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लेदर इंडस्ट्री में कच्चे माल का भीषण संकट
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 08 Jan 2017 10:26 AM IST
सार
- कानपुर में लेदर प्रोडक्ट के तीन हजार करोड़ के आर्डर लटके
- अगले छह माह तक हालात सामान्य होने के आसार नहीं
- जानवर की खाल लाने वाले श्रमिक मांग रहे नगद भुगतान
- हर माह करीब एक हजार
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विस्तार
कानपुर और उन्नाव की लेदर इंडस्ट्री कच्चे माल के भीषण संकट से जूझ रही है। नोट बंदी के दो माह बाद भी हालात सामान्य नहीं हो रहे हैं। कैश निकालने की सीमा तय होने से जानवर की खाल लेकर आने वाले मजदूरों से लेकर अन्य खर्चे पूरे नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में आर्डर पूरे नहीं हो पाने से एक्सपोर्टरों (निर्यातकों) को करीब तीन हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। माना जा रहा है कि अगले छह माह तक हालात अभी सामान्य नहीं होंगे।
उद्यमियों को करंट एकाउंट से सिर्फ 50 हजार रुपये साप्ताहिक निकालने की छूट है। इस कारण टेनरी संचालक जानवरों की खाल लेकर आ रहे मजदूरों का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से या निचले तबके से आने वाले ऐसे लोग उद्यमियों से चेक भी स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
इसी कारण शहर के अधिकतर स्लाटर हाउस में 90 फीसदी तक काम बंद है। हालांकि ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से करीब 10 फीसदी कारोबार वापस आ गया है लेकिन स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। इससे उबरने के लिए चमड़ा कारोबारियों ने श्रमिकों को भी ऑनलाइन पेमेंट के लिए ट्रेंड करना शुरू कर दिया है।
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तीन माह में तीन हजार करोड़ का नुकसान
चमड़ा कारोबारियों के मुताबिक नवंबर में कच्चे माल की सप्लाई पूरी तरह ठप रही। दिसंबर में प्रोडक्ट बनाने के लिए कच्चा माल नहीं है। इस तरह से करीब दो हजार करोड़ का एक्सपोर्ट नहीं हो सका। जनवरी में भी आर्डर पूरा करने के लिए माल नहीं है। ऐसे में करीब तीन हजार करोड़ के आर्डर पर संकट है।
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उद्यमियों को करंट एकाउंट से सिर्फ 50 हजार रुपये साप्ताहिक निकालने की छूट है। इस कारण टेनरी संचालक जानवरों की खाल लेकर आ रहे मजदूरों का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से या निचले तबके से आने वाले ऐसे लोग उद्यमियों से चेक भी स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
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इसी कारण शहर के अधिकतर स्लाटर हाउस में 90 फीसदी तक काम बंद है। हालांकि ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से करीब 10 फीसदी कारोबार वापस आ गया है लेकिन स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। इससे उबरने के लिए चमड़ा कारोबारियों ने श्रमिकों को भी ऑनलाइन पेमेंट के लिए ट्रेंड करना शुरू कर दिया है।
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तीन माह में तीन हजार करोड़ का नुकसान
चमड़ा कारोबारियों के मुताबिक नवंबर में कच्चे माल की सप्लाई पूरी तरह ठप रही। दिसंबर में प्रोडक्ट बनाने के लिए कच्चा माल नहीं है। इस तरह से करीब दो हजार करोड़ का एक्सपोर्ट नहीं हो सका। जनवरी में भी आर्डर पूरा करने के लिए माल नहीं है। ऐसे में करीब तीन हजार करोड़ के आर्डर पर संकट है।