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HBTU convocation: 899 छात्र-छात्राओं को मिली उपाधि, समारोह में नाराज हुईं राज्यपाल, छात्रों को चुप रहने को कहा
Fri, 27 Sep 2024 12:44 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 27 Sep 2024 12:44 PM IST
सार
दीक्षांत समारोह में कुल 899 छात्रों को उपाधि दी गई। 48 छात्रों को पदक मिले। इसमें चार कुलाधिपति और 44 कुलपति पदक दिए गए।
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HBTU convocation
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) के छठवें दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को दीक्षांत में 899 छात्रों को उपाधि दी गईं। 48 छात्रों को पदक दिए गए। समारोह में चार कुलाधिपति पदक के अलावा 15 कुलपति स्वर्ण, 14 कुलपति रजत और 15 कुलपति कांस्य पदक दिए गए। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्य अतिथि आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल, कुलपति प्रो. समशेर, कुलसचिव डॉ. पीके शर्मा और डीन एकेडमिक्स मंच पर रहे।
कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने छात्रा सौम्या खंडेलवाल को कुलाधिपति स्वर्ण पदक और पेंट टेक्नोलॉजी का कुलपति स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया। केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र शिवांशु कुशवाहा और प्लास्टिक टेक्नोलॉजी की छात्रा मुस्कान सिंह को संयुक्त रूप से कुलाधिपति रजत पदक और इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी के अमर्त्य यादव को कुलाधिपति कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। दीक्षांत में पहली बार मेधावियों के साथ उनके अभिभावकों को भी मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। इससे पहले पर्यावरण संरक्षण की थीम पर शुरू हुए कार्यक्रम की शुरुआत पर्यावरण गीत और कुल गीत के साथ हुई।
इसके साथ ही राज्यपाल ने पूर्वी परिसर में केमिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग विभागों के नवनिर्मित भवनों के साथ स्कॉलर रोड का भी उद्घाटन हुआ। आंगनबाड़ी की कार्यकर्ताओं को किट और विवि की ओर से गोद लिए गए बच्चों को प्रेरणादायी पुस्तकें दी गईं। स्टैनफोर्ड विवि की ओर से जारी लिस्ट में शामिल एचबीटीयू के वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया गया।
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कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने छात्रा सौम्या खंडेलवाल को कुलाधिपति स्वर्ण पदक और पेंट टेक्नोलॉजी का कुलपति स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया। केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र शिवांशु कुशवाहा और प्लास्टिक टेक्नोलॉजी की छात्रा मुस्कान सिंह को संयुक्त रूप से कुलाधिपति रजत पदक और इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी के अमर्त्य यादव को कुलाधिपति कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। दीक्षांत में पहली बार मेधावियों के साथ उनके अभिभावकों को भी मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। इससे पहले पर्यावरण संरक्षण की थीम पर शुरू हुए कार्यक्रम की शुरुआत पर्यावरण गीत और कुल गीत के साथ हुई।
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इसके साथ ही राज्यपाल ने पूर्वी परिसर में केमिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग विभागों के नवनिर्मित भवनों के साथ स्कॉलर रोड का भी उद्घाटन हुआ। आंगनबाड़ी की कार्यकर्ताओं को किट और विवि की ओर से गोद लिए गए बच्चों को प्रेरणादायी पुस्तकें दी गईं। स्टैनफोर्ड विवि की ओर से जारी लिस्ट में शामिल एचबीटीयू के वैज्ञानिकों को भी सम्मानित किया गया।
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ये रहीं हैं उपलब्धियां
प्रो. समशेर ने बताया कि पिछला साल काफी बेहतर गया है। 500 से अधिक शोधपत्र, 54 पेटेंट, 64 अंतरराष्ट्रीय स्तर की पुस्तकें और बुक चैप्टर्स प्रकाशित हुए हैं।
छात्रों को 27 और छात्राओं को 21 पदक
इस बार पदक की दौड़ में छात्र आगे रहे। 48 में से 27 छात्रों और 21 छात्राओं को पदक दिए जाएंगे। कुल 899 छात्रों को उपाधि मिलेंगी। इसमें 695 छात्र और 204 छात्राएं हैं। इसमें बीटेक में 752 में 606 छात्र और 146 छात्राएं, एमसीए में 68 में से 48 छात्र और 20 छात्राएं, एमबीए में 23 में से 11 छात्र और 12 छात्राएं, एमएससी में 14 में से 7 छात्र और 7 छात्राएं, एमटेक में 25 में से 14 छात्र और 11 छात्राएं और पीएचडी में 17 में से नौ छात्र और आठ छात्राएं हैं।
प्रो. समशेर ने बताया कि पिछला साल काफी बेहतर गया है। 500 से अधिक शोधपत्र, 54 पेटेंट, 64 अंतरराष्ट्रीय स्तर की पुस्तकें और बुक चैप्टर्स प्रकाशित हुए हैं।
छात्रों को 27 और छात्राओं को 21 पदक
इस बार पदक की दौड़ में छात्र आगे रहे। 48 में से 27 छात्रों और 21 छात्राओं को पदक दिए जाएंगे। कुल 899 छात्रों को उपाधि मिलेंगी। इसमें 695 छात्र और 204 छात्राएं हैं। इसमें बीटेक में 752 में 606 छात्र और 146 छात्राएं, एमसीए में 68 में से 48 छात्र और 20 छात्राएं, एमबीए में 23 में से 11 छात्र और 12 छात्राएं, एमएससी में 14 में से 7 छात्र और 7 छात्राएं, एमटेक में 25 में से 14 छात्र और 11 छात्राएं और पीएचडी में 17 में से नौ छात्र और आठ छात्राएं हैं।
यह दीक्षांत है, आम सभा नहीं कि आए, सुने और चल दिए
शांत हो जाएं सब चुप रहें। यह दीक्षांत समारोह है कोई आम सभा नहीं कि आए, सुने और चल दिए। कितनी देर से देख रही हूं कि शोर मच रहा है। मेरे आने के 20 मिनट बाद तक लोग आ रहे हैं। आप से अच्छे तो छोटे बच्चे हैं जो इतनी देर से अनुशासन में हैं, जबकि आप उनसे अधिक पढ़े लिखे हैं। दीक्षांत समारोह में आएं हैं तो अनुशासन में रहें, अनुशासन भी दीक्षांत का ही हिस्सा है। ये बातें हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के छठे दीक्षांत समारोह में नाराज कुलाधिपति ने मंच से कही।
अध्यक्षीय भाषण में छात्रों को संबोधित करने से पहले उन्होंने ऑडिटोरियम में उपस्थित शिक्षक, छात्रों, कर्मचारी व अन्य लोगों की क्लास लगा दी। बोलीं कि मेरे आने के बाद भी लोगों के आने का क्या मतलब है। आप लोगों को देर क्यों हुई, इसका कारण मुझे नहीं जानना, लेकिन यह दीक्षांत का मौका था सबको समय से आना चाहिए। कुलाधिपति की नाराजगी के बाद पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया।
हुआ यूं कि 11 बजे के दीक्षांत समारोह का शुभारंभ 15 मिनट पूर्व ही हो गया। जिस कारण कई लोग हॉल के बाहर ही खड़े हुए थे। छात्र भी कुलाधिपति के आने के कुछ देर बाद ही पहुंचे। साथ ही कुलपति, मुख्य अतिथि के भाषण के दौरान ऑडिटोरियम में बातचीत का शोर आता ही रहा। जिसे शुरू से ही कुलाधिपति नोटिस कर रही थी। उनके भाषण के दौरान भी जब शोर और लोगों का आना जाना बंद नहीं हुआ तो उन्होंने अंत में नाराजगी व्यक्त ही कर दी।
शांत हो जाएं सब चुप रहें। यह दीक्षांत समारोह है कोई आम सभा नहीं कि आए, सुने और चल दिए। कितनी देर से देख रही हूं कि शोर मच रहा है। मेरे आने के 20 मिनट बाद तक लोग आ रहे हैं। आप से अच्छे तो छोटे बच्चे हैं जो इतनी देर से अनुशासन में हैं, जबकि आप उनसे अधिक पढ़े लिखे हैं। दीक्षांत समारोह में आएं हैं तो अनुशासन में रहें, अनुशासन भी दीक्षांत का ही हिस्सा है। ये बातें हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी के छठे दीक्षांत समारोह में नाराज कुलाधिपति ने मंच से कही।
अध्यक्षीय भाषण में छात्रों को संबोधित करने से पहले उन्होंने ऑडिटोरियम में उपस्थित शिक्षक, छात्रों, कर्मचारी व अन्य लोगों की क्लास लगा दी। बोलीं कि मेरे आने के बाद भी लोगों के आने का क्या मतलब है। आप लोगों को देर क्यों हुई, इसका कारण मुझे नहीं जानना, लेकिन यह दीक्षांत का मौका था सबको समय से आना चाहिए। कुलाधिपति की नाराजगी के बाद पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया।
हुआ यूं कि 11 बजे के दीक्षांत समारोह का शुभारंभ 15 मिनट पूर्व ही हो गया। जिस कारण कई लोग हॉल के बाहर ही खड़े हुए थे। छात्र भी कुलाधिपति के आने के कुछ देर बाद ही पहुंचे। साथ ही कुलपति, मुख्य अतिथि के भाषण के दौरान ऑडिटोरियम में बातचीत का शोर आता ही रहा। जिसे शुरू से ही कुलाधिपति नोटिस कर रही थी। उनके भाषण के दौरान भी जब शोर और लोगों का आना जाना बंद नहीं हुआ तो उन्होंने अंत में नाराजगी व्यक्त ही कर दी।
प्राइमरी के बच्चे जब मंच पर आए...तब लौटी कुलाधिपति के चेहरे पर मुस्कुराहट
बड़े बच्चों की अनुशासनहीनता से नाराज कुलाधिपति के चेहरे पर मुस्कुराहट पूरे कार्यक्रम के दौरान गायब रही। लेकिन प्राइमरी स्कूल के छोटे बच्चों को मंच पर देखकर उनकी मुस्कुराहट लौट आई। छोटे बच्चों से मिलने के दौरान कुलाधिपति का अलग ही रूप देखने को मिला। उन्होंने बच्चों को पुचकारा और उनसे नाम पूछा। पढ़ना अच्छा लगता है, कक्षा में प्रथम आती हो या नहीं कहकर उनसे बातचीत की।
बड़े बच्चों की अनुशासनहीनता से नाराज कुलाधिपति के चेहरे पर मुस्कुराहट पूरे कार्यक्रम के दौरान गायब रही। लेकिन प्राइमरी स्कूल के छोटे बच्चों को मंच पर देखकर उनकी मुस्कुराहट लौट आई। छोटे बच्चों से मिलने के दौरान कुलाधिपति का अलग ही रूप देखने को मिला। उन्होंने बच्चों को पुचकारा और उनसे नाम पूछा। पढ़ना अच्छा लगता है, कक्षा में प्रथम आती हो या नहीं कहकर उनसे बातचीत की।