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Kanpur News: राजा जयचंद के किले में 15 साल से चार एकड़ जमीन पर कब्जा

Sat, 08 Aug 2026 11:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 08 Aug 2026 11:54 PM IST
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Four acres of land in King Jaichand's fort under encroachment for 15 years.
कन्नौज। इत्रनगरी के राजा जयचंद का किला सरकारी अनदेखी, राजनीतिक दावपेंच और भू-माफिया के कब्जे के बीच अपने अस्तित्व की अंतिम सांसें गिन रहा है। शहर के उत्तरी छोर पर स्थित यह ऐतिहासिक धरोहर केवल एक मिट्टी का टीला बनकर रह गई है। 15 साल बीतने के बाद भी इस किले को अवैध कब्जों से मुक्त कराने का हर अभियान अंततः ठंडे बस्ते में ही समा जाता है।
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वर्ष 2010 में जब किले के संरक्षण के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का उपमंडल कार्यालय खुला, तो उम्मीद जगी थी कि इतिहास फिर मुस्कुराएगा। एएसआई ने वर्ष 2011 में 14 एकड़ किले की जमीन की पैमाइश कर सीमांकन किया और इसे संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया। इसके बावजूद जमीनी हकीकत नहीं बदली, पैमाइश के बाद भी कब्जे की रफ्तार कम नहीं हुई। वर्तमान में चार एकड़ से अधिक संरक्षित भूमि पर पक्के मकान बन चुके हैं, जिनमें लोग रह रहे हैं। साथ ही व्यावसायिक कुटीर उद्योग भी चला रहे हैं।
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प्रशासनिक लाचारी का इससे बड़ा नमूना क्या होगा कि एक तरफ एएसआई धरोहर को बचाने की बात करता है, तो दूसरी तरफ जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) ने इसी अवैध कब्जे वाली जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कई पक्के मकान बनवा दिए। अब स्थिति यह है कि जिन मकानों को खुद सरकार ने बनवाया है, उन्हें हटाना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी कानूनी अड़चन बन गया है।
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नोटिस बोर्ड गायब, बैरिकेडिंग तोड़ भागे अराजक तत्व
राजनीतिक दबाव के कारण जब एएसआई पस्त हो गया, तो एक अगस्त 2017 को तत्कालीन एसडीएम सदर अरुण कुमार सिंह ने दोबारा पैमाइश कराई। 84 अवैध निर्माण चिन्हित कर बेदखली के नोटिस चस्पा किए गए। सुरक्षा के लिए एएसआई ने बैरिकेडिंग की और चेतावनी बोर्ड लगाए लेकिन कब्जेदारों और अराजक तत्वों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने बैरिकेडिंग उखाड़ फेंकी और नोटिस बोर्ड गायब कर दिए।
एएसआई के वरिष्ठ संरक्षण सहायक को नहीं जानकारी
एएसआई के तीन संरक्षित स्मारक हैं, जिनमें जयचंद किला, बालापीर, मखदूम जहानियां शामिल हैं। इसके लिए एएसआई ने लखनऊ मंडल के अंतर्गत एक कार्यालय भी किले के पास बनाया है। यहां वरिष्ठ संरक्षण सहायक के रूप में आयुष वर्मा की तैनाती है। उनकाे नोटिस के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि संरक्षित स्मारकों और कार्रवाई के बारे में राजधानी में बैठने वाले एएसआई के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र यादव ही कोई जानकारी दे सकते हैं।

आंकड़ों में किले का दर्द
14 एकड़ : राजा जयचंद किले का कुल रकबा।
चार एकड़ : वह संरक्षित भूमि जिस पर इस समय सीधा अवैध कब्जा है।
550 परिवार : किले की परिधि के आसपास निवास कर रहे कुल परिवार (अधिकांश मजदूर व छोटे कारोबारी)।
84 अवैध मकान : 2017 की पैमाइश में चिन्हित, जिन्हें नोटिस दिया गया था।
वर्जन
राजा जयचंद का किला एक संरक्षित स्मारक है। इसे हर हाल में कब्जामुक्त कराया जाएगा। इसके लिए राजस्व और पुलिस विभाग की एक संयुक्त टीम का गठन किया जा रहा है। जल्द ही एएसआई के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रणनीति बनाकर शासन के नियमानुसार अभियान चलाया जाएगा। -देवेंद्र सिंह, अपर जिलाधिकारी
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