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UP: हमीरपुर में गरजे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, बोले- 'असम हो या बंगाल; इनके हिंदुत्व की कलई खुल गई है..

Thu, 28 May 2026 09:26 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर Published by: प्रसून शुक्ला Updated Thu, 28 May 2026 09:26 PM IST
सार

Hamirpur News: गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध गविष्टि यात्रा के तहत पहुंचे ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोवंश संरक्षण और हिंदुत्व के मुद्दे पर तीखी टिप्पणी की।

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hankaracharya Avimukteshwaranand Targets Governments Over Cow Protection in Hamirpur
हमीरपुर में बोलते शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद - फोटो : amar ujala

विस्तार

गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध 'गविष्टि यात्रा' लेकर उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में पहुंचे ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने राजनीतिक दलों और मुख्यमंत्रियों के हिंदुत्व पर तीखा प्रहार किया है। पातालकेश्वर मंदिर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने देश में गोवंश की दुर्दशा को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि चाहे असम हो या पश्चिम बंगाल, नेताओं के नकली हिंदुत्व की कलई पूरी तरह खुल चुकी है। उन्हें केवल गाय का मांस खाने वालों के वोट चाहिए, गोमाता की रक्षा से उनका कोई सरोकार नहीं है।

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गाय की बोटी-बोटी कट रही, शासन-प्रशासन के दावों की खुली पोल

यमुना पुल पर अनुयायियों द्वारा भव्य स्वागत के बाद शंकराचार्य ने एक विशेष साक्षात्कार में देश की वर्तमान व्यवस्था पर सुलगते सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "पूरे देश में आज गोमाता की स्थिति बेहद दयनीय है। सरकार को सत्ता में आए 12 वर्ष बीत जाएं या 18 वर्ष, इससे क्या फर्क पड़ता है? जमीनी हकीकत यह है कि गोशालाओं में गायों की हालत देखने लायक भी नहीं बची है। जिस गोवंश की रक्षा की हमें उम्मीद थी, आज उसके बिल्कुल विपरीत काम हो रहा है। देश में आज भी गाय की बोटी-बोटी काटी जा रही है।

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असम और बंगाल के मुख्यमंत्रियों पर साधा निशाना

पश्चिम बंगाल और असम के मुख्यमंत्रियों के बयानों और नीतियों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए शंकराचार्य ने कहा, "इन नेताओं के लिए 14 वर्ष तक तो गाय माता रहती है और फिर वह केवल शाक-भाजी (सब्जी) बनकर रह जाती है। सच तो यह है कि असम हो या बंगाल, वहां के मुख्यमंत्रियों को सिर्फ गाय का मांस खाने वालों का वोट चाहिए। इसी वोटबैंक की राजनीति के कारण आज गोमाता सड़कों पर कटने को मजबूर है। इन राजनीतिक दलों के हिंदुत्व का दोहरा चेहरा अब जनता के सामने बेनकाब हो चुका है।

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सड़क कोई पवित्र स्थान नहीं, वहां नमाज पढ़ना गलत

इंटरव्यू के दौरान जब शंकराचार्य से सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अपनी राय रखी। शंकराचार्य ने कहा, "नमाज कभी भी बीच सड़क पर नहीं पढ़ी जानी चाहिए। नमाज या कोई भी धार्मिक इबादत हमेशा एक पवित्र स्थान पर करने का विषय है। सड़क आने-जाने के लिए होती है, वह कोई पवित्र धार्मिक स्थान नहीं है। इसलिए आस्था के नाम पर राहगीरों को परेशान करना उचित नहीं है।

मौन धारण करने से पहले पातालकेश्वर मंदिर में किया पादुका पूजन

तय समय से करीब पांच घंटे विलंब से हमीरपुर पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का पातालकेश्वर मंदिर में अनुयायियों ने पुष्प, मखाना और नींबू की माला पहनाकर जोरदार अभिनंदन किया। मंदिर के गर्भगृह में दर्शन करने के बाद वे मंच पर विराजमान हुए, जहां शिष्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उनका पादुका पूजन किया।

मंच पर करीब 35 मिनट रहने के दौरान सूर्यास्त हो जाने की वजह से उन्होंने अपने नियमानुसार मौन धारण कर लिया और उपस्थित जनसैलाब को हाथ उठाकर मौन आशीर्वाद दिया। इसी बीच एक अनुयायी की अर्जी पर उन्होंने इशारा करके अपने शिष्य के माध्यम से एक नवजात बच्ची का नामकरण 'शिवांगी' किया और अपने गले का मखाना हार उतारकर उसे आशीर्वाद स्वरूप पहनाया।

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