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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Holashtak 2023: Holashtak will be nine days after 27 years, auspicious work will not be done

Holashtak 2023: 27 साल बाद नौ दिन के होंगे होलाष्टक, नहीं होंगे शुभ कार्य, उग्र स्वभाव पर रहते ग्रह

Mon, 27 Feb 2023 12:17 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 27 Feb 2023 12:17 PM IST
सार

पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस बार फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि 27 फरवरी को दोपहर 12:59 बजे से प्रारंभ हो रही है, जो सात मार्च को फाल्गुन की पूर्णिमा तक है। होलाष्टक के दौरान अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र स्वभाव में रहते हैं।

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Holashtak 2023: Holashtak will be nine days after 27 years, auspicious work will not be done
होलाष्टक 2023 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इस साल होलाष्टक 27 फरवरी से सात मार्च तक नौ दिन के रहेंगे। तिथि वृद्धि के कारण होलाष्टक में एक दिन की वृद्धि हुई है। होली से पहले आठ दिन होलाष्टक कहलाते हैं। अर्थात, धुलंडी से आठ दिन पहले होलाष्टक की शुरूआत हो जाती है। इन दिनों में शुभ कार्य की मनाही होती है।

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पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस बार फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि 27 फरवरी को दोपहर 12:59 बजे से प्रारंभ हो रही है, जो सात मार्च को फाल्गुन की पूर्णिमा तक है। होलाष्टक के दौरान अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र स्वभाव में रहते हैं।
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इन ग्रहों के उग्र होने के कारण मनुष्य के निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है। इस कारण कई बार गलत निर्णय भी हो जाते हैं। जिनकी कुंडली में नीच राशि के चंद्रमा और वृश्चिक राशि के जातक या चंद्र छठे या आठवें भाव में हैं, उन्हें इन दिनों अधिक सतर्क रहना चाहिए।

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क्या करते हैं होलाष्टक
माघ पूर्णिमा से होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। होलाष्टक आरंभ होते ही दो डंडों को स्थापित किया जाता है। इसमें एक होलिका का प्रतीक है और दूसरा प्रह्लाद का। जब प्रह्लाद को नारायण भक्ति से विमुख करने के उपाय निष्फल होने लगे तो हिरण्यकश्यप ने यातनाएं दीं। आठवें दिन हिरण्यकश्यप ने होलिका को प्रह्लाद को अग्नि में भस्म करने का निर्देश दिया। लेकिन, होलिका की गोद में बैठे प्रह्लाद को अग्नि से कुछ नहीं हुआ और होलिका भस्म हो गई। इसी को होलिका दहन के रूप में मनाया जाता है। प्रह्लाद के बचने की खुशी में होली का त्योहार मनाया जाता है।

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