता है। चूंकि यह संक्रमित मरीज से किसी दूसरे को या फ्लू की तरह हवा में वायरस की सक्रियता से नहीं फैलता। इसलिए इससे बचाव के लिए अलर्ट जारी करने से विशेष लाभ नहीं होगा। इंजेक्शन बहुत महंगा होने की वजह से नहीं मंगाते हैं।
- योग और व्यायाम करें, टहलें
- पौष्टिक आहार लें
- पर्याप्त विटामिन लें
- नसों को ताकत देने के लिए मेथाइल एल्ब्यूमीन आदि दवाएं भी डॉक्टर की सलाह पर ली जा सकती हैं