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कानपुर के असलहे नक्सलियों को बेचने वाला शातिर धरा गया, फर्जी लाइसेंस से करता था तस्करी
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 15 Nov 2017 12:26 PM IST
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गैंग का शातिर उपेंद्र सिंह
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कानपुर शहर से फर्जी लाइसेंस पर असलहे खरीदने वाले गैंग के शातिर उपेंद्र सिंह को यूपी एटीएस (आतंकवाद निरोधी दस्ता) ने बिहार से दबोच लिया। पूछताछ में उसने शहर के चार गन हाउसों से 29 असलहे खरीदने की बात कबूली है। मुंगेर कोर्ट में पेशी के बाद उपेंद्र को जेल भेज दिया गया। इधर एटीएस ने उपेंद्र को मुंगेर से लखनऊ लाने के लिए कोर्ट में अर्जी भी दे दी है। माना जा रहा है कि एक-दो दिन में उसका ट्रांजिट रिमांड मिल जाएगा। एटीएस उपेंद्र का माओवादियों से कनेक्शन का दावा कर रही है।
एटीएस के आईजी असीम अरुण ने बताया कि एटीएस की कानपुर यूनिट ने 24 मई को मूलगंज स्थित जय जवान जय किसान गन हाउस, खन्ना आर्मरी, एके नियोगी एंड कंपनी और पूर्वांचल गन हाउस में छापेमारी की थी। दस्तावेज देखने पर अफसरों को पता चला कि चारों दुकानदार मुंगेर बिहार के थाना कासिम के बेलन बाजार निवासी उपेंद्र के जरिए माओवादियों को फर्जी टीएल (ट्रांजिट लाइसेंस) और फर्जी लाइसेंस पर असलहा बेचते थे। इन गन हाउसों के मालिकों को जेल भेजने के बाद उपेंद्र को दबोचने के लिए एटीएस कई दिनों से मुंगेर में डेरा डाले थी। मंगलवार को सटीक लोकेशन मिलने पर एटीएस ने बिहार एटीएफ की मदद से उपेंद्र को मुंगेर से धर दबोचा।
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एटीएस के आईजी असीम अरुण ने बताया कि एटीएस की कानपुर यूनिट ने 24 मई को मूलगंज स्थित जय जवान जय किसान गन हाउस, खन्ना आर्मरी, एके नियोगी एंड कंपनी और पूर्वांचल गन हाउस में छापेमारी की थी। दस्तावेज देखने पर अफसरों को पता चला कि चारों दुकानदार मुंगेर बिहार के थाना कासिम के बेलन बाजार निवासी उपेंद्र के जरिए माओवादियों को फर्जी टीएल (ट्रांजिट लाइसेंस) और फर्जी लाइसेंस पर असलहा बेचते थे। इन गन हाउसों के मालिकों को जेल भेजने के बाद उपेंद्र को दबोचने के लिए एटीएस कई दिनों से मुंगेर में डेरा डाले थी। मंगलवार को सटीक लोकेशन मिलने पर एटीएस ने बिहार एटीएफ की मदद से उपेंद्र को मुंगेर से धर दबोचा।
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फर्जी लाइसेंस पर खरीदे थे 29 असलहे
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पूछताछ में उपेंद्र ने बताया कि वह साथी राजकिशोर राय के साथ मिलकर फर्जी लाइसेंस तैयार करके असलहे खरीदता था। इसके बाद वह ऊंचे दामों पर नक्सलियों को शस्त्र बेच देता था। उपेंद्र ने फर्जीवाड़ा कर अब तक 29 असलहे खरीदने की बात कबूली है। ये असलहे 2014 से 2016 के बीच खरीदे और बेचे गए। उपेंद्र ने बताया कि फर्जी अभिलेखों, ट्रेजरी चालान और मुहर से फर्जी लाइसेंस तैयार करते थे।
होटल में बैठक कर करता था फर्जीवाड़ा
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उपेंद्र ने पूछताछ में एटीएस को बताया कि वह कानपुर में मूलगंज चौराहा स्थित जय जवान होटल में रुकता था। यह होटल जय जवान गन हाउस वालों का है। शस्त्र खरीदने के बाद वह होटल में ही बैठकर दुकानदार और दलालों के माध्यम से उसे दूसरे राज्य में ले जाने के लिए फर्जी कागजात तैयार करता था।
पहले भी जेल जा चुका उपेंद्र
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एटीएस अफसरों ने बताया कि उपेंद्र एक बार पहले भी बिहार में पकड़ा जा चुका है, लेकिन वह कुछ दिन बाद ही जमानत पर छूट गया था। इसके बाद वह कुछ समय तक गायब रहा। फिर उसने फर्जी लाइसेंस पर हथियारों की खरीद-फरोख्त का धंधा चालू कर दिया था। उसका साथी राज किशोर राय तीन जुलाई 2016 को सीवान से पकड़ा जा चुका है। उसने फर्जी लाइसेंस तैयार कर 10 शस्त्र कानपुर से खरीद कर बिहार में बेचे थे। इस मामले में राज किशोर राय की भी रिमांड लेने की तैयारी चल रही है।
उपेंद्र के तार तलाशे जाएंगे
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एटीएस अफसरों ने बताया कि उपेंद्र को लखनऊ लाकर पूछताछ की जाएगी। देखा जाएगा कि यूपी और बिहार के साथ ही किन-किन राज्यों से उपेंद्र के तार जुड़े हैं। वह किन सफेदपोशों और माओवादी संगठनों से जुड़ा रहा है। इसके अलावा उपेंद्र के परिवार और करीबियों का भी ब्योरा जुटाया जाएगा।
जेल में हैं गन हाउसों के मालिक
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फर्जी लाइसेंस पर शस्त्र बेचने के आरोप में 25 जुलाई को एटीएस ने खन्ना गन हाउस के मालिक विजय खन्ना, एके नियोगी के मालिक अमरजीत नियोगी, पूर्वांचल गन हाउस के जैनुल आब्दीन और जय जवान गन हाउस के मालिक राजीव शुक्ला को पकड़ा था। इन सभी के खिलाफ लखनऊ स्थित एटीएस के थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। तब से सभी आरोपी लखनऊ जेल में बंद हैं।
ये है गिरफ्तार करने वाली टीम के सदस्य
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सीओ मनीष सोनकर, इंस्पेक्टर हरीशंकर मिश्रा, दरोगा उपेंद्र सिंह, अनिरुद्ध दुबे, सिपाही संजय सिंह, रवि कुमार, चालक सिपाही विजय कुमार, बिहार एसटीएफ के दरोगा अतुलेश सिंह, सिपाही नवनीत कुमार और विमलेश।