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Ganesh Chaturthi 2022: घरों से लेकर पंडालों तक विराजे गजानन, गणपति बप्पा मोरिया की गूंज
Wed, 31 Aug 2022 11:44 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 31 Aug 2022 11:44 AM IST
सार
Ganesh Chaturthi 2022: कानपुर में जगह-जगह गणेश मूर्ति स्थापित की गईं। सुबह गजानन की आरती उतार कर प्रसाद वितरण हुआ। पंडालों में सुबह से ही गणपति के भजन शुरू हो गए।
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गणेश चतुर्थी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर में बुधवार को गणेश चतुर्थी पर घर से लेकर पंडालों तक गजानन विराजमान हुए। पूरे विधि-विधान के साथ गजानन की पूजा अर्चना की गई। इस दौरान पूरा पंडाल गणपति बप्पा मोरिया के उद्घोष से गूंज उठा। गोविंद नगर, किदवई नगर, ब्रह्म नगर चौराहा, नवाबगंज, अशोक नगर चौराहे पर गणपति की विशाल मूर्ति स्थापित की गई।
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सुबह गजानन की आरती उतार कर प्रसाद वितरण हुआ। पंडालों में सुबह से ही गणपति के भजन शुरू हो गए। मंगलवार रात से ही गणपति की घूम शहर में देखने को मिली।
400 वर्ष पुराना है बिठूर का गणेश मंदिर
बिठूर का गणेश मंदिर इतिहास आदि काल से जुड़ा हुआ है। यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है। मंदिर गंगा जी के तट पर लवकुश नगर में स्थित है। मंदिर में गणेश जी का मुख पूर्व दिशा की ओर है। सूर्य और चंद्रमा की प्रथम किरण सीधे गणेश भगवान की मूर्ति के ऊपर पड़ती है। सिद्ध विनायक होने के नाते गणेश भगवान के ऊपर सिंदूर चढ़ाया जाता है। यहां दिन भर भक्तों का ताता लगा रहता है। मंदिर में मोदक का भोग और दूब घास चढ़ाया जाता है। पुजारी प्रकाश टाकिलेकर ने बताया एक बार अंग्रेजी सेना ने मंदिर को तोप से उड़ाना चाहा लेकिन गणेश बप्पा की कृपा से गंगा की बाढ़ से इतनी बालू आ गई कि अंग्रेजों को मंदिर का ही नहीं पता चल सका। गणेश भगवान की मूर्ति भी अन्य मूर्तियों से भिन्न है। इनका सूड़ दाहिनी तरफ है और मूसक पर सवार हैं, ऐसी मूर्ति बहुत ही कम देखने को मिलती है।
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