कानपुर। मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से शनिवार को कल्याणपुर स्थित प्रेम लान में सत्संग हुआ। यहां हरिद्वार से आए सतपाल महाराज के शिष्य महात्मा ज्ञान शब्दानंद ने कहा कि परमात्मा कोई बाहरी सत्ता नहीं है वह प्रत्येक जीव के हृदय में विराजमान हैं।
बाहरी मंदिर मनुष्य द्वारा निर्मित हैं किंतु मानव का हृदय स्वयं परमात्मा रचित मंदिर है। इसलिए ईश्वर की खोज बाहर नहीं अपने भीतर करनी चाहिए। परमात्मा प्रकाश स्वरूप है, जिसे साधारण आंखों से नहीं देखा जा सकता। उसका वास्तविक अनुभव केवल ज्ञान नेत्रों से ही संभव है। उन्होंने कहा कि ज्ञान नेत्र सभी में विद्यमान हैं लेकिन सद्गुरु की कृपा के बिना वह खुलते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि भारत में अध्यात्म की चेतना फिर जागृत हो जाए तो हमारा देश एक बार फिर विश्व गुरु होगा। यहां हंस मंदिर की प्रभारी साध्वी चंदन बाई, साध्वी दुर्गा बाई और साध्वी मुदिता बाई, शैलेंद्र पाल, शिव सागर कुशवाहा, विवेक कुशवाहा, संतराम निषाद आदि मौजूद रहे। (संवाद)