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मौत मिल गई, रिपोर्ट नहीं

Mon, 01 Feb 2016 02:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर Updated Mon, 01 Feb 2016 02:08 AM IST
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Got killed, reports

केस-1- आईडीएच में भर्ती अजीतगंज की फारिया की स्वाइन फ्लू पॉजिटिव रिपोर्ट 28 जनवरी को सीएमओ कार्यालय को मिल गई थी। 29 जनवरी को आईडीएच में फारिया के 14 तीमारदारों व परिवार के लोगों को स्वाइन फ्लू की दवा भी खिला दी गई।

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30 जनवरी की सुबह फारिया की मौत हुई तो इलाज कर रहे डॉक्टरों को बताया गया कि वह स्वाइन फ्लू पॉजिटिव थी। डॉक्टर हैरान रह गए कि उन्हें अब यह बात बताई गई। सीएमएस से इस बात पर बहस भी हुई।
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केस-2- जनवरी के पहले हफ्ते में चांदनी नर्सिंग होम में भर्ती कर्नलगंज की आशा देवी की स्वाइन फ्लू की रिपोर्ट उनके मरने के बाद भी परिजनों को नहीं मिल पाई।
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गंभीर हालत में आशा देवी को आईडीएच रेफर किया गया लेकिन वहां अव्यवस्थाओं के कारण परिजन उन्हें लेकर एसजी पीजीआई लखनऊ जाने लगे। हालांकि रास्ते में ही आशा देवी की मौत हो गई। परिजनों को भी कई दिनों तक स्वाइन फ्लू की दवा नहीं खिलाई जा सकी।

स्वास्थ्य महकमे की यह मक्कारी मरीजों पर भारी पड़ रहा है। मरीज की रिपोर्ट इलाज कर रहे डॉक्टरों को ही नहीं मिल पा रही है। यानी डॉक्टर को मर्ज की पूरी जानकारी नहीं है। हवा में इलाज चल रहा है।

मरीज ठीक हो गया तो डॉक्टर की मेहनत, मर गया तो ऊपर वाले की मर्जी। सरकारी अस्पतालों में यह लापरवाही चरम पर होती जा रही है। विभागों में आपसी सामंजस्य न होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। हालत यह है कि मरीजों की मौत के बाद पता चल रहा है कि उन्हें स्वाइन फ्लू था।

अजीतगंज की फारिया के स्वाइन फ्लू पॉजिटिव होने की जानकारी पूरे शहर को हो गई थी लेकिन उसका इलाज करने वाले डॉक्टरों को तब पता चला जब उसकी मौत हो गई। अब फारिया के स्वाइन फ्लू पॉजिटिव होने की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग और संक्रामक रोग अस्पताल (आईडीएच) प्रशासन आमने-सामने है।

स्वास्थ्य विभाग के अफसर कह रहे हैं कि फारिया के स्वाइन फ्लू पॉजिटिव होने की सूचना दे दी गई थी जबकि आईडीएच प्रशासन ने इससे इंकार किया है।

डेंगू के समय भी हुई थी लापरवाही
अगस्त में फैले डेंगू के दौरान भी जमकर लापरवाही बरती गई थी। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की  रिपोर्ट कई दिनों के बाद इलाज कर रहे डॉक्टरों को मिल पा रही थी। सही इलाज न मिलने के कारण कई मरीजों ने दम भी तोड़ दिया था। उस समय भी हो-हल्ला मचा था लेकिन न तो कोई जांच हुई और न ही सुधार आया।

किसी ने नहीं बताया था

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार ने कहा कि उन्होंने आईडीएच के सीएमएस से बात की है। स्वास्थ्य विभाग ने फारिया की बीमारी की कोई सूचना नहीं दी थी।

सूचना न मिलने के कारण ही इलाज कर रहे डॉक्टरों को फारिया के स्वाइन फ्लू पॉजिटिव होने की जानकारी नहीं दी जा सकी थी। प्रिंसिपल ने कहा कि मामले की पूरी जानकारी की जाएगी। यदि लापरवाही मिली तो कार्रवाई होगी।

आईडीएच प्रशासन को पता था
सीएमओ ने कहा कि एसजी पीजीआई  लखनऊ से फोन के जरिए मरीजों की स्वाइन फ्लू की रिपोर्ट बता दी जाती है। यह सूचना आईडीएच के सीएमएस को दी जाती है। उनकी ओर से कोई कमी नहीं है। आईडीएच प्रशासन को पता था कि फारिया स्वाइन फ्लू पॉजिटिव थी। स्वास्थ्य विभाग से देर होने के प्रमाण मिलेंगे तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।

शहनाज को घर ले गए परिजन
संक्रामक रोग अस्पताल (आईडीएच) में भर्ती स्वाइन फ्लू की संदिग्ध मरीज बेबी शहनाज (24) पुत्री माे. रफीक अंसारी को शनिवार देर रात परिजन बिना डॉक्टरों को बताए लेकर चले गए।

देर रात तक बेबी शहनाज के वापस न आने पर पुलिस को सूचना दे दी गई है। डॉ. देव सिंह ने बताया कि युवती को अस्पताल से घर ले जाने के कारणों का पता लगाया जाएगा। इधर, आईडीएच में भर्ती स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीज महेंद्र और पॉजिटिव सुखदेई की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। शनिवार दोपहर बाबूपुरवा के छेदी पहलवान का अखाड़ा की बेबी शहनाज को आईडीएच में भर्ती कराया गया था।

लैब तैयार, किट का इंतजार

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब स्वाइन फ्लू की जांच के लिए तैयार है। अब सिर्फ किट और जांच से संबंधित सामान की जरूरत है। इसके लिए कॉलेज के प्रिंसिपल ने शासन को पत्र लिखा है।

माइक्रोबायोलॉजी विभाग में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए मशीन काफी पहले ही आ गई थी। प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार ने कहा कि जांच के लिए लैब तैयार है। किट और कुछ सामान आने हैं।

स्वाइन फ्लू के दो संदिग्ध भर्ती
आईडीएच में रविवार दोपहर बाद स्वाइन फ्लू के लक्षणों के बाद नई सड़क निवासी मो. सैफ (19) पुत्र मो. शफीक और बांदा के अमारा जसपुर निवासी रामबेलास (70) को भर्ती कराया गया है।

ये है सही प्रक्रिया
स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों के भर्ती होने के बाद अस्पताल के सीएमएस की जिम्मेदारी रिपोर्ट को लेकर काफी बढ़ जाती है। सीएमओ को एसजीपीजीआई से रिपोर्ट की जानकारी दी जाती है। सीएमओ से सूचना सीएमएस को दी जाती है। रिपोर्ट  पर तत्काल बेड हेड टिकट (बीएचटी) पर इसकी जानकारी दर्ज करना सीएमएस की जिम्मेदारी होती है।


स्वाइन फ्लू की पुष्टि पर सीएमओ की टीम ने आईडीएच पहुंचकर फारिया के परिजनों को दवा दी थी। इसके बाद भी फारिया के बीएचटी पर स्वाइन फ्लू पॉजिटिव होने का जिक्र नहीं किया गया।

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