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ग्रेटर नोएडा बस अग्निकांड: कांच तोड़कर निकले उरई के यात्री, कुछ ही पलों में धुएं से भर गई बस
Thu, 24 Sep 2026 08:48 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
Published by: Shikha Pandey
Updated Thu, 24 Sep 2026 08:48 PM IST
सार
ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस वे पर हुए बस अग्निकांड ने हर किसी को झकझोर दिया। बस में यूपी के उरई के भी कई यात्री सवार थे।
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ग्रेटर नोएडा बस अग्निकांड
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस वे पर जिस बस में भीषण आग लगी और नौ यात्री जिंदा जल गए। इस घटना ने हर किसी को झकझोर दिया। रामनगर निवासी ठेकेदार वीरेंद्र कुमार (45) भी इसी बस से लौट रहे थे। वह करीब दस दिन पहले काम के सिलसिले में बाहर गए थे। उन्होंने बताया कि गांव से करीब दो किलोमीटर पहले कुछ युवक बाइक से बस के पीछे-पीछे आ रहे थे। तभी अचानक बस में धुआं भरने लगा। देखते ही देखते धुआं इतना बढ़ गया कि यात्रियों को सांस लेना मुश्किल हो गया और करीब पांच फीट तक आग की लपटें उठने लगीं।
वीरेंद्र के मुताबिक, इसके बाद बस में अफरा-तफरी मच गई। हर यात्री अपनी जान बचाने के लिए बाहर निकलने की कोशिश करने लगा। उन्होंने भी किसी तरह दरवाजे से छलांग लगा दी। पीछे मुड़कर देखा तो बस आग की लपटों से घिर चुकी थी। उन्होंने बताया कि कुछ देर पहले तक जिस बस में लोग अपने घर पहुंचने की उम्मीद में बैठे थे, वही देखते ही देखते काल के मुंह में समा गई।
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वीरेंद्र के मुताबिक, इसके बाद बस में अफरा-तफरी मच गई। हर यात्री अपनी जान बचाने के लिए बाहर निकलने की कोशिश करने लगा। उन्होंने भी किसी तरह दरवाजे से छलांग लगा दी। पीछे मुड़कर देखा तो बस आग की लपटों से घिर चुकी थी। उन्होंने बताया कि कुछ देर पहले तक जिस बस में लोग अपने घर पहुंचने की उम्मीद में बैठे थे, वही देखते ही देखते काल के मुंह में समा गई।
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पीछे फंसे शीशपाल ने कांच तोड़कर बचाई जान
गोहन थाना क्षेत्र के चाकी गांव निवासी शीशपाल सिंह (30) नोएडा में डिलीवरी का काम करते हैं और परिवार के साथ वहीं रहते हैं। नानी के निधन की खबर मिलने पर वह घर लौट रहे थे। हादसे के समय वह बस में सबसे पीछे बैठे थे।
शीशपाल ने बताया कि अचानक धुआं भरने लगा। इसी दौरान चालक ने यात्रियों से जल्दी बाहर निकलने के लिए कहा। वह पीछे की सीट पर होने के कारण दरवाजे तक नहीं पहुंच सके। धुएं और आग के बीच उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था। आखिरकार उन्होंने बस का कांच तोड़ा और उसी रास्ते से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। इस दौरान उनके पैर में मोच आ गई।
बाहर निकलने के बाद भी शीशपाल कुछ देर तक उस भयावह दृश्य को देखते रहे। उनके सामने लोग जान बचाने के लिए भाग रहे थे और बस लगातार आग की लपटों में घिरती जा रही थी। पैर में चोट होने के बावजूद वह वापस नोएडा चले गए।
गोहन थाना क्षेत्र के चाकी गांव निवासी शीशपाल सिंह (30) नोएडा में डिलीवरी का काम करते हैं और परिवार के साथ वहीं रहते हैं। नानी के निधन की खबर मिलने पर वह घर लौट रहे थे। हादसे के समय वह बस में सबसे पीछे बैठे थे।
शीशपाल ने बताया कि अचानक धुआं भरने लगा। इसी दौरान चालक ने यात्रियों से जल्दी बाहर निकलने के लिए कहा। वह पीछे की सीट पर होने के कारण दरवाजे तक नहीं पहुंच सके। धुएं और आग के बीच उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था। आखिरकार उन्होंने बस का कांच तोड़ा और उसी रास्ते से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। इस दौरान उनके पैर में मोच आ गई।
बाहर निकलने के बाद भी शीशपाल कुछ देर तक उस भयावह दृश्य को देखते रहे। उनके सामने लोग जान बचाने के लिए भाग रहे थे और बस लगातार आग की लपटों में घिरती जा रही थी। पैर में चोट होने के बावजूद वह वापस नोएडा चले गए।