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Kanpur News: पीयूष की सजा माफी व मनीषा की दोषमुक्ति पर 24 सितंबर को सुनवाई
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कानपुर। बिस्कुट व्यापारी की बहू ज्योति श्यामदासानी की हत्या में उम्रकैद की सजा काट रहे पति पीयूष श्यामदासानी की सजा माफी याचिका और मुकदमे में बरी हुई मनीषा मखीजा की दोषमुक्ति के खिलाफ सरकार की ओर से दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 24 सितंबर को एकसाथ सुनवाई होगी। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की दो सदस्यीय खंडपीठ ने यह आदेश दिया है।
मध्यप्रदेश के जबलपुर निवासी शंकरलाल नागदेव की बेटी ज्योति का विवाह 28 नवंबर 2012 को पांडुनगर निवासी बिस्कुट व्यापारी पीयूष से हुआ था। 27 जुलाई 2014 को पीयूष ने भाड़े के हत्यारों से ज्योति की हत्या करा दी थी। मुकदमे में अपर जिला जज प्रथम ने 21 अक्तूबर 2022 को पीयूष श्यामदासानी, मनीषा मखीजा, मनीषा के ड्राइवर अवधेश कुमार चतुर्वेदी, पीयूष से सुपारी लेकर हत्या की साजिश रचने वाले आशीष कश्यप, सुपारी किलर रेनू उर्फ अखिलेश कनौजिया व सोनू कश्यप को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दोषियों की ओर से हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दाखिल की गई थी जिसमें हाईकोर्ट ने 29 नवंबर 2024 को आदेश पारित करते हुए मनीषा मखीजा को बरी कर दिया था जबकि बाकी की सजा बरकरार रखी थी। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पीयूष ने सुप्रीम कोर्ट में सजा माफी के लिए याचिका दाखिल की थी जिसमें जमानत की मांग की थी। पीयूष के अधिवक्ता की ओर से पीयूष के दस साल से जेल में बंद रहने का हवाला देते हुए जमानत की मांग की गई। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मनीषा मखीजा को बरी किए जाने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों याचिकाओं की एक साथ सुनवाई के निर्देश दिए हैं।
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मध्यप्रदेश के जबलपुर निवासी शंकरलाल नागदेव की बेटी ज्योति का विवाह 28 नवंबर 2012 को पांडुनगर निवासी बिस्कुट व्यापारी पीयूष से हुआ था। 27 जुलाई 2014 को पीयूष ने भाड़े के हत्यारों से ज्योति की हत्या करा दी थी। मुकदमे में अपर जिला जज प्रथम ने 21 अक्तूबर 2022 को पीयूष श्यामदासानी, मनीषा मखीजा, मनीषा के ड्राइवर अवधेश कुमार चतुर्वेदी, पीयूष से सुपारी लेकर हत्या की साजिश रचने वाले आशीष कश्यप, सुपारी किलर रेनू उर्फ अखिलेश कनौजिया व सोनू कश्यप को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दोषियों की ओर से हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दाखिल की गई थी जिसमें हाईकोर्ट ने 29 नवंबर 2024 को आदेश पारित करते हुए मनीषा मखीजा को बरी कर दिया था जबकि बाकी की सजा बरकरार रखी थी। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पीयूष ने सुप्रीम कोर्ट में सजा माफी के लिए याचिका दाखिल की थी जिसमें जमानत की मांग की थी। पीयूष के अधिवक्ता की ओर से पीयूष के दस साल से जेल में बंद रहने का हवाला देते हुए जमानत की मांग की गई। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मनीषा मखीजा को बरी किए जाने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों याचिकाओं की एक साथ सुनवाई के निर्देश दिए हैं।
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