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भगवान तो सिर्फ वात्सल्य और भक्ति के भूखे : श्रीकृष्ण गोपाल
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रामकथा वाचक आचार्य कृष्ण गोपाल सुवेदी के भजनों पर झूमती श्रद्धालु।
- फोटो : संवाद
कानपुर। कालपी रोड इंडस्ट्रियल स्टेट स्थित कृपा धाम मंदिर में भक्तमाल कथा में भागवताचार्य श्रीकृष्ण गोपाल सुवेदी ने कहा कि भगवान तो वात्सल्य और भक्ति के भूखे हैं। उन्हें आडंबरों से कोई लेना-देना नहीं है।
पांच दिवसीय संगीतमय कथा के तीसरे दिन गुरुवार को आयोजक संयोजक सुनील कपूर, सपना कपूर, राजीव चतुर्वेदी, गुड़िया चतुर्वेदी ने व्यास पीठ का पूजन किया। आचार्य ने कहा कि भक्तमाल ग्रंथ वर्ष 1585 में ब्रजभाषा में लिखा गया महाकाव्य है।
इसमें 200 से अधिक भक्तों की भगवान के प्रति अनन्य भक्ति का सुंदर वर्णन किया गया है। उन्होंने भक्त शिरोमणि कर्माबाई की निश्चल भक्ति का व्याख्यान करते हुए कहा कि यह हमें धर्म आत्मसात करने की शिक्षा देती हैं।
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कर्माबाई की निश्चल भक्ति से प्रसन्न ठाकुर जी उनके हाथ से भोग खाते थे। जब कभी वह मंदिर नहीं जा पातीं तो ठाकुर जी स्वयं उसके घर भोग पाने चले जाते थे, क्योंकि भगवान भक्तों की भक्ति और प्रेम को स्वीकार करते हैं।
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पांच दिवसीय संगीतमय कथा के तीसरे दिन गुरुवार को आयोजक संयोजक सुनील कपूर, सपना कपूर, राजीव चतुर्वेदी, गुड़िया चतुर्वेदी ने व्यास पीठ का पूजन किया। आचार्य ने कहा कि भक्तमाल ग्रंथ वर्ष 1585 में ब्रजभाषा में लिखा गया महाकाव्य है।
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इसमें 200 से अधिक भक्तों की भगवान के प्रति अनन्य भक्ति का सुंदर वर्णन किया गया है। उन्होंने भक्त शिरोमणि कर्माबाई की निश्चल भक्ति का व्याख्यान करते हुए कहा कि यह हमें धर्म आत्मसात करने की शिक्षा देती हैं।
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कर्माबाई की निश्चल भक्ति से प्रसन्न ठाकुर जी उनके हाथ से भोग खाते थे। जब कभी वह मंदिर नहीं जा पातीं तो ठाकुर जी स्वयं उसके घर भोग पाने चले जाते थे, क्योंकि भगवान भक्तों की भक्ति और प्रेम को स्वीकार करते हैं।