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हैलट में हड़ताल, मरीज की मौत
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Mon, 13 Jun 2016 01:25 AM IST
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मारपीट के जानकारी देते नरेंद्र कुमार मौर्य (बीच में सफेद शर्ट पहने )।
- फोटो : amarujala
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कानपुर। हैलट के वार्ड नंबर 12 में रविवार तड़के तीन बजे मेडिसिन के जूनियर डॉक्टर प्रथम वर्ष अशफाक और कई मेडिकल स्टूडेंटों ने अधेड़ वार्ड ब्वाय नरेंद्र मौर्या को पीट दिया। बीच-बचाव करने पहुंची स्टाफ नर्स निधि और शालिनी का एप्रन फाड़ दिया। इसके बाद कर्मचारियों और नर्सों ने सुबह चार बजे से हड़ताल शुरू कर दी। सात घंटे हड़ताल के दौरान वार्ड 12 में ऑक्सीजन और इलाज न मिलने के कारण एक बुजुर्ग मरीज की मौत हो गई। अफसरों के कार्रवाई के आश्वासन के बाद सुबह करीब 11 बजे सभी काम पर लौटे।
कर्मचारियों ने बताया कि रात तकरीबन दो बजे वार्ड 12 में जूनियर डॉक्टर अशफाक के पास कई मेडिकल स्टूडेंट पहुंचे। इसके बाद डॉ. अशफाक ने वार्ड ब्वाय नरेंद्र से फैक्टर आठ मांगा। वार्ड ब्वाय ने कहा कि फैक्टर आठ नहीं आ रहा है। आरोप है कि जूनियर डॉक्टर ने फैक्टर के लिए दबाव बनाया और नरेंद्र की पिटाई शुरू कर दी। नरेंद्र के चेहरे और शरीर पर कई चोटें आईं। दूसरे वार्ड में काम रही स्टाफ नर्स पहुंची तो जूनियर डॉक्टर और स्टूडेंटों से भी उनकी नोकझोंक हुई। इस घटना के बाबत सीएमएस डॉ. सीएस सिंह नरेंद्र अच्छे कर्मचारी हैं। प्रिंसिपल के आने पर उन्हें जानकारी दी जाएगी। कार्रवाई वही करेेंगे। लापरवाही से मौत की जानकारी नहीं है।
किसी ने सुध नहीं ली
वार्ड 12 में बवाल के दौरान दामोदर नगर निवासी महावीर प्रसाद (65) की हालत बिगड़ने लगी। परिजनों के अनुरोध पर ऑक्सीजन सिलेंडर लगवाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। महावीर तड़पते रहे लेकिन कोई न तो उनको इंजेक्शन लगाने आया और न ही सिलेंडर चेक करने।
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करतूत बताई
हैलट में वार्ड ब्वाय की पिटाई के बाद हड़ताल की जानकारी के बाद मेडिसिन की नोडल इंचार्ज प्रो. रिचा गिरी और हैलट के सीएमएस डॉ. सीएस सिंह इमरजेंसी पहुंचे। उनके सामने नरेंद्र और स्टाफ नर्सें रो पड़ीं। जूनियर डॉक्टर और मेडिकल स्टूडेंटों की सारी करतूत बताई और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
नर्स की लापरवाही से 15 मरीजों की हालत बिगड़ी
जिला अस्पताल उर्सला में रविवार सुबह इंजेक्शन लगने के बाद हड्डी के वार्ड नंबर चार में एक के बाद एक 15 लोगों को कंपकंपी के साथ बुखार आ गया। दांत कटकटाने लगे और कुछ को उल्टी-दस्त भी शुरू हो गई। एक मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में भर्ती किया गया है। पता चला कि ट्रेनिंग ले रही नर्स ने रात में खोले गए नार्मल सलाइन (एनएस, ग्लूकोज) से सुबह एंटीबायोटिक का घोल बनाकर मरीजों को लगा दिया था।
वार्ड नंबर चार में इफ्तिखाराबाद के सुहेल, ग्वालटोली के अमित, खजुरिया नेवादा के कमलेश, ग्वालटोली के रामजीवन, फर्रुखाबाद के जान मोहम्मद, मल्लावां के जितेंद्र, अशोक साहू, हूलागंज के मोनू, पिलानी बांदा के रज्जाक, हमीरपुर के गोकुल प्रसाद, पठकापुर के सोहन लाल वर्मा, शिवली के सुख देवानंद, चमनगंज के आफताब, गुरसहायगंज कन्नौज के अनवर खान, श्याम नगर के कमलाकांत का इलाज चल रहा है। रविवार सुबह करीब नौ बजे वार्ड में भर्ती 35 मरीजों को नर्स ने इंजेक्शन लगाना शुरू किया। अभी 15 मरीजों को ही इंजेक्शन लग पाया था कि सभी की हालत बिगड़ गई। कार्यवाहक डायरेक्टर डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि रात के नार्मल सलाइन से एंटीबायोटिक का घोल बनाया गया था। यह गलत है। प्रथम दृष्टया नर्सों की लापरवाही सामने आ रही है। वार्ड की सिस्टर इंचार्ज, स्टाफ नर्स, ट्रेनिंग नर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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कर्मचारियों ने बताया कि रात तकरीबन दो बजे वार्ड 12 में जूनियर डॉक्टर अशफाक के पास कई मेडिकल स्टूडेंट पहुंचे। इसके बाद डॉ. अशफाक ने वार्ड ब्वाय नरेंद्र से फैक्टर आठ मांगा। वार्ड ब्वाय ने कहा कि फैक्टर आठ नहीं आ रहा है। आरोप है कि जूनियर डॉक्टर ने फैक्टर के लिए दबाव बनाया और नरेंद्र की पिटाई शुरू कर दी। नरेंद्र के चेहरे और शरीर पर कई चोटें आईं। दूसरे वार्ड में काम रही स्टाफ नर्स पहुंची तो जूनियर डॉक्टर और स्टूडेंटों से भी उनकी नोकझोंक हुई। इस घटना के बाबत सीएमएस डॉ. सीएस सिंह नरेंद्र अच्छे कर्मचारी हैं। प्रिंसिपल के आने पर उन्हें जानकारी दी जाएगी। कार्रवाई वही करेेंगे। लापरवाही से मौत की जानकारी नहीं है।
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किसी ने सुध नहीं ली
वार्ड 12 में बवाल के दौरान दामोदर नगर निवासी महावीर प्रसाद (65) की हालत बिगड़ने लगी। परिजनों के अनुरोध पर ऑक्सीजन सिलेंडर लगवाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। महावीर तड़पते रहे लेकिन कोई न तो उनको इंजेक्शन लगाने आया और न ही सिलेंडर चेक करने।
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करतूत बताई
हैलट में वार्ड ब्वाय की पिटाई के बाद हड़ताल की जानकारी के बाद मेडिसिन की नोडल इंचार्ज प्रो. रिचा गिरी और हैलट के सीएमएस डॉ. सीएस सिंह इमरजेंसी पहुंचे। उनके सामने नरेंद्र और स्टाफ नर्सें रो पड़ीं। जूनियर डॉक्टर और मेडिकल स्टूडेंटों की सारी करतूत बताई और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
नर्स की लापरवाही से 15 मरीजों की हालत बिगड़ी
जिला अस्पताल उर्सला में रविवार सुबह इंजेक्शन लगने के बाद हड्डी के वार्ड नंबर चार में एक के बाद एक 15 लोगों को कंपकंपी के साथ बुखार आ गया। दांत कटकटाने लगे और कुछ को उल्टी-दस्त भी शुरू हो गई। एक मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में भर्ती किया गया है। पता चला कि ट्रेनिंग ले रही नर्स ने रात में खोले गए नार्मल सलाइन (एनएस, ग्लूकोज) से सुबह एंटीबायोटिक का घोल बनाकर मरीजों को लगा दिया था।
वार्ड नंबर चार में इफ्तिखाराबाद के सुहेल, ग्वालटोली के अमित, खजुरिया नेवादा के कमलेश, ग्वालटोली के रामजीवन, फर्रुखाबाद के जान मोहम्मद, मल्लावां के जितेंद्र, अशोक साहू, हूलागंज के मोनू, पिलानी बांदा के रज्जाक, हमीरपुर के गोकुल प्रसाद, पठकापुर के सोहन लाल वर्मा, शिवली के सुख देवानंद, चमनगंज के आफताब, गुरसहायगंज कन्नौज के अनवर खान, श्याम नगर के कमलाकांत का इलाज चल रहा है। रविवार सुबह करीब नौ बजे वार्ड में भर्ती 35 मरीजों को नर्स ने इंजेक्शन लगाना शुरू किया। अभी 15 मरीजों को ही इंजेक्शन लग पाया था कि सभी की हालत बिगड़ गई। कार्यवाहक डायरेक्टर डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि रात के नार्मल सलाइन से एंटीबायोटिक का घोल बनाया गया था। यह गलत है। प्रथम दृष्टया नर्सों की लापरवाही सामने आ रही है। वार्ड की सिस्टर इंचार्ज, स्टाफ नर्स, ट्रेनिंग नर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।