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यूपी: डांट के डर से जांच कराने से बच रहे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कुरसौली में हो गई आठ महिलाओं समेत नौ रोगियों की मौत

Wed, 15 Sep 2021 12:37 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 15 Sep 2021 12:37 AM IST
सार

कुरसौली में नौ रोगियों की मौत होने के बाद भी जनप्रतिनिधि इस गांव से दूरी बनाए हुए हैं। गांववालों ने बताया कि क्षेत्र के विधायक अभिजीत सिंह सांगा यहां एक बार आए हैं। क्षेत्रीय सांसद देवेंद्र सिंह भोले यहां एक बार भी पता लगाने के  लिए नहीं गए।

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Health department officials avoiding getting tested for fear of scolding
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानपुर के कुरसौली में नवीं मौत हो गई। कई बच्चों की नाक और पेशाब से रक्तस्राव के बाद स्थिति गंभीर है। कुरसौली में बीमारी कौन सी है? स्वास्थ्य विभाग नाम बताने में डर रहा है। विभागीय अधिकारियों ने सिर्फ तीन रोग कोरोना, डेंगू और मलेरिया की रट लगा रखी है।
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विभागीय सूत्र बता रहे हैं कि तीन के अलावा चौथी बीमारी बताने पर अफसर डर रहे हैं। उन्हें शासन, प्रशासन की बैठक में डांट खाने में डर लगता है। हालत यह है कि अभी तक बीमारी का पता लगाने के लिए एक भी सैंपल दिल्ली या लखनऊ नहीं भेजा गया।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की कोई टीम इस गांव नहीं गई। विभाग का महामारी दस्ता भी अभी तक वहां नहीं गया है। कुरसौली वालों का भी एक सवाल है कि उनकी मौतों को लेकर बरती जा रही लापरवाही का सबब क्या है? इसे सामान्य तौर पर क्यों लिया जा रहा है।
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इस शहर में एक कैबिनेट और एक राज्यमंत्री हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग लापरवाह बना है। अगर सैंपल भेज कर जांच करा ली जाए और रोग की पहचान हो तो कम से कम ढंग से रोगियों को इलाज मिल जाएगा। निचले स्तर पर काम कर रहे विभागीय अधिकारी भी लैप्टोस्पायरोसिस और स्क्रब टाइफस को लेकर शक जाहिर कर रहे हैं, लेकिन सैंपल न भेजने का कारण पूछने पर कहते हैं कि यह जिला स्तर के अधिकारियों का काम है।

इन तीन रोगों के अलावा किसी बीमारी का नाम लेने पर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों का मुंह बंद हो जाता है। इसी से कुरसौली और क्षेत्र के अलग-अलग क्षेत्रों में फैली बीमारी छिपाई जा रही है। हालांकि जिले के नोडल प्रमुख सचिव अनिल गर्ग खुद कुरसौली का निरीक्षण कर चुके हैं। उसके बाद छह मौत हो चुकी हैं। सीएमओ डॉ. नैपाल सिंह का कहना है कि वह लैप्टोस्पायरोसिस, टाइफस की जांच के संबंध में मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला से बात करेंगे। 

नजर नहीं आ रहे जनप्रतिनिधि
कुरसौली में नौ रोगियों की मौत होने के बाद भी जनप्रतिनिधि इस गांव से दूरी बनाए हुए हैं। गांववालों ने बताया कि क्षेत्र के विधायक अभिजीत सिंह सांगा यहां एक बार आए हैं। क्षेत्रीय सांसद देवेंद्र सिंह भोले यहां एक बार भी पता लगाने के  लिए नहीं गए। शहर के दो मंत्री भी नहीं आए। कैबिनेट मंत्री सतीश महाना ने कुरसौली की बीमारी पता करने के संबंध में अधिकारियों पर सख्ती नहीं की। राज्यमंत्री नीलिमा कटियार के विधानसभा क्षेत्र से बिठूर विधानसभा क्षेत्र का यह गांव नजदीक है।

फॉगिंग के लिए तरस रहा कुरसौली
कुरसौली में एक-दो दिन ही फॉगिंग की गई। इसके बाद बंद हो गई। गांवों वालों का कहना है कि फॉगिंग बंद होने से और घबराहट हो गई। लोगों ने पलायन शुरू कर दिया है। पूर्व प्रधान और क्षेत्र के दूसरे लोगों ने कल्याणपुर और आसपास के क्षेत्रों में किराये पर कमरा ले लिया है। सोमवार को चार लोग और गांव छोड़कर चले गए। कुछ लोग सिर्फ दिन में घर देखने के लिए आते हैं।
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