हमीरपुर: पूर्व सांसद का ट्रक रोककर मांगे 50 हजार, चालक से 11 हजार लूटे, फर्जी जीएसटी अफसर बनकर की वारदात
Hamirpur News: फर्जी जीएसटी अधिकारी बनकर पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत के किचन के सामान से भरे मिनी ट्रक को बेतवा पुल के पास रोककर 50 हजार रुपये की रंगदारी मांगी गई है। साथ ही, चालक से 11 हजार रुपये लूटकर जान से मारने की धमकी दी गई है।
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हमीरपुर जिले में पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत के लखनऊ से चरखारी जा रहे किचन सामान से भरे मिनी ट्रक को बेतवा पुल के पास जीएसटी अधिकारी बनकर रोकने और चालक से 50 हजार रुपये मांगने का मामला सामने आया है। आरोप है कि रुपये देने से मना करने पर चालक को जान से मारने की धमकी दी गई और उसकी जेब से 11 हजार रुपये निकालकर आरोपी भाग गए। जीएसटी विभाग ने भी पुलिस को तहरीर देकर मामले की जांच की मांग की है।
विभाग के अधिकारियों के मुताबिक घटना के समय मौके पर जीएसटी की कोई सचल दल की टीम जांच नहीं कर रही थी। पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि लखनऊ से उनके किचन का सामान मिनी ट्रक से चरखारी आ रहा था। सामान के साथ बिल और जीएसटी से संबंधित दस्तावेज भी थे। बेतवा पुल के पास कुछ लोगों ने ट्रक रोक लिया। इनमें से एक ने खुद को जीएसटी अधिकारी बताते हुए चालक से 50 हजार रुपये मांगे।
चालक को जान से मारने की धमकी दी
चालक ने रुपये नहीं होने की बात कही और सामान मालिक से बात कराने को कहा। तहरीर के मुताबिक चालक ने राजपूत से फोन पर बात कराई। कथित अधिकारी ने अपना नाम हर्षित यादव बताया। राजपूत ने जीएसटी के उच्चाधिकारियों से जानकारी की, तो बताया गया कि हर्षित यादव नाम का कोई अधिकारी विभाग में नहीं है। आरोप है कि इसके बाद चालक को जान से मारने की धमकी दी गई और उसकी जेब से 11 हजार रुपये निकालकर आरोपी भाग गए।
हर्षित यादव नाम का कोई अधिकारी नहीं
जीएसटी सचल दल की सहायक आयुक्त पूर्णिमा के मुताबिक 22 सितंबर को बेतवा पुल के पास विभाग की कोई टीम वाहन की जांच नहीं कर रही थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद विभाग की ओर से भी पुलिस को तहरीर दी गई। उन्होंने बताया कि तहरीर में दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया था। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने बातचीत के दौरान फोन काट दिया। विभाग के अधिकारियों ने आरोपी को मौके पर नहीं देखा था।
किसी स्थानीय व्यक्ति की भूमिका है या नहीं
इसलिए उसकी पहचान पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। जीएसटी के अपर आयुक्त डीके सचान ने बताया कि हर्षित यादव नाम का कोई व्यक्ति विभाग में अधिकारी या कर्मचारी नहीं है। उनके मुताबिक घटना के समय वहां विभाग की अधिकृत टीम नहीं थी। मामले में किसी स्थानीय व्यक्ति की भूमिका है या नहीं, यह पुलिस जांच में स्पष्ट होगा। यदि विभागीय कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों से होगी जांच
एसपी मृगांक शेखर पाठक ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज समेत उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया जाएगा। पुलिस मोबाइल नंबर और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास करेगी। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि घटना में कितने लोग शामिल थे और उनकी क्या भूमिका थी।
उपनिरीक्षक रमाकांत शुक्ल को सौंपी गई है विवेचना
एसपी ने कहा कि जांच में यदि किसी पुलिसकर्मी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। मामले में किसी अन्य व्यक्ति की मदद या स्थानीय स्तर पर किसी की भूमिका है या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। कोतवाली नगर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। एफआईआर में हर्षित यादव के अलावा कुछ अज्ञात लोगों का भी उल्लेख है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक रमाकांत शुक्ल को सौंपी गई है।