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हैलट में मरीज को कूड़े पर रखवाया, मौत
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Mon, 04 Jan 2016 01:30 AM IST
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हैलट इमरजेंसी में रविवार को एक मरीज को भर्ती न करके कूड़े के ढेर पर रखवा दिया गया। और तो और शव की तरह उसके मुंह तक चादर भी ढक दी गई। मामला मीडिया तक पहुंचने पर उसे वार्ड में भर्ती किया गया। बाद में उसे वार्ड-6 में शिफ्ट कर दिया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
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करीब 55 साल का एक व्यक्ति दोपहर में इमरजेंसी के बाहर दर्द से कराह रहा था। उसके शरीर में घाव थे, जिनमें कीड़े पड़े थे। बदबू आ रही थी। तीमारदारों के बहुत कहने के बाद एक वार्ड ब्वाय उसे स्ट्रेचर पर लिटाकर इमरजेंसी के सर्जरी वार्ड में ले गया। मरीज की हालत देखकर जूनियर डॉक्टरों ने उसे भर्ती करने के बजाय स्ट्रेचर सहित बाहर कर दिया। वार्ड ब्वाय को भी फटकार लगाई।
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वार्ड ब्वाय ने भी स्ट्रेचर सर्जरी वार्ड के बगल में सीढ़ियों के नीचे पडे़ कूड़े (सर्जिकल वेस्ट) पर खड़ा कर दिया। इतनी ही नहीं, मरीज को चादर से ढक दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उसे ऐसे ढका गया था, जैसे शव ढका जाता है। वहीं हैलट के आकस्मिक चिकित्साधिकारी (ईएमओ) डॉ. आरएल महीप का कहना है कि मरीज के घावों में कीड़े थे।
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बदबू आ रही थी, जिससे अन्य मरीजों को संक्रमण का खतरा था इसलिए वार्ड से बाहर उसके घावों की सफाई कराई गई। इसके बाद उसे वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। रात में उसकी मौत हो गई। ॉ
डॉक्टर ‘खेलते’ रहे, तीमारदार भटकते रहे
कानपुर। कन्नौज से रेफर होकर आई वृद्धा रामेश्वरी (75) को भर्ती कराने के लिए परिजन रविवार को मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल और हैलट इमरजेंसी के चक्कर लगाते रहे। जूनियर डॉक्टरों ने रामेश्वरी को भर्ती नहीं किया। कन्नौज निवासी रामेश्वरी को खांसी, सांस लेने में तकलीफ की वजह से शनिवार रात जिला अस्पताल लाया गया।
यहां से मरीज को मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल रेफर कर दिया गया। रामेश्वरी के पुत्र रमवीर सिंह और केपी सिंह का आरोप है कि चेस्ट अस्पताल में काफी देर के बाद जूनियर डॉक्टरों ने मरीज देखा। टीबी न होने की बात कह कर डॉक्टरों ने तीमारदारों को टरकाते हुए मरीज को हैलट इमरजेंसी ले जाने की सलाह दी।
हैलट इमरजेंसी पहुंचने पर जूनियर डॉक्टरों ने रामेश्वरी को टीबी पेशेंट बताकर चेस्ट अस्पताल में भर्ती कराने की बात कह कर इमरजेंसी से टरका दिया। परिजन दोबारा मरीज को लेकर चेस्ट अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने मरीज को फिर हैलट इमरजेंसी लौटा दिया।
यहां पर तीमारदारों ने मेडिसिन विभाग के जूनियर डॉक्टरों से मरीजों को भर्ती करने का आग्रह किया। जूनियर डॉक्टर ने अन्य मरीजों में टीबी का संक्रमण फैलने की आशंका पर मरीज को भर्ती करने से इनकार कर दिया। डॉक्टरों से कहासुनी के बाद तीमारदारों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ईएमओ डॉ. आरएल महीप को दी।
ईएमओ ने मरीज की इलाज में बरती गई संवेदनहीनता पर सफाई देते हुए कहा कि जूनियर डॉक्टरों ने तीमारदारों से मरीज को टीबी की शिकायत न होने के बाबत चेस्ट अस्पताल से लिखा कर लाने को कहा था। इस लिए मरीज को भर्ती नहीं किया गया।