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सेना की ए वन लैंड पर काबिज लोगों के लिए तय हुई  डेड लाइन, बेदखली और क्षतिपूर्ति की होगी कार्रवाई

Sat, 25 May 2019 12:17 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 25 May 2019 12:17 PM IST
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कानपुर में सेना की जमीन पर कब्जा, खाली करवाने पहुंचे जवान - फोटो : अमर उजाला
कानपुर के उदय नगर और विराट नगर स्थित सेना की ए वन लैंड पर काबिज लोगों के लिए सेना ने डेड लाइन तय कर दी है। 27 मई को संपदा अधिकारी ने सेना मुख्यालय में अपना पक्ष रखने के लिए सभी को बुलाया है। जमीन से जुड़े दस्तावेज दिखाने के लिए कहा गया है।
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इसके बाद यहां से इन लोगों को हटा दिया जाएगा। इसके अलावा सेना की जमीन के अधिभोग पर क्षतिपूर्ति वसूली की जाएगी। जो मौजूदा सर्किल रेट के अनुसार होगी। अपनी ए वन लैंड (वो जमीन जो सिर्फ सेना की होती है) खोज रही सेना ने 14 अप्रैल को उदय नगर व विराट (अराजी संख्या 2014 ) स्थित महलनुमा लॉन और लगभग 25 घरों के बाहर सीमेंट के बने पिलर गाड़े थे।
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सेना की जमीन कब्जा पर गलत तथ्य दिखा कोर्ट से लिया आर्डर

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सेना ने जमीन नापकर गाढ़े खंभे - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद 17 मई को अपनी लैंड को सुरक्षित रखने के लिए कटीले तार खींचने के लिए लोहे के खंभे जगह-जगह गाड़े थे। सूत्रों ने बताया कि सेना ने 15 मई को अपना पक्ष रखने के लिए लोगों को सेना मुख्यालय बुलाया था। लेकिन यहां रहने वाला कोई भी नहीं आया और न ही जमीन के संबंध कोई दस्तावेज दिखाए।

इसके बाद अब 27 मई की अंतिम तिथि तय की गई है। यदि कोई अपना पक्ष रखने के लिए नहीं आता है तो बेदखली और क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की जाएगी।  सैन्य सूत्रों ने बताया कि विराट नगर और उदय नगर की सेना की जमीन पर बने लॉन संचालकों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में गलत तथ्यों को पेश कर आर्डर लिया है। यह आर्डर स्टे आर्डर नहीं है।

सूत्रों ने बताया कि सेना की ओर से इन पर की गई पीपी एक्ट की कार्रवाई की जानकारी कोर्ट को नहीं दी गई है। 15 अप्रैल को याचिका दाखिल की गई और 30 अप्रैल को कोर्ट ने आर्डर दिया था। सूत्रों ने बताया कि राजस्व विभाग के रिकार्ड से सेना का कोई लेना-देना नहीं होता है। उनके पास ग्राउंड लेवल रिकार्ड (जीएलआर) होता है। सेना की जमीन संबंधी सारा रिकार्ड इसमें दर्ज है।
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