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बेटे का कटा हाथ लिए अस्पताल में भटकती रही, इलाज के लिए नहीं पसीजा किसी डॉक्टर का दिल
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 23 Oct 2016 10:32 PM IST
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ट्रेन की चपेट में आकर दलित युवक का हाथ कट गया। उधर, लहूलुहान बेटे और उसका कटा हाथ लिए वृद्ध मां अस्पताल में इलाज के लिए इधर-उधर भटकती रही। काफी देर के बाद मीडिया कर्मियों के हस्तक्षेप से घायल युवक को भर्ती कर इलाज शुरू किया गया।
अतर्रा के गांधीनगर का महेश (28) पुत्र राजू शनिवार को देर शाम बस्ती से दूर शौच को गया था। लौटने में रेल पटरी पार कर रहा था तभी फिसल कर गिर गया। इसी बीच मालगाड़ी आ गई। महेश का बायां हाथ कोहनी से कटकर अलग हो गया।
कुछ ही देर में परिजन और पड़ोस के लोग पहुंचे और तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डाक्टरों ने हालत नाजुक बताकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। देर शाम जिला अस्पताल आए महेश के इलाज में काफी लापरवाही बरती गई।
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बूढ़ी मां बेटे का कटा हुआ हाथ अपने हाथों में लिए अस्पताल में डाक्टरों और कर्मचारियों के कमरों में गिड़गिड़ाती भटकती रही। पर किसी का दिल नहीं पसीजा। उधर, लहूलुहान महेश कराहता रहा। बाद में देर रात मीडिया कर्मियों द्वारा उच्चाधिकारियों तक खबर पहुंचाने पर महेश का इलाज शुरू हुआ।
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अतर्रा के गांधीनगर का महेश (28) पुत्र राजू शनिवार को देर शाम बस्ती से दूर शौच को गया था। लौटने में रेल पटरी पार कर रहा था तभी फिसल कर गिर गया। इसी बीच मालगाड़ी आ गई। महेश का बायां हाथ कोहनी से कटकर अलग हो गया।
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कुछ ही देर में परिजन और पड़ोस के लोग पहुंचे और तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डाक्टरों ने हालत नाजुक बताकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। देर शाम जिला अस्पताल आए महेश के इलाज में काफी लापरवाही बरती गई।
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बूढ़ी मां बेटे का कटा हुआ हाथ अपने हाथों में लिए अस्पताल में डाक्टरों और कर्मचारियों के कमरों में गिड़गिड़ाती भटकती रही। पर किसी का दिल नहीं पसीजा। उधर, लहूलुहान महेश कराहता रहा। बाद में देर रात मीडिया कर्मियों द्वारा उच्चाधिकारियों तक खबर पहुंचाने पर महेश का इलाज शुरू हुआ।