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नगर निगम में गृहकर घोटाला
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Mon, 09 Mar 2015 02:10 AM IST
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नगर निगम के अफसरों और कर्मचारियों ने वित्तीय वर्ष 2008-09, 2009-10 और 2010-11) में पुरानी दरों पर गृहकर निर्धारण कर 50 करोड़ का चूना लगाया है। अफसरों की नोटिंग और आरटीआई में जानकारी मांगने पर घोटालेबाज अपने बचाव के लिए पेशबंदी में जुटे हैं। नगर आयुक्त ने इस घोटाले का रिकॉर्ड तलब कर लिया है।
कार्रवाई हो सकती है। 119 एलआईजी, सिंगल स्टोरी, बर्रा-2 निवासी प्रकाश चंद्र त्रिपाठी ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नगर विकास विभाग के जन सूचना अधिकारी से 19 नवंबर 2011 को पूछा कि कानपुर नगर निगम में कामर्शियल भवनों के कर निर्धारण में डीएम सर्किल रेट के आधार पर भूमि व भवन निर्माण की दरें लागू थीं।
जीआईएस सर्वे लागू हुआ। इसके बावजूद अफसरों की मिलीभगत से जमीन की दरें सर्किल रेट से कम कर दी गईं और 1 अप्रैल 2008 में 2002 के सर्किल रेट से सिर्फ 10 प्रतिशत बढ़ाकर भूमि की कीमत लागू कर दी गई थी। नगर निगम सदन, कार्यकारिणी समिति या शासन से इसका अनुमोदन भी नहीं कराया गया।
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इस संबंध में प्रकाश चंद्र त्रिपाठी ने तीन सवाल पूछे। पहला, क्या भूमि की कीमतें सर्किल रेट व मार्केट रेट से कम किए जाने से कानपुर नगर निगम को वित्तीय वर्ष 2008-09, 2009-10 और 2010-11) में कम राजस्व प्राप्त हुआ? दूसरा सवाल है भूमि की कीमत तय करने, संशोधित करने और सर्किल रेट से कम निर्धारित करने का अधिकार किसे था?
तीसरा सवाल है भूमि की कीमत जीआईएस सर्वे के बाद किसके द्वारा कम कर दी गई थी? शासन में तत्कालीन अनु सचिव आत्माराम वर्मा ने 30 नवंबर 2011 को नगर आयुक्त को पत्रांक संख्या - सूचना अधिकारी 168/ नौ-9-11 के तहत आदेश दिया कि वे अधिनियम में निर्धारित समयावधि के भीतर आवेदक को संबंधित सूचनाएं सीधे उपलब्ध कराएं। आवेदक से भी कहा गया कि वे नगर आयुक्त से उक्त सूचना प्राप्त करें।
पर नगर निगम ने तय समय में जवाब नहीं दिया। प्रकाश चंद्र त्रिपाठी ने तमाम चक्कर लगाए, तब 17 अप्रैल 13 को उसे जवाब दिया गया कि छह साल पुरानी दरों पर कर निर्धारण से कोई नुकसान नहीं हुआ।
जवाब से असंतुष्ट प्रकाश चंद्र त्रिपाठी ने प्रथम अपील अधिकारी (नगर आयुक्त) को 23 मई 2013 पत्र लिखकर आरोप लगाया कि जन सूचना अधिकारी ने भ्रामक और निराधार सूचना दी, जिसके खिलाफ वह अपील कर रहा है, पर नगर आयुक्त ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया।
कई बार सुनवाई के क्रम में 20 जनवरी 2014 को हुई सुनवाई के दौरान नगर आयुक्त की ओर से जोन - 5 के जोनल प्रभारी विनय राय ने अपरिहार्य कारण बताते हुए तारीख स्थगित कर दी।बकौल प्रकाश चंद्र तब से उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। अब वह जन सूचना आयोग में अपील करने जा रहे हैं।
यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है। सोमवार को संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई जाएगी। यदि वास्तव में ऐसा हुआ है तो कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
- विनोद कुमार गुप्ता, अपर नगर आयुक्त (प्रथम), नगर निगम
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कार्रवाई हो सकती है। 119 एलआईजी, सिंगल स्टोरी, बर्रा-2 निवासी प्रकाश चंद्र त्रिपाठी ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नगर विकास विभाग के जन सूचना अधिकारी से 19 नवंबर 2011 को पूछा कि कानपुर नगर निगम में कामर्शियल भवनों के कर निर्धारण में डीएम सर्किल रेट के आधार पर भूमि व भवन निर्माण की दरें लागू थीं।
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जीआईएस सर्वे लागू हुआ। इसके बावजूद अफसरों की मिलीभगत से जमीन की दरें सर्किल रेट से कम कर दी गईं और 1 अप्रैल 2008 में 2002 के सर्किल रेट से सिर्फ 10 प्रतिशत बढ़ाकर भूमि की कीमत लागू कर दी गई थी। नगर निगम सदन, कार्यकारिणी समिति या शासन से इसका अनुमोदन भी नहीं कराया गया।
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इस संबंध में प्रकाश चंद्र त्रिपाठी ने तीन सवाल पूछे। पहला, क्या भूमि की कीमतें सर्किल रेट व मार्केट रेट से कम किए जाने से कानपुर नगर निगम को वित्तीय वर्ष 2008-09, 2009-10 और 2010-11) में कम राजस्व प्राप्त हुआ? दूसरा सवाल है भूमि की कीमत तय करने, संशोधित करने और सर्किल रेट से कम निर्धारित करने का अधिकार किसे था?
तीसरा सवाल है भूमि की कीमत जीआईएस सर्वे के बाद किसके द्वारा कम कर दी गई थी? शासन में तत्कालीन अनु सचिव आत्माराम वर्मा ने 30 नवंबर 2011 को नगर आयुक्त को पत्रांक संख्या - सूचना अधिकारी 168/ नौ-9-11 के तहत आदेश दिया कि वे अधिनियम में निर्धारित समयावधि के भीतर आवेदक को संबंधित सूचनाएं सीधे उपलब्ध कराएं। आवेदक से भी कहा गया कि वे नगर आयुक्त से उक्त सूचना प्राप्त करें।
पर नगर निगम ने तय समय में जवाब नहीं दिया। प्रकाश चंद्र त्रिपाठी ने तमाम चक्कर लगाए, तब 17 अप्रैल 13 को उसे जवाब दिया गया कि छह साल पुरानी दरों पर कर निर्धारण से कोई नुकसान नहीं हुआ।
जवाब से असंतुष्ट प्रकाश चंद्र त्रिपाठी ने प्रथम अपील अधिकारी (नगर आयुक्त) को 23 मई 2013 पत्र लिखकर आरोप लगाया कि जन सूचना अधिकारी ने भ्रामक और निराधार सूचना दी, जिसके खिलाफ वह अपील कर रहा है, पर नगर आयुक्त ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया।
कई बार सुनवाई के क्रम में 20 जनवरी 2014 को हुई सुनवाई के दौरान नगर आयुक्त की ओर से जोन - 5 के जोनल प्रभारी विनय राय ने अपरिहार्य कारण बताते हुए तारीख स्थगित कर दी।बकौल प्रकाश चंद्र तब से उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। अब वह जन सूचना आयोग में अपील करने जा रहे हैं।
यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है। सोमवार को संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई जाएगी। यदि वास्तव में ऐसा हुआ है तो कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
- विनोद कुमार गुप्ता, अपर नगर आयुक्त (प्रथम), नगर निगम