UP: हाईकोर्ट- अब उन्नाव में चलेंगे कानपुर के दागी वकीलों के मुकदमे, 61 पेज के आदेश में जारी की गाइडलाइन
Kanpur News: इटावा के एक वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दागी और आपराधिक प्रवृत्ति के वकीलों पर सख्त रुख अपनाया है। 61 पेज के आदेश में कोर्ट ने कानपुर के दागी वकीलों के मुकदमे उन्नाव और उन्नाव के मुकदमे कानपुर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, फर्जी वकीलों और बार काउंसिल की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी टिप्पणियां की हैं।
विस्तार
इटावा के एक वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जब पुलिस, यूपी बार काउंसिल, फर्म, सोसाइटी और चिट्स रजिस्ट्रार से आंकड़े मांगे तो आंकड़े चौंकाने वाले निकले। सुनवाई के दौरान कई लोगों ने वकीलों के खिलाफ अलग से शिकायतें भेजीं जिसे देखकर हाईकोर्ट ने इसे जनहित का मुद्दा मान लिया। 61 पेज के आदेश में प्रदेशभर के वकीलों के लिए कई गाइडलाइन जारी कर दी हैं।
आपराधिक प्रवृत्ति के दागी वकीलों पर सख्ती दिखाते हुए उनके मुकदमों की सुनवाई दूसरे जिलों में करने के आदेश दिए हैं। इसके तहत कानपुर नगर के दागी वकीलों के मुकदमे अब उन्नाव में सुने जाएंगे, जबकि उन्नाव के मुकदमे कानपुर नगर स्थानांतरित होंगे। हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि वकीलों के खिलाफ बड़ी संख्या में आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन यूपी बार काउंसिल ने कुछ वकीलों पर ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
कठोर सत्यापन अभियान नहीं चलाया गया
बार काउंसिल सदस्यों द्वारा चुनावी हितों के कारण ऐसा कोई कठोर सत्यापन अभियान नहीं चलाया गया, जिससे फर्जी वकीलों की पहचान हो सके। इससे साफ है कि वकीलों के अनुशासन और व्यवस्था में कमी है। गैंगस्टर्स और माफिया कानूनी पेशे को सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। गोरखपुर और कानपुर में बार संघों में ऐसे पदाधिकारी पदों पर रहे हैं, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है।
मामलों में ठोस कार्रवाई से परहेज किया
आपराधिक प्रवृत्ति के वकीलों के संगठित गिरोह ने अदालती आदेशों को लागू करने, जबरन कोर्ट के बाहर विवाद सुलझाने, कमजोर पक्षकारों को डराने-धमकाने, किरायेदार व संपत्ति के कब्जेदारों को जबरन बेदखल करने जैसे कामों में अपनी पैठ बना ली है। जिला जजों ने भी ऐसे मामलों में ठोस कार्रवाई से परहेज किया है। ऐसे माहौल में युवा वकीलों और नवनियुक्त न्यायिक अधिकारियों का काम करना मुश्किल हो रहा है।
कानपुर कमिश्नरेट के आंकड़े
- 323 वकीलों का है आपराधिक इतिहास
- 460 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं वकीलों पर
- 13 सर्वाधिक मुकदमे हैं अखिलेश दुबे पर
- 12 मुकदमे हैं धीरज उपाध्याय उर्फ दीनू पर
नोट: सभी आंकड़े हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामों के आधार पर हैं।
हरदोई में एक भी नहीं, कोतवाली में 112 मुकदमे लंबित
प्रदेश में हरदोई ही एकमात्र ऐसा जिला है जहां के 26 थानों में से किसी में भी किसी वकील के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। कोर्ट ने कहा प्रदेश में यह एकमात्र अपवाद है या फिर आंकड़ों में कोई गलती है। इसकी भी जांच की जानी चाहिए। वहीं, कानपुर कोतवाली में 109 वकीलों से जुड़े 112 मुकदमे लंबित हैं जो प्रदेश के किसी एक थाने के लिए दूसरी सबसे बड़ी संख्या है। कर्नलगंज में 16 वकीलों पर 32 मुकदमे, जबकि नवाबगंज में 16 वकीलों पर 18 मुकदमे दर्ज हैं।
हाल के इन मामलों से कानपुर के वकीलों पर लगा दाग
- नजूल की जमीन पर कब्जे के मामले में कोतवाली में दर्ज हुए मुकदमे में कुछ वकीलों के नाम भी सामने आए थे।
- पिंटू सेंगर हत्याकांड में पांच साल बाद अचानक दो अधिवक्ताओं को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
- राजाराम वर्मा हत्याकांड में भी चार साल बाद अग्रिम विवेचना शुरू हुई। इसमें भी एक अधिवक्ता का नाम उछाला गया।
- भाजपा नेता रवि सतीजा, होटल कारोबारी सुरेश पाल से रंगदारी वसूलने के मुकदमे में एक वकील को जेल भेजा गया। उससे संबंधित एक मुकदमे की 15 साल बाद अग्रिम विवेचना हुई और उसमें वकील का नाम सामने आया।
- कोतवाली में पार्षद के खिलाफ दर्ज हुए रंगदारी के मुकदमों में उसके अधिवक्ता भाई को भी नामजद किया गया।
- पिछले डेढ़ साल के अंदर 12 से ज्यादा वकीलों के खिलाफ पुरानी घटनाओं में रंगदारी के मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया।
अपराध की श्रेणी के आधार पर बने वकीलों की सूची
हाईकोर्ट ने दागी वकीलों पर शिकंजा कसने के लिए पिछले दिनों जो आदेश दिया उसमें कहा है कि जघन्य मामलों में नामजद वकील अब वकालत नहीं कर सकेंगे। उनके मुकदमों की सुनवाई भी गृह जनपद से दूर के जिले की विशेष अदालत में होगी। इसके लिए दागी वकीलों की सूची बनाने का काम एकबार फिर शुरू हो गया है। ऐसे में सूची बनाते समय इस बात का भी ध्यान रखे जाने की मांग की जा रही है कि वकीलों के खिलाफ पेशबंदी में दर्ज कराए गए मुकदमों और पारिवारिक मुकदमों की एक अलग श्रेणी भी होनी चाहिए।
व्यक्तिगत, राजनीतिक, पारिवारिक विवाद में दर्ज मुकदमों और समाज के खिलाफ अपराध से संबंधित मुकदमों को अलग-अलग श्रेणी में रखा जाना चाहिए। गैंगस्टर और पति-पत्नी के विवाद के मुकदमों को एक ही सूची में रखना उचित नहीं। -करीम अहमद सिद्दीकी, वरिष्ठ अधिवक्ता
बार काउंसिल को सख्त होने की जरूरत है। आपराधिक प्रवृत्ति वाले वकीलों की शिकायत मिलने पर अपने स्तर से ही जांच कर लाइसेंस रद्द करना चाहिए। सजा होने पर स्टे नहीं अपील के अंतिम निस्तारण तक निरस्तीकरण आदेश जारी रखना चाहिए। -सिद्धांत शुक्ला, वरिष्ठ अधिवक्ता
वकालत के पेशे में शामिल हुए आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की छटनी जरूरी है लेकिन पेशबंदी में दर्ज मुकदमों को अलग रखना होगा। वकील का अपराधी से बात करना, उठना-बैठना, मुकदमे की पैरवी करना, फीस लेना अपराध नहीं है। इसका ध्यान रखना चाहिए। -यशु शुक्ला, अधिवक्ता