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ग्लू भट्ठी, ‘झूठी’ खाद पर रोक

Sat, 30 Jan 2016 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर Updated Sat, 30 Jan 2016 01:49 AM IST
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Glu furnace, 'false' ban on manure
जाजमऊ में गंगा किनारे अवैध ग्लू फैक्ट्री के गोरखधंधे का ‘अमर उजाला’ में खुलासा होने पर जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने सीधे चौकी इंचार्ज की जिम्मेदारी तय कर दी है। कहा कि फैक्ट्री चलती मिली तो सबसे पहले चौकी इंचार्ज पर कार्रवाई की जाएगी। इसका सर्कुलर भी शुक्रवार को जिलाधिकारी ने जारी कर दिया।
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गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के कामकाज की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सरकारी, गैर सरकारी भूमि पर चमड़े से जैविक खाद बनाने (हालांकि ऐसा होता नहीं, चमड़े से जैविक खाद नहीं बनाई जाती) पर भी रोक लगा दी। कहा कि ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गंगा किनारे चमड़ा सुखाने पर भी रोक लगा दी है। ऐसे करने वालों को जेल भेजने के आदेश दिए।
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जिलाधिकारी ने कलक्ट्रेट सभागार में गंगा प्रदूषण पर कहा कि जल निगम, केडीए, जिला प्रशासन और गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई की विशेष टीम बने और हर सप्ताह अभियान चलाकर गंगा के आसपास 500 मीटर के दायरे में बने अवैध निर्माण को ध्वस्त कराए। एनजीटी की रोक के बाद भी अवैध निर्माण कैसे हो गए। जिलाधिकारी ने कहा कि गंगा के आसपास ग्राउंड वाटर नीचे जा रहा है।
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चमड़ा सुखाने से भी ग्राउंड वाटर को नुकसान हो रहा। यह गतिविधि पूरी तरह से बंद होनी चाहिए। जो लोग आदेश न मानें, उन्हें जेल भेजा जाए। एनजीटी ने भी दंडात्मक कार्रवाई का विकल्प दिया है। जिलाधिकारी ने ट्रीटमेंट प्लांट की सूची और नक्शा लोकेशन बनाने का आदेश दिया है। 

जाम पर एक और योजना
आईजी आशुतोष पांडे के ट्रांसफर के बाद ट्रैफिक सुधार पर उनके प्रोजेक्ट कोना छोड़ो, जाम हटाओ अभियान ठंडे बस्ते में पड़े हैं और अब डीएम ने ट्रैफिक प्लान बनाया है। इसके तहत पहले चरण में विजय नगर, जरीब चौकी, रॉकेट तिराहा, टाटमिल चौराहा सहित शहर के पांच चौराहोें को जाम मुक्त बनाया जाएगा। यह जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को दी गई है।


जैविक खाद तो बहाना
कानपुर। ग्लू भट्ठी वाले अपनी गर्दन बचाने के लिए चमड़े की छीलन से जैविक खाद बनाने की बात कहते हैं और इसके लिए एनओसी भी बताते हैं लेकिन यह सरासर झूठ है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अनुसार चमड़े की छीलन से जैविक खाद बनाने की बात मनगढ़ंत है। ऐसे खाद बनती ही नहीं। भट्ठियां न तोड़ी जाएं, इसके लिए धंधेबाजों ने यह बहाना ढूंढ़ लिया है कि यहां खाद बनाते हैं जबकि ऐसा नहीं है।

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